06
April

भ्रष्टचार के दाग से रंगा-पुता है लिपिक का दामन

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मैनफोर्स

बहराइच। वैसे तो जनपद के माध्यमिक शिक्षा विभाग से उठ रही घोटाले पर घोटाले की खबरें कोई नई बात नहीं है लेकिन लगातार सब कुछ सामने होने के बाद भी उक्त विभाग में भ्रष्टाचार का पाया जाना न सिर्फ जिला प्रशासन व  जिम्मेदारों की नाकामयाबियों को दर्शाता है बल्कि जनपद से ही उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट व राज्य मंत्री के प्रतिनिधित्वकर्ता के साथ-साथ सांसदों, प्रदेश उपाध्यक्ष व कई विधायकों के कार्य प्रणालियों पर भी अनायास ही सवाल पर सवाल खड़ा करता नजर आ रहा है। मालूम हो कि माध्यमिक शिक्षा विभाग का जनपदीय भार संभालने के साथ साथ अवैध नियुक्तियों के माहिर खिलाड़ी माने जाने वाले डीआईओएस राजेंद्र कुमार पांडे अपने फैजाबाद कार्यकाल से लेकर वर्तमान बहराइच तक भ्रष्टाचार के दर्जनों आरोपों से घिरने के बाद भी खुद तो जनपद में जमे ही हुए हैं और ऐसे ही डीआईओएस के संरक्षण में जहाँ पूर्व में यहां से गैर जनपद स्थानांतरित हुआ भ्रष्ट व दागी लिपिक हरेंद्र सिंह घोटाले दर घोटाले करता रहा।

जो कि जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव द्वारा कड़ा संज्ञान लेने के बाद बमुश्किल जनपद से हटाया जा सका था। वही अब उसी रिक्त जगह को  भरने के लिए एक बार फिर पूर्व में इसी कार्यालय को शराब का अड्डा बनाने वाला व इसी विभाग से पूर्व में करोङो रुपयों से अधिक का आरोपी रहा शिवलाल अपने जुगाड़ के दम पर अपनी खोई हुई जगह पाने में कामयाब होकर  अपने पुराने अड्डे पर लौटते हुए अपने कारनामों को अंजाम देता  नजर आ रहा है।  अगर इनके शिकायतों पर गौर किया जाए तो पूर्व में इनके द्वारा जिला विधायक निरीक्षक कार्यालय में तैनाती के दौरान जनपद के वरिष्ठ प्रशानिक अधिकारियों को गुमराह व धोखे में रख कर सावित्रीबाई फूले बालिका शिक्षा मदद योजना व कन्या विद्या धन योजना में करोड़ो का घोटाला वर्ष 2009  से वर्ष 2012 तक व 2012 से 2014 के बीच कर डाला गया। बताया जाता है कि विभागीय मानको की धज्जियां उड़ाते हुए शिवलाल वर्षों से इसी जनपद में तैनात रहा है। एक बार हिम्मत जुटाकर संयुक्त शिक्षा निदेशक देवीपाटन मंडल शिक्षा भवन फैजाबाद, उदय राज द्वारा इसका स्थानांतरण कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोण्डा के यहां किया गया था।  किंतु जनपद में महा घोटाले बाज के रूप में जाने जा रहे तत्कालीन डीआईओएस रविंद्र कुमार सिंह के रहमों करम पर ये यहां से मुक्त नहीं किया गया और शिवलाल वरिष्ठ सहायक को उक्त सचिव द्वारा निलंबित कर दिया गया। मगर इसके बाद भी अपनी ऊंची पहुंच व रसूख के दम पर यह पुन: बहाल हो कर राजकीय इंटर कॉलेज बहराइच पहुंच गया और लगभग सन दो हजार से लगातार बहराइच में जमा हुआ है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि अल्प समय के लिए यह एक बार स्थानांतरित हो चुका है। बताया यह भी जाता है कि इनके चरित्र व शराब को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय कई बार बदनाम भी हो चुका है। इन पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि सावित्रीबाई फू ले बाल शिक्षा मदद योजना एवं कन्या विद्या धन योजना से संबंधित जो भी पात्र अथवा अपात्र छात्राएं यदि किसी समस्या के निष्पादन हेतु कार्यालय आती थी तो इनके द्वारा अभद्रता पूर्वक उनके कार्यों को गैरकानूनी तरीके से संपादित किया जाता था।बताते हैं कि शिवलाल द्वारा पूर्व में जिन विद्यालयों को लाभ पहुंचाया गया था वह पूर्णतया स्ववित्तपोषित एवम फर्जी तरीके से प्रवेश करने के साथ साथ बिना पंजीकरण कराएं ही छात्र एवं छात्राओं को उत्तीर्ण कराने में पारंगत माने जाते हैं। विश्वसनीय सूत्रों की माने तो ऐसे विद्यालयों में राम प्रकाश इंटर कॉलेज सुहेल्वा, बहराइच, राष्ट्रीय कृषि इंटर कॉलेज ऐलिहा, आचार्य विनोद कुमार मदन गोपाल इंटर कॉलेज कटघरी सुग्रीव सिंह, श्री राम जानकी मनोहर लोहिया बालिका इंटर कॉलेज गढ़वा नवतला, एमडीयू इंटर कॉलेज प्रभु नगर,  पारसनाथ इंटर कॉलेज चेतरा, कैंब्रिज इंटर कॉलेज खसहा मोहम्मदपुर, श्यामता प्रसाद इंटर कॉलेज भदौली, व महिमा महिला इंटर कॉलेज गोकुलपुर बहराइच के नाम प्रमुख रूप से बताये जाते है। जिनके द्वारा करोड़ों रुपयों का लाभ अपंजीकृत छात्राओं के नाम विभिन्न बैंकों में एक ही नाम से कई कई बार फ र्जी आईडी के सहारे खातों में संचालित कर लिया गया। इसके अलावा कई अन्य विद्यालयों में भी कुछ ना कुछ गैर कानूनी तरीके से लाभ लिए गए हैं। घोटालेबाज कर्मी शिवलाल के कृत्यों का हाल यह है कि इसके कारनामो से कई अधिकारी व लेखपाल तक जांच के दायरे में हैं। बावजूद इसकी ऊंची पहुंच व रसूख के दम पर अब तक यह इसी मनचाहे जनपद से चिपका हुआ है। बताया यहां तक जा रहा है कि अब तो यह इतना बेलगाम हो चुका है कि जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेशों को अपने ही हस्ताक्षर से जारी कर रहा है। फि लहाल मामला जो भी हो लेकिन उक्त कर्मी पर इतने बड़े बड़े जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं उससे तो यही साबित होता  नजर आता है कि कहीं न कहीं कुछ न कुछ गड़बड़ तो हुई है। बावजूद उक्त कर्मी द्वारा किये गए इतने बड़े बड़े घोटालों के बाद भी अगर यह जनपद में लगातार कई वर्षों से चिपका हुआ है तो यह माध्यमिक शिक्षा विभाग के विकास में एक काले अध्याय से ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। अब यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इसी विभाग के पूर्व भ्रष्ट वरिष्ठ लिपिक हरेंद्र सिंह की तरह भ्रष्ट वरिष्ठ लिपिक शिवलाल के मामले का भी संज्ञान जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव द्वारा लिया जायेगा।

 

 

 

Read 535 times Last modified on Saturday, 06 April 2019 09:06
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