03
April

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यह हमारे लिए गौरव की बात है कि हमारा देश दुनिया में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है लेकिन दुर्भाग्य है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने वाली  राजनीति का स्वरूप आजादी के बाद से ही धीरे धीरे बदलता जा रहा है। स्वस्थ राजनीति की परिकल्पना लोकतांत्रिक व्यवस्था में की गई थी लेकिन आज उसका स्वरूप राजनीतिक सत्ता तक पहुंचने का माध्यम मात्र तक सीमित होता जा रहा है। आजादी के बाद से राजनीति कूटनीति मैं बदल कर लोकतंत्र एवं देश दोनों के भविष्य के लिए खतरा बनती जा रही है। राजनीतिक लोग सत्ता तक पहुंचने के लिए सारे उसूलों सिद्धांतों को ताक पर रखकर देश की अस्मिता तक को दांव पर लगाने से नहीं चूक रहे हैं। आज जम्मू कश्मीर की समस्या हमारी राजनीति का ही प्रतिफ ल है जिसे आज पूरा देश झेल रहा है। हम ने यह भी कहा था की हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीति ऐसी है जिसके चलते आज जम्मू कश्मीर में कुछ लोग राजनीतिक लाबादा ओढआतंकवाद को बढ़ावा  एवं आतंकवादियों को बना दे रहे हैं और हम लोकतांत्रिक व्यवस्था के चलते उन पर प्रतिबंध नहीं लगा पा रहे हैं। राजनीति में सत्ता तक पहुंचने के लिए ही आज हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान आतंकवाद समर्थक अपनी गुप्तचर एजेंसी और सेना के हाथों खेलने पर मजबूर हैं और उसे मजबूरी में राजनीति लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं सिद्धांतों के विपरीत खिलौने की तरह खेलना पड़ रहा है।

03
April

राजनेताओं द्वारा शहीदों के परिजनों को ढांढस बधाने की प्रक्रिया का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। जिसका उदाहण उत्तर प्रदेश स्थित देवरिया जिले के भटनी थाना क्षेत्र के छपिया जयदेव के विजय कुमार मौर्य का है। जो पुलवामा हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों में से एक थे। इनके परिजनों को ढांढस बधाने वालो में जहां तमाम नातेदारों रिश्तेदारों, शीर्ष नौकरशाहों थे तो वही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे। जो शहीद के घर शोक संवेदना व्यक्त करने गए थे। राज्य के मुख्यमंत्री का शहीद के घर जाकर शोक व्यक्त करना और यह आश्वासन देना कि शहीद के परिवार की सभी मांगों को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा। निश्चित तौर पर अच्छी बात है। मगर योगी आदित्यनाथ भी पुरुष वर्चस्ववादी उसी समाज के प्रतिनिधि निकले। जिनके लिए शायद महिलाओं की भावनाओं का कोई मतलब नहीं रहता या फि र महिला के साथ हमेशा दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है। ये उनकी मानसिकता में भी पैठा हुआ है। नहीं तो ऐसा क्यों होता कि जिस औरत का पति उसका जीने का आसरा उससे छिन गया हो, शहीद हो गया हो, उससे मुख्यमंत्री दो सांत्वना के बोल न बोल पाए। शायद योगी जी को यह अपने मर्दवादी अहं का अपमान लगा हो कि वे एक महिला से सांत्वना के दो बोल बोले उनसे मिले। इसीलिए तो शहीद विजय कुमार मौर्य की पत्नी विजयलक्ष्मी ने कहा है कि उनके लिए मुख्यमंत्री के उनके घर तक आने का कोई मतलब नहीं है। विजयलक्ष्मी कहती हैं, मुख्यमंत्री को एक बार को मुझसे कुछ पूछना तो चाहिए था। आखिर सुहाग उजड़ा है मेरा। मगर योगी जी केवल मेरे ससुर जी से बात किए। हमसे उन्होंने कुछ नहीं पूछा। हम वहीं पर बैठे हुए थे। योगी आदित्यनाथ को हमसे भी पूछना चाहिए, पति शहीद हुए हैं मेरे। एक बच्ची है। कैसे रहोगी और आगे क्या करोगी? इस बारे में दो बोल तक न निकले उनके मुंह से। यह सही है कि किसी के शोक संवेदना व्यक्त करने से विजयलक्ष्मी को अपना पति वापस नहीं मिल जाता। मगर एक उम्मीद जरूर बंधती कि मैं अकेले नहीं हूं। हमारें साथ हमारी सरकार खड़ी है। मेरी बच्ची का भविष्य अंधकारमय नहीं होगा।

