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09
August

फ्लाईओवर के लिए हुई साढ़े तीन करोड़ की निविदा में बंदरबांट का षणयंत्रकारी

मैनफोर्स

लखनऊ। यूं तो भाजपा सरकार देश और प्रदेश के सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए तमाम बड़े-बड़े दावे और वादे करती रही है। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार को नजीर बनाकर कोसती रही है। मगर जब स्वयं सत्तासीन हुई तो उसे स्वयं के कार्यकाल में हो रहे भ्रष्टाचार पर नजर फिराने की भी फुर्सत नहीं रही है। बल्कि इसके विपरीत वह भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले लोगों के साथ ''उल्टा चोर, कोतवाल को डांटे'' वाली कहावत को चरितार्थ करने लगी है। भाजपा सरकार में कैसे सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पुष्पित और पल्लवित हो रहा हैं। इसका एक ताजा उदाहरण उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग में देखने को मिल रहा है। कुछ माह पूर्व खुर्रमनगर फ्लाईओवर का लगभग साढ़े तीन करोड़ की निविदा निकाली गई थी। निविदा निकालने के बाद कार्यो को क्रियान्वित किया जाने लगा। मगर क्रियान्वित कार्यो में खुलेआम मानकों की धज्जियां उड़ाकर कार्यो को संपादित किया जाने लगा। पाठकों को बता दें कि इसका श्रेय किसी और का नहीं बल्कि अधिशासी अभियंता  एसपी सक्सेना को जाता है। इससे पूर्व भी एसपी सक्सेना अपने काले कारनामों की वजह से लोक निर्माण विभाग के चर्चित अभियंताओं में शुमार है। अधिशासी अभियन्ता एसपी सक्सेना न केवल पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का गुल खिलाये थे बल्कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी भ्रष्टाचार का गुल खिलाने में परहेज नहीं कर रहे है। एसपी सक्सेना ने उपरोक्त निकाली गई निविदा के माध्यम से क्रियान्वित कार्यो के लिए आवंटित सरकारी धन का भी बंदरबांट करने में परहेज नहीं कर रहे हैं। भ्रष्टाचार की कला में महारत हासिल करने वाले अधिशासी अभियन्ता एसपी सक्सेना अपनी भ्रष्ट कार्यशैली से भ्रष्टाचार के कीचड़ में कमल को सड़ाने का कार्य कर रहे है। अधिशासी अभियंता एसपी सक्सेना ने खुर्रमनगर फ्लाईओवर पर जो पोल और हाईमास्क लगवा है और लगवा रहे है वह सभी के सभी मानक के विपरीत है। निविदा में जो मानक निर्धारित किया गया हैं। दरअसल वह वास्तविकता के धरातल से कोसों दूर है। यह अनैतिक कार्या जांच का विषय है। हालांकि कुल लोगों ने इनके अनैतिक कार्यो की शिकायत की है। मगर वर्तमान सरकार के कार्यकाल में शिकायतकर्ताओं की हालत ''भैस के आगे बीन बजाओ, भैंस लगे पघुराये'' की कहावत पर चरितार्थ हो रही है। जो काम मानक के अनुरूप होना चाहिए, वही कार्य एसपी सक्सेना के कार्यकाल में मानक के विपरीत हो रहे है। वह दिन दूर नहीं कि कुछ ही  दिनों के बाद पोल और हाईमास्क जमीन पर पड़ा जर्जर हालत में दिखाई देगा। इस फ्लाईओवर पर कराये जाने वाले इस विद्युत कार्य की टीएसी से जांच करा दी जाये तो स्वत: अधिशासी अभियंता एसपी सिंह के भ्रष्टाचार की पोल खुल जायेगी। 

लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष को भी एसपी सक्सेना ने किया गुमराह
 
 

