03
April

शहीद के परिजनों को ये कैसा दिया जा रहा ढांढस!

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राजनेताओं द्वारा शहीदों के परिजनों को ढांढस बधाने की प्रक्रिया का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। जिसका उदाहण उत्तर प्रदेश स्थित देवरिया जिले के भटनी थाना क्षेत्र के छपिया जयदेव के विजय कुमार मौर्य का है। जो पुलवामा हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों में से एक थे। इनके परिजनों को ढांढस बधाने वालो में जहां तमाम नातेदारों रिश्तेदारों, शीर्ष नौकरशाहों थे तो वही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे। जो शहीद के घर शोक संवेदना व्यक्त करने गए थे। राज्य के मुख्यमंत्री का शहीद के घर जाकर शोक व्यक्त करना और यह आश्वासन देना कि शहीद के परिवार की सभी मांगों को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा। निश्चित तौर पर अच्छी बात है। मगर योगी आदित्यनाथ भी पुरुष वर्चस्ववादी उसी समाज के प्रतिनिधि निकले। जिनके लिए शायद महिलाओं की भावनाओं का कोई मतलब नहीं रहता या फि र महिला के साथ हमेशा दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है। ये उनकी मानसिकता में भी पैठा हुआ है। नहीं तो ऐसा क्यों होता कि जिस औरत का पति उसका जीने का आसरा उससे छिन गया हो, शहीद हो गया हो, उससे मुख्यमंत्री दो सांत्वना के बोल न बोल पाए। शायद योगी जी को यह अपने मर्दवादी अहं का अपमान लगा हो कि वे एक महिला से सांत्वना के दो बोल बोले उनसे मिले। इसीलिए तो शहीद विजय कुमार मौर्य की पत्नी विजयलक्ष्मी ने कहा है कि उनके लिए मुख्यमंत्री के उनके घर तक आने का कोई मतलब नहीं है। विजयलक्ष्मी कहती हैं, मुख्यमंत्री को एक बार को मुझसे कुछ पूछना तो चाहिए था। आखिर सुहाग उजड़ा है मेरा। मगर योगी जी केवल मेरे ससुर जी से बात किए। हमसे उन्होंने कुछ नहीं पूछा। हम वहीं पर बैठे हुए थे। योगी आदित्यनाथ को हमसे भी पूछना चाहिए, पति शहीद हुए हैं मेरे। एक बच्ची है। कैसे रहोगी और आगे क्या करोगी? इस बारे में दो बोल तक न निकले उनके मुंह से। यह सही है कि किसी के शोक संवेदना व्यक्त करने से विजयलक्ष्मी को अपना पति वापस नहीं मिल जाता। मगर एक उम्मीद जरूर बंधती कि मैं अकेले नहीं हूं। हमारें साथ हमारी सरकार खड़ी है। मेरी बच्ची का भविष्य अंधकारमय नहीं होगा।

 

शायद योगी के मुंह से निकले बोल विजय लक्ष्मी के लिए मरहम का काम करते, मगर अपना मर्दवादी रवैया दिखा योगी ने उसे यह कहने को मजबूर कर दिया कि उनके लिए मुख्यमंत्री के उनके घर तक आने का कोई मतलब नहीं है। गौरतलब है कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहीद विजय कुमार मौर्य के घर गए थे तब उनके साथ कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी थे। योगी ने बेशक यह कहा कि मैं राज्य सरकार और केंद्र सरकार की तरफ से आश्वस्त करता हूं कि शहीदों के परिवार के साथ हम खड़े हैं और उन्हें पूरा सहयोग दिया जाएगा, मगर ऐसा कौन सा सहयोग की मुख्यमंत्री शहीद की पत्नी से शोक संवेदना तक व्यक्त न कर पाये और न ही उसे वह आश्वस्ति दिला पाये जिसकी शायद वह उम्मीद कर रही थी। 

अमर सिंह अंजान, देवरिया

 

 

 

Read 98 times Last modified on Wednesday, 03 April 2019 06:09
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