29
March

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बाराबंकी। धरती पर जल यानी पानी ईश्वर द्वारा सभी प्राणियों को जीवित रहने के लिए दिया गया अनमोल अमृत वरदान है शायद इसीलिए कहा गया है कि-" रहिमन पानी राखिएं बिनु पानी सब सून-----। एक पानी ही ऐसा अमृत पेय है जिसे पीकर प्राणी जिंदा रहा जा सकता है और पानी की कमी से जब शरीर ऐंठने लगता है तो ग्लूकोज पानी चढ़ाना पड़ता है। प्यास लगने पर अगर दस मिनट भी पानी नहीं मिलता है तो लगता है कि जान निकल जायेगी। पानी पीकर जान बचाने के लिए जंगली पशु पक्षियों को कभी कभी खतरे में डालकर आबादी के अंदर घुसना पड़ता है। प्रायः साँप भी आदमी की तरह पानी रुपी ओस को छाटकर जिन्दा रहता है और पानी की प्यास शेर और बकरी को कभी कभी एक घाट पर आने के लिए विवश कर देती है।पानी मनुष्य जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है और पानी के बिना शौच करना, नहाना, पूजा पाठ करना और भोजन करना कुछ भी संभव नहीं है। ईश्वर की पूजा अर्चना हो चाहे मृतक का अंतिम संस्कार हो हर जगह पानी की ही मुख्य भूमिका होती है।सभी जानते हैं कि पानी धरती के अंदर बह तरह जल धाराओं से आता है और जलवायु परिवर्तन का असर धरती के बाहर ही नहीं अंदर भी हुआ है। धरती का जलस्तर बरसात और जल संरक्षण पर निर्भर होता है।इधर औद्योगिक क्रांति एवं आधुनिकता के दौर में पानी की माँग और दुरपयोग कुछ मतलब से ज्यादा बढ़ गया है जिसके फलस्वरूप जलस्तर तेजी से नीचे जाने लगा है। जिन क्षेत्रों में तीन दशक पहले पानी पन्द्रह फुट पर था उन्हीं क्षेत्रों में जलस्तर बत्तिस से अड़तिस चालीस फुट पर पहुंच गया है और कहा जाता है कि अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए होगा।देश और प्रदेश के तमाम जिले ऐसे हैं जो जहाँ पर पीने के पानी की समस्या है क्योंकि वहाँ पर जलस्तर बहुत नीचे भाग गया है।

29
March

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बाराबंकी। आजकल सोशल मीडिया का जमाना आ गया है और सोशल मीडिया से दुनिया भर के छोटे बड़े अमीर गरीब पढ़ें लिखे गंवार से लेकर साम्प्रदायिक आतंकी सभी जुड़े हैं।गाँव देहात में व्हाट्सएप और फेसबुक का इस्तेमाल होना एक आमबात हो गयी है।इस समय देश के अस्सी फीसदी से ज्यादा लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं।लोग समझते हैं कि सोशल मीडिया पर जो कुछ भी चैटिंग अथवा पोस्टिंग की जाती है उसका कोई दुरपयोग नहीं कर सकता है लेकिन जानकर लोग सोशल मीडिया के जरिये भी अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। सोशल मीडिया के दुरपयोग से सरकार परेशान हैं क्योंकि यह बेलगाम है और जो इच्छा हो वह संदेश इसमें पोस्ट कर सकते हैं।इसमें दो राय नहीं है कि सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान चलाकर लोगों की राजनैतिक पसंद और सोच बदल जाती है और इसमें कई बार लोगों को सफलता भी मिल चुका है। सोशल मीडिया पर आने वाली सूचनाओं की कोई प्रमाणिकता न होते हुए भी समाज को दिगभ्रमित करके विचारधारा बदलने में सहायक हो रही है अब तक सिर्फ गलत संदेश देकर लोगों को गुमराह किया जाता था लेकिन अब तो फेसबुक के डाटा की चोरी भी शुरू हो गई है। ताज्जुब तो इस बात की है कि यह चोरी करके उसका राजनैतिक दुरपयोग होने लगा है।अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों के फेसबुक उपभोक्ताओं के डाटा चोरी करके उनका इस्तेमाल चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का खुलासा जितना सनसनीखेज आश्चर्य चकित करने वाला है उतना ही चिंताजनक भी है। फेसबुक का डाटा चोरी करके उसका इस्तेमाल विश्व के तमाम राजनेताओं के लिए करने का आरोप ब्रिटिश की एक कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका पर लगाया गया है।

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