08
April

जांच और कार्यवाही के नाम पर महज खानापूर्ति करता है खाद्य विभाग 

मैनफोर्स

गोण्डा। सरकार आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए तरह तरह के नियम कानून और उन नियमो को पालन कराने के लिए संविधान के तहत विभाग भी बने हुए है। किंतु आर्थिक पूर्ति के चलते सभी नियम कानून सिर्फ कागजो तक ही सीमित होकर रह गए है। वही दूधिया लोग मिलावटी दूध खुले आम सुबह दूध लेकर रोड पर दिखाई देते है। मगर खाद्य विभाग को खुले आम चुनौती देते है। इन दुधियो के ऊपर कोई कार्यवाही नही करते है। इससे इनके हौशला बुलन्द है, मिलावटी दूध बेच रहे है। लगभग सभी सड़कों पर दिखाई देते है। मानव मशीनरी को सुचारू रूप से चलाने के लिए शुद्ध वातावरण के साथ शुद्ध खाद्य सामग्रियों की अहम भूमिका रही है। बदलते दौर में शुद्ध वातावरण में बदलाव आए है तो वही खाद्य सामग्रियों की शुद्धता मिलावट खोरों के ज्यादा मुनाफे की भेंट चढ़ गई है।

07
April

मैनफोर्स

गोण्डा। बहुत प्रचलित और पुरानी कहावत है कि खुदा मेहरबान, तो गधा पहलवान! यह कहावत आम लोगों पर ही नहीं, बल्कि अधिकारियों और उनके अधीनस्थों पर भी लागू होती है। आलम यह है कि जिले के उच्चाधिकारी अपने ही आदेशों को रौंदते हुए बैकफुट पर आ जाते हैं। इसकी बानगी के तौर पर हम सीएमओ गोण्डा के दो आदेशों को पेश कर रहे हैं। दरअसल, जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी सीएमओ डॉ. संतोष श्रीवास्तव को मनकापुर सीएचसी पर तैनात एक डॉक्टर के सामने घुटने टेकने पड़े और करनैलगंज सीएचसी अधीक्षक के रसूख के आगे भी उन्हें नतमस्तक होना पड़ा। बताते चलें कि जिले के वीवीआईपी माने जाने वाले मनकापुर सीएचसी में बीते 20 वर्षों से तैनात डॉ. अनिल कुमार राय को सीएमओ ने हाल ही में जिला मुख्यालय के महिला अस्पताल में तैनाती का फ रमान जारी कर दिया।

06
April

मैनफोर्स

बाराबंकी। जनपद के देंवा मार्ग पर स्थित भारतीय खाद्य निगम के डिपो में श्रमिकों का उत्पीडऩ करते हुए सुबह साढ़े नौ बजे से लेकर रात नौ बजे तक पी.डी.एस. लोडिंग, लेवी अनलोडिंग व स्टैटिंग स्कीम के अन्तर्गत खाद्यान्न लोडिंग का कार्य कराया जाता है। जबकि मजदूरों की कार्य अवधि सुबह साढ़े नौ बजे से लेकर साढ़े पांच बजे सांय तक निर्धारित है। यह जानकारी देते हुए शिवसेना जिला प्रमुख मनोज विद्रोही ने बताया कि डिपों पर सहायक प्रबंधक द्वारा मजदूरों का उत्पीडऩ करते हुए सांय पांच बजे के बाद ट्रकों को लोडिंग व अनलोडिंग हेतु डिपों में प्रवेश कराया जाता है। इस प्रकार वर्क व समय से अधिक कार्य लिया जा रहा है। डिपों के अन्तर्गत श्रमिकों के लिए व्यवस्थायें शून्य है। विद्युत पेयजल व चिकित्सा की समुचित व्यवस्था नहीं है। श्रमिकों को जहरीले कीड़े के दशं से बचाव के कोई साधन व औषधि नहीं है।

06
April

मैनफोर्स

बाराबंकी। एक तरफ जहां सरकारी जमीनों को दबंग भू-माफि याओं के चंगुल से मुक्त कराने के लिए सूबे की योगी सरकार एंटी भू-माफियां जैसे अभियान चलाकर भू माफियाओं के हौसले को पस्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है तो वही कुछ ऐसे भी भू-माफिया है। जिनको सरकार की इस प्रकार की कार्यवाही का लेस मात्र भी खौफ नहीं है और धडल्ले से अवैध खनन जैसे अनैतिक कृत्यों को अंजाम दे रहे है। जिसका एक छोटा सा उदाहरण जनपद बाराबंकी के तहसील रामसनेहीघाट के एक गांव में बांसगांव में देखने को मिल रहा है। यहां पशुपालन विभाग की सरकारी जमीनों पर कुछ तथाकथित भूमाफि या आज भी अंगद के पांव की भांति अपना कब्जा जमाए हुए हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री समेत उच्चाधिकारियों से शिकायत भी की गई। मगर नतीजा सिफर रहा है। जनपद बाराबंकी की तहसील रामसनेहीघाट क्षेत्र के ग्राम बांसगांव में पशुपालन विभाग की 350 हेक्टेयर भूमि पर तहसील प्रशासन की मिलीभगत से दबंगों का कब्जा है।

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