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March

सोशल मीडिया का जमाना और फेसबुक डाटा की चोरी व दुरपयोग पर विशेष

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bhola natha misra via whatsapp

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बाराबंकी। आजकल सोशल मीडिया का जमाना आ गया है और सोशल मीडिया से दुनिया भर के छोटे बड़े अमीर गरीब पढ़ें लिखे गंवार से लेकर साम्प्रदायिक आतंकी सभी जुड़े हैं।गाँव देहात में व्हाट्सएप और फेसबुक का इस्तेमाल होना एक आमबात हो गयी है।इस समय देश के अस्सी फीसदी से ज्यादा लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं।लोग समझते हैं कि सोशल मीडिया पर जो कुछ भी चैटिंग अथवा पोस्टिंग की जाती है उसका कोई दुरपयोग नहीं कर सकता है लेकिन जानकर लोग सोशल मीडिया के जरिये भी अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। सोशल मीडिया के दुरपयोग से सरकार परेशान हैं क्योंकि यह बेलगाम है और जो इच्छा हो वह संदेश इसमें पोस्ट कर सकते हैं।इसमें दो राय नहीं है कि सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान चलाकर लोगों की राजनैतिक पसंद और सोच बदल जाती है और इसमें कई बार लोगों को सफलता भी मिल चुका है। सोशल मीडिया पर आने वाली सूचनाओं की कोई प्रमाणिकता न होते हुए भी समाज को दिगभ्रमित करके विचारधारा बदलने में सहायक हो रही है अब तक सिर्फ गलत संदेश देकर लोगों को गुमराह किया जाता था लेकिन अब तो फेसबुक के डाटा की चोरी भी शुरू हो गई है। ताज्जुब तो इस बात की है कि यह चोरी करके उसका राजनैतिक दुरपयोग होने लगा है।अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों के फेसबुक उपभोक्ताओं के डाटा चोरी करके उनका इस्तेमाल चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का खुलासा जितना सनसनीखेज आश्चर्य चकित करने वाला है उतना ही चिंताजनक भी है। फेसबुक का डाटा चोरी करके उसका इस्तेमाल विश्व के तमाम राजनेताओं के लिए करने का आरोप ब्रिटिश की एक कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका पर लगाया गया है।

इन नेताओं में सर्वशक्तिमान अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं और आशंका जताई जा रही है कि चोरी किये गए फेसबुक डाटा का दुरपयोग ब्रिटेन के यूरोपीय समुदाय से अलग होने के मामले में कराये गये जनमत संग्रह यानी ब्रेक्जिट के दौरान किया गया है।डाटा चोरी करने वाली इस कंपनी की सहयोगी कंपनी ने स्वीकार किया है कि भारत में भी कई दलों को सेवाएँ प्रदान कर चुका है। यह सेवाएं किस तरह की थी इसका अभी खुलासा नहीं किया है जबकि इसका भी खुलासा होना चाहिए क्योंकि भारत भी डिजिटल इंडिया बनने के दौर से गुजर रहा है। सोशल मीडिया खासतौर पर फेशबुक से डाटा चोरी करके उसका बेजा मनमाना इस्तेमाल करना करोडों उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी करने जैसा अपराधिककृत्य है।इसका खुलासा होने के बाद सरकार के सख्त चेतावनी और सख्त रुख को देखकर फेसबुक के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने परसों गलती के लिए माफी माँग ली है लेकिन मामला माफी मांगने नहीं बल्कि सजा देने योग्य है।सोशल मीडिया के आने के बाद इसके माध्यम से कई जगहों पर सामप्रदायिक उन्माद फैल चुका है और समाज में जहर घोलने का क्रम जारी है। 

भोलानाथ मिश्र

वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी 

रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

 

Read 268 times Last modified on Thursday, 29 March 2018 07:52
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