06
April

शादी का अनुदान लेना है तो दीजिए घूस

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भ्रष्टाचारियों की पौ-बारह: बुजुर्ग से बाबू ने मांगा ढाई हजार रूपया

मैनफोर्स

अमेठी। समाज में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों की जडे इतनी मजबूत हो गई है कि उनका कोई बाल भी बांका नहीं कर पा रहा है। जिधर देखों उधर घूखखोरो और भ्रष्टाचारियों की एक लम्बी फौज खडी दिखाई देती है। कोई भी ऐसा सरकारी या गैर सरकारी प्रतिष्ठान नहीं है। जहां बिना भ्रष्टाचार के कोई काम आसानी हो सके। हर काम के लिए आम आदमी को घूस देना अनिवार्य है। आज घूसखोरी अभिशाप नहीं बल्कि एक अनिवार्य प्रथा है। घूसखोरों को किसी की भावना से कोई लेना देना नहीं है। वे पूर्णत: भाव शून्य होकर को समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड करते है। लोग विवश होकर उनकी बनाई गई अनिवार्य घूसखोरी की प्रथा में भागीदार बनने के लिए विवश होते है।

अन्यथा उनका भी कार्य सामान्य और सरल तरीके नहीं हो पाया। ऐसे ही घूसखोरी की एक प्रथा का वर्णन समाचार पत्र आपके सामने कर रहा है। जहां सरकारी विभाग का बाबू भाव शून्य होकर एक बुजुर्ग से से उसकी बेटी के लिए आवंटित शादी के अनुदान की राशि देने के लिए ढाई हजार की घूस मांगी। जब उक्त घूसखोरी की रकम देने में बुजुर्ग ने असमर्थता जताई तो उसे उक्त भ्रष्टाचारी सरकारी कर्मी ने कार्यालय से डांट कर भगा दिया। मामला जनपद अमेठी के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का है। जहां बुजुर्ग सहाबुद्दीन निवासी ऊंच गांव थाना शुकुल बाजार जनपद अमेठी ने अपनी बिटिया की शादी कराने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग आवेदन किया था। मगर उसे पैसा नहीं मिला। उसने बमुश्किल अपनी बिटिया की शादी की। शादी के बाद पुन: अल्प संख्यक कल्याण से 20 हजार रूपये शादी के अनुदान के रूप में मंजूर हो गई। मगर उक्त रकम देने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के बाबू राजकुमार ने सहाबुद्दीन से ढाई हजार रूपये की रिश्वत मांगी। सहाबुद्दीन ने रूपये देने में असमर्थता जताते हुए अपनी दयनीय अवस्था रोते-रोते विभाग के बाबू राजकुमार से कही। मगर उसके बावजूद भी राजकुमार का दिल नहीं पसीजा और उसने शादी के अनुदान की रकम देने से इंकार कर दिया और उसे कार्यालय से भगा दिया। मामले की सूचना कुछ लोगों ने समाचार पत्र को दी। समाचार पत्र ने जब मामले के संबंध में सहाबुद्दीन से वार्ता की तो सहाबुद्दीन ने कहाकि बाबू राजकुमार ने बिना पैसे के लिए शादी के अनुदान को देने से इंकार कर दिया। जबकि उसने कहाकि साहब जब इतना पैसा होता तो हम शादी के अनुदान के लिए आपके पास क्यों आते है। हम खुद ही व्यवस्था कर लेते है। साहब हम बहुत गरीब है। हमारी हालत पर तरस खाईयें। मगर बाबू राजकुमार ने मुझे कार्यालय से डांट कर भगा दिया और कहा कि जब पैसा होगा तभी आना उसके पहले अनुदान के बारें में मत सोचना। बिना पैसे लिए काम नहीं हो पायेगा।

 

 

 

 

Read 387 times Last modified on Saturday, 06 April 2019 08:17
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