मुख्य अभियंता 

एसपी सक्सेना

खुर्रमनगर फ्लाईओवर के निर्माण के अतिरिक्त भी एसपी सक्सेना ने भ्रष्टाचार का गुल खिलाया है। इनके द्वारा बभनान से गौर, टिनिच वाया वाल्टरगंज, भीटिया चौराहा जनपद बस्ती के लिए हुई निविदा में भी खेल खेला गया है। जब मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना से बभनान से गौर, टिनिच वाया वाल्टरगंज, भीटिया चौराहा जनपद बस्ती के लिए हुई निविदा को निरस्त करने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जो मैं कह रहा हूं। उसे ध्यान से सुनो। 24 मई को चार निविदा आये थे। जिसकी फ ाइनेंशियल बिड खोली गई थी। जबकि 26 मई को आचार संहिता समाप्त हो गई थी। आचार संहिता बिना समाप्त हुए कैसे फ ाइनेंशियल बिड नहीं खोली गई ? इसके बारे में एसपी सक्सेना लेसमात्र भी बोलना पंसद नहीं करते है। एसपी सक्सेना को झूठ बोलने की महारत हासिल है। उन्होंने कहाकि कई ठेकेदारों और मीडिया के लोगों ने शिकायत की इसलिए टेंडर निरस्त कर दिया गया था। जब एसपी सक्सेना के इस कृत्य के बारें में लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष वीके सिंह से पूछा गया तो उन्होंने भी वही बात कही जो एसपी सक्सेना ने कही। एसपी सक्सेना ने लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष को भी गुमराह करते हुए वही बात बतायी जो उन्होंने पत्रकारों से कही। अब गंभीर सवाल यह है कि क्या मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना ने गौर टिनिच वाया वाल्टरगंज, भीटिया चौराहा जिला बस्ती की उक्त निविदा को निरस्त करने का जो कारण जो बताया क्या वह कारण जायज है ? यदि जायज तो क्यों एसपी सक्सेना ने आचार संहिता के दौरान निविदा की फाइनेन्सियल बिड खोलने के अनैतिक कार्यप्रणाली पर खामोशी साध ली। पाठकों को बता दें कि मॉडल कोड आफ कंडक्ट ईसीएल के क्रमांक 52(9) जी क्रमांक के अनुसार यदि निविदा आचार संहिता के पूर्व मांगी गई हो तो उसका एब्यूलूशन किया जा सकता है। मगर उसका अन्तिम निर्णय बिना अनुमोदन के निर्गत नहीं किया जा सकता है। यदि निविदा मांगी नहीं गई है तो चुनाव आयुक्त के अनुमति बिना निविदा नहीं मांगी जा सकती है। इसका अर्थ यह है कि पूर्व में मांगी गई निविद की बिड को खोल कर एब्यूलूशन किया जा सकता है। किन्तु उस पर अन्तिम निर्णय अर्थात निविदा की स्वीकृति नहीं दी जा सकती है। ऐसी स्थिति में जब 24 मई को फ ाइनेंशियल बिड खोली गई थी तो इसको आचार संहिता के पश्चात 26 मई को स्वीकृति या निर्गत की जा सकती थी। मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना ने जो आचार संहिता का हवाला दिया है। यदि उस पर ही भरोसा कर लिया जाये तो फि र निविदा खोली ही क्यों गई ? इन सवालों का जवाब न तो विभाग के जिम्मेदार आलाधिकारी दे रहे है और नहीं एसपी सक्सेना स्वयं दे रहे है। एसपी सक्सेना की इस कार्यप्रणाली से जाहिर है कि दाल में ही कुछ काला नहीं है बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है।

निविदा मैनेजमेन्ट में एसपी सक्सेना को महारत हासिल

एसपी सक्सेना मुख्य अभियन्ता गोरखपुर एवं बस्ती का सबसे ज्यादा जोर भ्रष्टाचार पर रहा। मगर इसका असर सिर्फ  बभनान से गौर, टिनिच वाया वाल्टरगंज भीटिया चौराहा जिला बस्ती की निरस्त निविदा  तक सीमित नहीं रहा है। बल्कि ऐसे अनेक मामले देखे गये। जिसमें उनकी प्रत्येक निविदा में संतुलनकारी भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई दी। एसपी सक्सेना निविदा मैनेज करने में भाजपा शासन काल में भी अपनी खास पहचान बना लिए है। एसपी सक्सेना की खास बात यह कि भाजपा के कद्दावर नेताओं को बतौर अतिथि के रूप में पूजते हुए दिखाई देते है। 

