06
April

मैनफोर्स

बाराबंकी। जनपद के देंवा मार्ग पर स्थित भारतीय खाद्य निगम के डिपो में श्रमिकों का उत्पीडऩ करते हुए सुबह साढ़े नौ बजे से लेकर रात नौ बजे तक पी.डी.एस. लोडिंग, लेवी अनलोडिंग व स्टैटिंग स्कीम के अन्तर्गत खाद्यान्न लोडिंग का कार्य कराया जाता है। जबकि मजदूरों की कार्य अवधि सुबह साढ़े नौ बजे से लेकर साढ़े पांच बजे सांय तक निर्धारित है। यह जानकारी देते हुए शिवसेना जिला प्रमुख मनोज विद्रोही ने बताया कि डिपों पर सहायक प्रबंधक द्वारा मजदूरों का उत्पीडऩ करते हुए सांय पांच बजे के बाद ट्रकों को लोडिंग व अनलोडिंग हेतु डिपों में प्रवेश कराया जाता है। इस प्रकार वर्क व समय से अधिक कार्य लिया जा रहा है। डिपों के अन्तर्गत श्रमिकों के लिए व्यवस्थायें शून्य है। विद्युत पेयजल व चिकित्सा की समुचित व्यवस्था नहीं है। श्रमिकों को जहरीले कीड़े के दशं से बचाव के कोई साधन व औषधि नहीं है।

06
April

मैनफोर्स

बाराबंकी। एक तरफ जहां सरकारी जमीनों को दबंग भू-माफि याओं के चंगुल से मुक्त कराने के लिए सूबे की योगी सरकार एंटी भू-माफियां जैसे अभियान चलाकर भू माफियाओं के हौसले को पस्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है तो वही कुछ ऐसे भी भू-माफिया है। जिनको सरकार की इस प्रकार की कार्यवाही का लेस मात्र भी खौफ नहीं है और धडल्ले से अवैध खनन जैसे अनैतिक कृत्यों को अंजाम दे रहे है। जिसका एक छोटा सा उदाहरण जनपद बाराबंकी के तहसील रामसनेहीघाट के एक गांव में बांसगांव में देखने को मिल रहा है। यहां पशुपालन विभाग की सरकारी जमीनों पर कुछ तथाकथित भूमाफि या आज भी अंगद के पांव की भांति अपना कब्जा जमाए हुए हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री समेत उच्चाधिकारियों से शिकायत भी की गई। मगर नतीजा सिफर रहा है। जनपद बाराबंकी की तहसील रामसनेहीघाट क्षेत्र के ग्राम बांसगांव में पशुपालन विभाग की 350 हेक्टेयर भूमि पर तहसील प्रशासन की मिलीभगत से दबंगों का कब्जा है।

06
April

भ्रष्टाचारियों की पौ-बारह: बुजुर्ग से बाबू ने मांगा ढाई हजार रूपया

मैनफोर्स

अमेठी। समाज में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों की जडे इतनी मजबूत हो गई है कि उनका कोई बाल भी बांका नहीं कर पा रहा है। जिधर देखों उधर घूखखोरो और भ्रष्टाचारियों की एक लम्बी फौज खडी दिखाई देती है। कोई भी ऐसा सरकारी या गैर सरकारी प्रतिष्ठान नहीं है। जहां बिना भ्रष्टाचार के कोई काम आसानी हो सके। हर काम के लिए आम आदमी को घूस देना अनिवार्य है। आज घूसखोरी अभिशाप नहीं बल्कि एक अनिवार्य प्रथा है। घूसखोरों को किसी की भावना से कोई लेना देना नहीं है। वे पूर्णत: भाव शून्य होकर को समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड करते है। लोग विवश होकर उनकी बनाई गई अनिवार्य घूसखोरी की प्रथा में भागीदार बनने के लिए विवश होते है।

05
April
मनी लॉन्ड्रिंग के दर्ज मुकदमे में सूदखोरों की लम्बी फेहरिस्त सामने आयी

मैनफोर्स

लखनऊ। निगोहा में सूदखोर पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद सूदखोर की फेहरिस्त बहुत लम्बी खुलकर सामने आयी। इस सूदखोरी का धन्धा निगोहा ही नहीं मोहनलालगंज समेसी रायबरेली के बछरांवा तक मे फैला हुआ है। इसके संचालन के लिए निगोहा में लिखापढ़ी के लिए एक दर्जन से अधिक का भारी भरकम स्टाफ के अलावा करीब दो दर्जन से अधिक गुर्गो की फौज बनी थी। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद सूदखोर के गुर्गे भी अंडरग्राउंड हो गए है। वही निगोहा में दर्जनों ग्रामीण सूदखोर के गुर्गों को सबक सिखाने के लिए तलाश कर रहे है। निगोहा में सूदखोर द्वारा किसान छेदा का उत्पीडऩ का मामला अकेला नही है।

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