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09
April

प्रदेश में  व्यापक पैमाने पर प्रतिमाह सात करोड़ की हो रही वसूली

मैनफोर्स

लखनऊ। यूपीए सरकार में जब भ्रष्टाचार चरम पर था। तब जनता विवश होकर वर्ष 2014 के आम चुनाव में ने उसे उखाड फेका था। ताकि एक साफ सुथरी सरकार देश की बागडोर संभाले और देश को विकास के मार्ग पर प्रशस्त पर करें। इसलिए जनता ने पूर्ण बहुमत के साथ नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के पद पर विराजमान किया। आम जनता में मोदी के प्रति इस कदर विश्वास था कि देश के भीतर तमाम खामियों को वे दूर कर देश को देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनायेंगे। मगर यह देश का दुर्भाग्य था कि मोदी को देश की बागडोर सौंपी गई। क्योंकि मोदी जनता की उम्मीद पर लेसमात्र भी खरें नहीं उतर सकें और वे देश में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा सके। जिसका परिणाम आए दिन में सम्पूर्ण देश के सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार और उससे कराह रही आम आवाम को देखा जा सकता है। इसी का एक छोटा सा उदाहरण समन्वित बाल विकास योजना उत्तर प्रदेश में देखा जा सकता है। जबकि समन्वित बाल विकास योजना भारत सरकार द्वारा संचालित की जाती है। इस विभाग का बजट भी भारत सरकार ही निर्गत करती है। इस विभाग का संचालन संयुक्त रूप से मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग भारत सरकार द्वारा किया जाता हैं। जब केन्द्र सरकार द्वार संचालित इन योजनाओं में भ्रष्टाचार चरम तक है तो अंदाजा प्रदेश स्तरीय विभागों और योजनाओं का स्वत: लगाया जा सकता है। वर्तमान में योगी सरकार में महिला एवं बाल विकास विभाग उत्तर प्रदेश सरकार की बात करें तो इस योजना को सरकार प्राथमिकता पर रखकर इस मंत्रालय की जिम्मेदारी को अनुपमा जायसवाल के हाथों में सौंपा है। मगर अफसोस कि इस योजना के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को आवंटित किये जाने वाले धन को विधायक, मंत्री, संतरी, अधिकारी, चपरासी सभी दोनों हाथों से मिलकर लूट रहे है। ये सभी मंत्री, संतरी, विधायक, अधिकारी, चपरासी अपने-अपने क्षेत्रों के तहत आने वाले आंगनबाड़ी केन्द्रों से डीपीओ, सीडीपीओ की साठगांठ से भ्रष्टाचार की काली कमाई में हिस्सेदारी सुनिश्चित करते है। यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि इस लूट में विभाग की मंत्री भी शामिल हैं। यदि विभाग की मंत्री वास्तव में ईमानदार हो जाये तो आंगनबाड़ी केंद्रों की यह लूट तत्काल बन्द जायेगी। मगर ऐसा होगा नहीं। क्योंकि सभी की नसों में खून नहीं भ्रष्टाचार का जहर दौड रहा है। इसलिए भाव शून्य होकर, जनप्रतिनिधि बनकर अपनी ही जनता के साथ विश्वासघात कर रहे है। पाठकों को बता दें कि शासन स्तर पर समन्वित बाल विकास योजना  के क्रियान्वयन की जिम्मेवारी प्रमुख सचिव की होती है। कार्यक्रम का कार्यान्वयन प्रदेश स्तर पर होता है। जिसके लिए एक निदेशालय स्थापित किया गया है। जहां निदेशक की देखरेख में सारी योजनाओं को संचालित किया जाता है। निदेशालय में निदेशक, अपर निदेशक, प्रशासन, अपर निदेशक वित्त उप निदेशक, सहायक निदेशक, अपर परियोजना प्रबंधक एवं लेखाधिकारी आदि विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों की देखरेख करते हैं। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, निदेशालय, लखनऊ की निगरानी में जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी, मुख्य सेविका आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं सहायिका ग्राम/परियोजना/जनपद स्तर का ढांचा ग्रामीण स्तर के आंगनबाड़ी कार्यकत्र्री एवं सहायिका सेक्टर एवं परियोजना स्तर की मुख्य सेविका एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी, जिलास्तरीय कार्यक्रम के कार्यान्वयन की देखरेख जिला कार्यक्रम अधिकारी करते हैं। इतने के बाद भी प्रत्येक जनपदों से अवैध तरीक से लगभग 10 लाख रूपये प्रत्येक माह वसूली की जाती है। यह धनराशि बढ़ भी सकती है। मगर इतनी वसूली में तो किसी भी प्रकार का इफ बट होने का सवाल ही नहीं है।