दोनों हाथों से धन बटोरने में व्यस्त है एसपी सक्सेना

बभनान से गौर टिनिच वाया वाल्टरगंज भीटिया चौराहा जिला बस्ती में हुई निविदा को निरस्त करवाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले एसपी सक्सेना के पास मुख्य अभियंता गोरखपुर का भी अतिरिक्त चार्ज है। पाठकों को बता दें कि एसपी सक्सेना 30 सितम्बर 2019 सेवानिवृत हो रहे है। एसपी सक्सेना लोक निर्माण विभाग  में ऐसे दागदार अभियंता के रूप में मशहूर है। जो भ्रष्टाचार के मामले में भ्रष्टाचार के दैत्यासुर को पीछे छोड़ दे। एसपी सक्सेना ने अपने पूरे कार्यकाल में शायद ही कोई कार्य बिना रिश्वत के किया हो। इसी प्रकार की कार्यशैली इन्होंने बभनान से गौर, टिनिच वाया वाल्टरगंज भीटिया चौराहा जिला-बस्ती की हुई निविदा में खेलने का प्रयास किया। जबकि इनके पूर्व तैनात मुख्य अभियन्ता ने उक्त निविदा को ईमानदारी से खुलवाने के साथ ही अपनी बेदाग छवि के साथ सेवानिवृत हो गये। मगर एसपी सक्सेना ने उक्त निविदा के माध्यम से धन बटोरने की खातिर उक्त खोली गई निविदा को निरस्त कर दिया। पाठकों बतो दें कि एसपी सक्सेना की कार्यप्रणाली से संबंधित मात्र उपरोक्त ही मामले नहीं है बल्कि इससे पूर्व भी इन्होंने बसपा के शासन काल में भी जनपद उन्नाव में अधिशासी अभियन्ता रहने के दौरान निर्माण कार्यो में घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर अनैतिक तरीके से धन का गबन किया था और अकूत संपत्ति बनायी थी। निविदा निरस्त करने के मामले में प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग श्री गोकर्ण ने पत्रावली तलब कर ली। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया। उन्होंंने बताया कि मैन्युअल कोड ऑफ कडक्ट पेज नम्बर-182 पैरा-8 पर साफ.-साफ मोटे शब्दों में लिखा हुआ है कि जो निविदायें पहले से ही मांगी गई है। उनका मूल्यांकन किया जा सकता है। मगर आयोग की पूर्व स्वीकृति के बिना अंतिम रूप से स्वीकृत नहीं की जा सकती है। यदि निविदाएं पहले से नहीं मांगी गई तो वे आयोग की पूर्व स्वीकृति के बिना जारी नहीं की जाएंगी। मगर इन वाक्यों पर एसपी सक्सेना ने ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। उपरोक्त लाइनों को पीके सक्सेना को निविदा निरस्त करने से पूर्व पढ़ लेनी चाहिए थी। 

 

 

 

01
August

अंग्रेजी उपनिवेशवाद के युग में भारत सहित विश्व के लगभग 54 देशों में अंग्रेजी राज के प्रति नफ रत और आक्रोश फैला हुआ था। उपनिवेशवाद में यूरोपीय देशों ने पूँजी के द्वारा सर्वोच्च लाभ प्राप्त किया है। उपनिवेशवाद का पूरे यूरोप का मुख्य केन्द्र इंग्लैण्ड रहा है। उपनिवेशवाद का तात्पर्य है आर्थिक दृष्टि से विकसित देशों के द्वारा अविकसित देशों का शोषण। पिछड़े देशों की सारी आर्थिक व्यवस्था उनपर निर्भर रहती है। अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की अन्यायपूर्ण विचारधारा के कारण अंग्रेजी हुकूमत के गुलाम 54 देशों के मूल निवासी गरीबी, बीमारी, अशिक्षा तथा गुलामी से भरा अपमानजनक जीवन यापन कर रहे थे। विश्व के इन देशों की प्राकृतिक सम्पदाओं का दोहन करके तथा मानव संसाधन का शोषण करके अंग्रेज अपने देश इंग्लैण्ड को समृद्ध कर रहे थे। इस काल खण्ड में गुलाम भारत में अंग्रेजों के प्रति आक्रोश चरम सीमा पर था। स्वाधीनता आन्दोलन के लिये पूरे राष्ट्र में एक दबी हुई चिगांरी धधक रही थी। ऐसे विकट समय में अमर बलिदानी, भारत माँ के वीर, क्रान्तिकारी सपूत, अप्रतिम साहस के पर्याय चन्द्रशेखर आजाद भारत की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति तथा स्वाभिमान को पुन: स्थापित करना चाहते थे। आजाद ने मातृभूमि की आजादी के लिये खुद के प्राणों को न्योछावर कर दिया यही बलिदान आगे चल कर आजादी का सुप्रभात बना।

19
July

स्व0 अम्बिका प्रसाद राय की पुण्यतिथि पर गोमतीनगर के जनेश्वर मिश्र पार्क के सामने आयोजित हुआ शैक्षिक सामग्री वितरण कार्यक्रम

