06
April

भ्रष्टाचारियों की पौ-बारह: बुजुर्ग से बाबू ने मांगा ढाई हजार रूपया

मैनफोर्स

अमेठी। समाज में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों की जडे इतनी मजबूत हो गई है कि उनका कोई बाल भी बांका नहीं कर पा रहा है। जिधर देखों उधर घूखखोरो और भ्रष्टाचारियों की एक लम्बी फौज खडी दिखाई देती है। कोई भी ऐसा सरकारी या गैर सरकारी प्रतिष्ठान नहीं है। जहां बिना भ्रष्टाचार के कोई काम आसानी हो सके। हर काम के लिए आम आदमी को घूस देना अनिवार्य है। आज घूसखोरी अभिशाप नहीं बल्कि एक अनिवार्य प्रथा है। घूसखोरों को किसी की भावना से कोई लेना देना नहीं है। वे पूर्णत: भाव शून्य होकर को समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड करते है। लोग विवश होकर उनकी बनाई गई अनिवार्य घूसखोरी की प्रथा में भागीदार बनने के लिए विवश होते है।

05
April
मनी लॉन्ड्रिंग के दर्ज मुकदमे में सूदखोरों की लम्बी फेहरिस्त सामने आयी

मैनफोर्स

लखनऊ। निगोहा में सूदखोर पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद सूदखोर की फेहरिस्त बहुत लम्बी खुलकर सामने आयी। इस सूदखोरी का धन्धा निगोहा ही नहीं मोहनलालगंज समेसी रायबरेली के बछरांवा तक मे फैला हुआ है। इसके संचालन के लिए निगोहा में लिखापढ़ी के लिए एक दर्जन से अधिक का भारी भरकम स्टाफ के अलावा करीब दो दर्जन से अधिक गुर्गो की फौज बनी थी। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद सूदखोर के गुर्गे भी अंडरग्राउंड हो गए है। वही निगोहा में दर्जनों ग्रामीण सूदखोर के गुर्गों को सबक सिखाने के लिए तलाश कर रहे है। निगोहा में सूदखोर द्वारा किसान छेदा का उत्पीडऩ का मामला अकेला नही है।

05
April

मैनफोर्स

लखनऊ। कोतवाली मडियाव क्षेत्र के अंतर्गत सदर तहसील में आने वाला घैला गांव की जमीन पर कुछ दबंग प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा चक मार्ग पर लेखपाल विमल द्विवेदी ने मोटी रकम लेकर करवा दिया निर्माण। क्षेत्र के घैला गांव में चकरोड पर निर्माण के चलते गांव मे तनाव व्याप्त है ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी से गुहार लगाकर चकरोड को पूर्णता कायम करने की मांग की है चकरोड पर निर्माण हो जाने से आवागमन बंद हो गया है ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के दबंगों ने मुन्ना पुत्र सनातन, बबलू पुत्र वहिदुल निवासी घैला लंबे चौड़े चक मार्ग को खत्म कर दिया है गांव में तनाव व्याप्त है। कई बार उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत व समाधान दिवस में शिकायत पत्र देने के बावजूद दबंग प्रॉपर्टी डीलर अभिषेक मित्तल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

05
April

मैनफोर्स

लखनऊ। एक तरफ  जहां केन्द्र सरकार जोर—शोर से स्वच्छ भारत अभियान को साकार करने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है। वही दूसरी ओर लखनऊ नगर निगम के आलाधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा केन्द्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां उडाने में कोई कोर कसर नहीं छोडा जा रहा है। पाठकों को बता दें कि राजधानी लखनऊ के पुराने क्षेत्रों के गलियों की नालियां गंदगी से बज बजा रही है। पुराने लखनऊ का क्षेत्र खुलेआम बज बजाती नालियों, बिखरें कचरेए गली—गली टूटी और धंसी सडके पूरी तरह से जहां स्वच्छ भारत अभियान की पोल खोल रही है तो वहीं दूसरी ओर स्वच्छ भारत अभियान को सार्थक बनाने वाली सरकारी मशीनरियों की नियत को भी बयां कर रही है। पुराने लखनऊ के लोगों का जीवन गंदगी के अंबार में बैठकर नरक बना हुआ है। नगर निगम लखनऊ राजधानी को कागज़ो में स्वच्छ बनाने और स्वच्छता की सूची में लखनऊ को प्रथम स्थान पर लाने का दावा कर रहा और मगर उसके सारें दावे पुराने लखनऊ की गलियों में घुसते ही ध्वस्त हो जा रहे है।

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