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March

षिक्षकों की नियुक्ति करने में प्रदेश सरकार पूर्णतः असफल :डा0 मसूद

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लखनऊ। नया षिक्षा सत्र अप्रैल माह से प्रारम्भ होने जा रहा है परन्तु प्रदेश सरकार एक वर्ष बीत जाने के बाद भी प्राथमिक विद्यालयों से लेकर इण्टर कालेजों तक षिक्षकों की नियुक्ति करने में पूर्णतः असफल रही है जिससे षिक्षा के प्रति सरकार की उदासीनता स्पष्ट है। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व षिक्षा मंत्री डाॅ0 मसूद अहमद ने कहा कि विगत वर्ष 19 मार्च को सरकार के शपथ ग्रहण के बाद से ही षिक्षा सत्र तीन महीने देर से शुरू हो सका और फिर भी पुस्तके आदि नहीं उपलब्ध हो सकी। जिसके फलस्वरूप उनकी षिक्षा व्यवस्था में व्यवधान हुआ और परीक्षाएं फरवरी के ही महीने में आयोजित कर दी गयी। यह कृत्य विद्यार्थियों के साथ धोखा है क्योंकि जब षिक्षक और पुस्तके दोनो ही उपलब्ध न हो तो अच्छी षिक्षा अथवा परीक्षा की तैयारी सोचना बेइमानी है। प्रदेश सरकार आज भी टी0ई0टी0 2011 उत्तीर्ण बी0एड0 अभ्यर्थियों को नौकरी की मांग करने पर पुलिस से लाठीचार्ज कराकर भगा देती है जिससे बेरोजगारों में भी असंतोष और घोर निराषा व्याप्त है। साथ ही बच्चों के अभिभावक षिक्षा के प्रति सरकार की उपेक्षा से चिंतित है। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार प्राइवेट स्कूल कालेजों के प्रति अधिक मेहरबान है जहां पर अभिभावक अपना सबकुछ लुटाकर अपने बच्चों की षिक्षा दिलाने में ही भलाई समझता है। रालोद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेष सरकार के मुखिया को षिक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरूस्त करने हेतु कोई पारदर्षी प्रणाली लागू करनी चाहिए जिससे प्रदेष के नौनिहालों को सही दिषा मिल सके और षिक्षा प्राप्त नौजवानों को रोजगार के अवसर मिल सके। किसी भी प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए षिक्षा एवं स्वास्थ बेहतर होनाा चाहिए क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क सम्भावित है और प्रदेश सरकार दोनो ही मामलों में असफल है। 

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