लखनऊ। समाज के गरीबों, असहायजनों के सामाजिक विकास के लिए प्रतिबद्ध सामाजिक संगठन मुकाम फाउण्डेशन द्वारा आज राजधानी के गोमतीनगर स्थित जनेश्वर मिश्रा पार्क के सामने स्व0 अम्बिका प्रसाद राय अपर पुलिस अधीक्षक उत्तर प्रदेश की पुण्यतिथि के अवसर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर जनों के बच्चों को शैक्षिक सामग्री का वितरण किया गया। जिससे समाज के ये गरीब बच्चे बेहतर शिक्षा ग्रहण कर स्वयं और समाज को सशक्त कर सके। इस अवसर पर मुकाम फाउण्डेशन के संरक्षकगण सरोज राय, आभा राय, एडवोकेट प्रदीप कुमार राय ने अपने हाथों से आर्थिक रूप से कमजोर गरीब परिवारों के बच्चों को टीफिन, थर्मस, पेन्सिल बाक्स, रबर, पेन्सिल, स्केल, पाठ्य पुस्तकें सहित अन्य पठन-पाठन सामग्रियों का वितरण किया।

इस अवसर पर संस्था की संरक्षक आभा राय ने कहाकि शिक्षा प्रत्येक राष्ट्र के लिए विकास और सशक्तिकरण का आधार है। शिक्षा आज की दुनिया की दैनिक गतिविधियों को समझने और इसमें भाग लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह एक सुदृढ़ चरित्र का निर्माण करती है। मगर अफसोस की हमारे देश में शिक्षा इतनी महंगी हो गई है कि उससे गरीब तबका एक दम विरक्त होता है। भले ही सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा को निःशुल्क देने की घोषणा की हो। मगर इसके बावजूद भी गरीबी के अभाव में अधिकांश गरीब परिवार अपने बच्चों को शिक्षा देने में असहाय महसूस करते है। धन के अभाव में गरीब बच्चों को न तो पर्याप्त मात्रा में शैक्षिक सामग्रियां मिल पाती है और ना ही पर्याप्त मात्रा में बेहतर शिक्षा ही मिल पाती है। समाज के ऐसे गरीब और असहाय बच्चों को निःशुल्क शैक्षिक सामग्री वितरित कर मुकाम फाउण्डेशन समाज को सशक्त करने का एक छोटा सा प्रयास कर रहा है। यह प्रयास यूं तो कई वर्षो से क्रियान्वित है। मगर संगनात्मक तौर पर यह कार्य विगत वर्ष से प्रारम्भ है। इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष विनीत कुमार ने कहाकि मुकाम फाउण्डेशन गरीबों, असहायों को सशक्त बनाकर विकास के श्रेष्ठतम मुकाम पर पहुंचाना चाहता है। गरीब बच्चों को निःशुल्क शैक्षिक सामग्री मुहैया कराकर संस्था सामाजिक तौर पर एक सहयोगात्मक प्रयास कर रही है। इसके अतिरिक्त संस्था लखनऊ, बहराइच, बाराबंकी और अमेठी में निर्धन और निःशक्त बालिकाओं और महिलाओं को सिलाई कढाई आदि की शिक्षा प्रदान कर उन्हें स्वालम्बी बनाने का प्रयास कर रही है।

इस अवसर पर संस्था की कोषाध्यक्ष विष्णुमाया ने कहाकि मुकाम फाउण्डेशन न केवल समाज के लोगों को शैक्षिक रूप से सुदृढ करने का प्रयास कर रहा है बल्कि लोगों को रोजगारपरक शिक्षा मुहैया कराकर लोगों को आर्थिक रूप से भी मजबूत कर रहा है। संस्था लोगों को नैतिक, चारित्रिक शिक्षा मुहैया कराने के लिए विभिन्न प्रकार के सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यो का संचालन करती है। जिससे समाज नैतिक और चारित्रिक रूप से भी सुदृढ हो। विष्णुमाया ने बताया कि आज के कार्यक्रम में 50 बच्चों को टिफिन, पेन्सिल बाक्स, थर्मस, पेन्सिल, रबर, नोटबुक सहित अन्य पठन-पाठन सामग्रियों का वितरण किया गया है। संस्था द्वारा शैक्षिक सामग्री वितरण कार्यक्रम में संस्था के संरक्षकगण प्रदीप कुमार राय, समीर राय, संजय राय, मधुलिका राय, आरजू राय, संस्था के प्रचार मंत्री सुनील कुमार, संस्था की कार्यकारिणी सदस्य सविता, नीलिमा सिंह, सुशील कुमार, संस्था के जनपद बहराइच के जिला उपाध्यक्ष मो. इसरार सहित मीडिया के प्रतिष्ठित पत्रकार बन्धु उपस्थित रहे। 

 

 

 

03
July

निर्माणाधीन चिकित्सालय के संसाधनों हेतु मिले 5 करोड़ 44 लाख

पूर्व में हुए 1 करोड़ 20 लाख के खरीद घोटाले की अभी चल रही है जांच

मैनफोर्स

गोण्डा। जनपद में बन रहे 300 शैय्या वाले निर्माणाधीन चिकित्सालय में  संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के लिए शासन ने 5.44 करोड़ रूपये का बजट जारी कर दिया है। सीएमओ कार्यालय की माने तो यह बजट विभाग को प्राप्त भी हो चुका है। जिसका उपयोग शीघ्र ही संसाधनों की खरीद मेंं किया जायेगा। मगर सवाल यह उठता है कि पूर्व में 1.2 करोड की हुई खरीद में जिस तरह से घोटाला उजागर हुआ और उसकी जाचं भी चल रही है। क्या यह 5.44 करोड की खरीद भी कहीं घोटालों की भेंट न चढ जाये? हालाकि स्वास्थ्य विभाग के मुखिया यह दावा करते नहीं थक रहे कि सभी खरीद शासन की गाइडलाइन के अनुसार ही की जायेगी। जनपद के ही नहीं वरन मण्डल के जिलों से आने वाले ंमरीजों की भारी संख्या को देखते हुए जिले में महिला चिकित्सालय एवं पुरूष जिला चिकित्सालय को विस्तार देते हुए शासन द्वारा 300 शैय्या वाले नये चिकित्सालय भवन निर्माण की संस्तुति पूर्व समाजवादी शासन काल में की गयी थी। प्रदेश सरकार के अनुसार इन भवनों को तीन वर्ष में बनाकर जिले के स्वास्थ्य विभाग को हैण्डओवर करना था। किन्तु स्थानीय शासकीय लेटलतीफी और राजनैतिक हस्तक्षेप के चलते जिम्मेदारों ने इसके निर्माण मे रूचि नही दिखाई और चार वर्ष का समय व्यर्थ गवांं दिया। वर्तमान समय में अभी भी भवन में अनेकों महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण होने बाकी हैं जिसके पूरे होने की संभावना आगामी 2 से लेकर तीन महीनों में है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने इस भवन के संचालन के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद के लिए 5.44 करोड़ रूपये का बजट जारी किया। इस बजट के द्वारा आपरेशन कक्ष आपतकालीन कक्ष, गहन चिकित्सा कक्ष एवं वार्डो के संसाधनों की खरीद की जानी है। जिसके लिए शासन ने बजट जारी करते हुए खरीद की मंजूरी भी दे दी है। इसके लिए गाइडलाइन भी जारी किया गया है। विभाग इस गाइडलाइन का अध्ययन कर रहा है। इसके बाद ही खरीदी की जायेगी। विभाग का कहना है कि कौन कौन से उपकरण कितनी संख्या में खरीदे जायेगें ? इसका शासनादेश प्राप्त हुआ है। उसी के अनुरूप खरीदारी की जायेगी। जिसमें मुख्यत: आक्सीजन प्लाण्ट का निर्माण एक्सरे मशीन, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउण्ड मशीनों की खरीद की जानी है।

इस बारें मे सीएमओ डा. संतोष श्रीवास्तव का कहना है कि मण्डलीय चिकित्सालय के लिए शासन से उपकरणों की खरीद के लिए बजट विभाग को मिल गया है। शीघ्र ही चिकित्सालय बन कर तैयार हो जायेगा। हैण्डओवर होते ही आवश्यक उपकरणों और संसाधनों की खरीदारी की जायेगी। जिससे मण्डल के लिए बेहतर चिकित्सीय सुविधा जिले में उपलब्ध होगी। उल्लेखनीय है कि इस बजट के जारी होने से पूर्व ही इस नये 300 शैय्या वाले चिकित्सालय के लिए नियमों को ताक पर रखकर 1.2 करोड़ रूपये से तत्कालीन सीएमएस डा. आशुतोष कुमार गुप्त के कार्यकाल में ही खरीददारी की जा चुकी है। इस खरीद में दिखाई पड़ रहे संसाधनों में मात्र कुछ बिस्तर, सैकडों की संख्या में स्टूल ट्रे एवं दर्जनों की संख्या मेंं अलमारियों की खरीदारी कर करोडों रूपये के सरकारी धन का बदंरबांट कर लिया गया। मामलें ने जब तूल पकड़ा तो इस खरीद की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी गयी। जिसका अभी तक कोई भी प्रभाव दिखाई नहीं पड़ रहा। पूर्व में हुयी इस खरीद घोटालें की जाचं अभी पूरी भी नही हुई थी कि नया 5.44 करोड का बजट और आ गया पूर्व में खरीदे गये उपकरण निर्माणाधीन भवन के बाहर खुले में ही रखें हुए है जिनकी सुरक्षा का भी अब तक कोई इंतजाम नहीं किया गया है। लापरवाही के साथ रखे ये करोडों के उपकरण धीरे धीरे कबाड में तब्दील हो रहे है। विभागीय सूत्रों की माने तो खुले मे रखे गये ये सामान वहां इसलिए रखे गये है कि बाद में इन्हें यह दिखा कर भारी गोलमाल किया जासके कि कई उपकरण चोरी हो गये। जिले के लोगों के साथ ही मण्डल के मरीजों को बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दे रहा जिले का स्वास्थ्य विभाग अपने अन्दर ही व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जिससे लोगों में यह आशंका घर कर रही है कि कही इस बजट का भी वही हाल न हो जैसे पूर्व का बजट घोटालों का भेंट चढ़ गया था। जिला स्वास्थ्य विभाग कब लोगों के लिए इस मण्डलीय चिकित्सालय का द्वार खोलेगा ? इसका जिले के जनता को वर्षो से एक लम्बा इंतजार है।

 

उलझी हुई हैं जिला चिकित्सालय की स्वास्थ्य व्यवस्था

जिला चिकित्सालय को मण्डल का मुख्यालय चिकित्सालय भी कहा जाता है। कहते है कि जब जिले के स्वास्थ्य सेवाओं को हाल देखना हो तो जिला चिकित्सालय में उपलब्ध सेवाओं को देखिए। यहां आम जनमानस को उपलब्ध करायी जा रही सेवाएं असल में जिले में उपलब्ध सेवाएं हैं। विगत की स्थिति को यदि छोड दिया जाये तो इस वर्ष जिला चिकित्सालय में बड़ी तेजी के साथ कई जन उपयोगी निर्माण कार्य कराये गये। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सालय प्रशासन द्वारा कई प्रयास भी किये गये। यह पिछले कई वर्षों की तुलना में एक बडी उपलब्धि है। इनमें मुख्यत: बच्चों को नया बनाया गया पीकू वार्ड, तीमारदारों के लिए निर्मित प्रतीक्षालय, नेत्र विभाग के मरीजों के लिए प्रतीक्षालय, लाश घर का जीर्णाेद्वार व चिकित्सालय में मुख्य औषधीय पार्क शामिल है। इसके बाद पूर्व में कराये जा रहे चिकित्सायल के रंग रोगन कार्य में भी बदलाव किया गया और नये रंगों को चयन कर चिकित्सालय को एक नया रूप भी दिया गया। यह वर्ष समाप्त होते होते एक बार फिर जिले की जनता को दो स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निराशा ही हाथ लगी जिनमें निर्माणाधीन एमआरआई सेन्टर यूनिट व डायलासिस यूनिट का कार्य पूरा न हो पाने की वजह से इस वर्ष भी लोगो को इस सुविधा से वचिंत रहना पडा। चिकित्सालय प्रशासन के अनुसार वर्ष 2019 में यह सेवाएं उपलब्ध करायी जा सकती हैं। चिकित्सालय प्रशासन के द्वारा तेजी से कराये जा रहे कार्यो को लेकर प्रदेश स्वास्थ्य प्रशासन ने जनपद के चिकित्सालय को प्रदेश के टाप फाइव चिकित्सालयों की सूची में जगह दी है यह भी जनपद के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। एक जनवरी को प्रदेश स्तरीय एक उच्चस्तरीय यूपीएचएसएसपी की टीम यहां पहुंची । जो कराये गये सभी अब निर्माण कार्यो का वीडियाग्राफी भी करायी। वर्ष 2018 समाप्त होते ही वर्ष 2019 में जिले को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए जिला चिकित्सालय प्रशासन एवं कर्मचारियों मे एक नया जोश दिखाई पड रहा है और वे इसके लिए प्रयासरत है।