इस तरह पूरे प्रदेश में 75,000,000/-रुपये तक की वसूली होती है। आश्चर्यजनक बात यह है कि इस व्यापक पैमाने के भ्रष्टाचार की कई बार समाजसेवियों ने शिकायत की। मगर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ को इसकी भनक तक नहीं लगी। या फिर ये कहे कि इस भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई संजीदा नहीं था। यूं तो कहने के लिए देश के व्यक्ति देश की मूल्यवान सम्पत्ति होते हैं। देश का भविष्य उसके बच्चों में निहित होता है। आज के बच्चे कल के नागरिक हैं। इसलिए उस समय से जब शिशु मां के गर्भ में होता है। उसके सम्पूर्ण विकास के लिये उचित कदम उठाया जाना नितान्त ही आवश्यक होता है। इस प्रकार शिशु के विकास हेतु स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पोषण की उचित सुविधाएं आवश्यक होती हैं। समन्वित बाल विकास योजना उ.प्र. की योजनाओं में किशोरी शक्ति योजना, पोषण कार्यक्रम, इन्दिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना, प्रमुख है। जिसमें शिशु विकास में वृद्धि करने के लिए नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं विभिन्न विभागों में शिशु के साधारण स्वास्थ्य एवं पोषण आवश्यकताओं की देखभाल के लिए उचित स्वास्थ्य एवं पोषण शिक्षा द्वारा मां की योग्यता में वृद्धि करना होता है। कुपोषण एवं अति कुपोषित महिलाओं एवं शिशुओं के लिये सहायक पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित करना होता है। छ: वर्ष से कम आयु के शिशुओं एवं 16.45 वर्ष के आयु समूह की महिलाओं के पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर मे सुधार करना होता है। शिशु के उचित मानसिकए शारीरिक एवं सामाजिक विकास की नींव रखना होता है। टीकाकरण कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को टीटी के इन्जेक्शन एवं छ: वर्ष से कम आयु के शिशुओं को डीपीटी एवं बीसीजी के टीके सुनिश्चित करना होता है। मृत्युदर, अस्वस्थाता, कुपोषण एवं स्कूल से निकाले जाने की घटनाओ को कम करना है। मगर अफसोस की जनता के जनप्रतिनिधि ही जनता की के विकास के लिए आवंटित किये जाने वाले धन का बंदरबांट कर ले रहे है और जनता को उनकी बदहाल अवस्था पर तिल-ृतिलकर मरने के लिए छोड दे रहे है। यदि वास्वत में भाजपा सरकार जनता की सेवाओं के लिए गंभीर है तो उसे मानवीय पहलुओं पर विचार करना चाहिए और समन्वित बाल विकास योजना के धन का बंदरबांट करने वाले भ्रष्टाचारियों पर गंभीर रूख अपना चाहिए।

 

 

 

09
April

नियम विरूद्ध तरीके से वीआरएस लेने वाले चिकित्सक डा. एके कुलश्रेष्ठ को किया गया पुनर्योजित

शासनादेश को धत्ता बताकर शासनादेश का अनुपालन करने वाले कर रहे उल्लंघन

मैनफोर्स

लखनऊ। सूबे के जनपद प्रतापगढ़ में ऐसे भी चिकित्सकों को पुनर्योजित जा रहा है। जो पूर्व में स्वत: ही वीआरएस अर्थात स्वैच्छिक रूप से सेवानिवृत्ति ले चुके हैं। जबकि स्वास्थ्य महानिदेशालय उ.प्र.लखनऊ से इस संबंध में जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई तो जवाब में बताया कि गया कि वीआरएस लेने लेने वाले चिकित्सकों को कतई पुनर्योजित नहीं किया जा सकता है।

09
April

मैनफोर्स

लखनऊ। कला, संस्कृति के क्षेत्र में किसी भी राज्य में दिए जाने वाला संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त कलाकारों के लिये गौरव की बात होती है। ज़ाहिर है सरकार द्वारा कला के विविध  क्षेत्रों में दिए जाने वाला ये पुरस्कार सर्वोच्च है। नाट्य-संगीत-नृत्य से जुड़े कलाकार इस पुरस्कार को पाने में अपने को गौरव महसूस करते हैं। सम्मान कोई भी हो, यह जिस कलाकार को प्राप्त होता है। उसकी मेहनत, ईमानदारी और अपने क्षेत्र में किये गए कार्य का प्रतिफ ल होता है। कलाकारों को सम्मानित करने का मतलब ही यही है कि उसके कला क्षेत्रे किये गए कार्य का मूल्यांकन करना और कला के सरोकारों के प्रति उसकी जिजिविषा को सम्मानित करना। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी इस कार्य को पूरा करती है। संगीत नाटक अकादमी की स्थापना भी कला के तमाम जन सरोकारों को लेकर की गई थी।

08
April

जांच और कार्यवाही के नाम पर महज खानापूर्ति करता है खाद्य विभाग 

मैनफोर्स

गोण्डा। सरकार आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए तरह तरह के नियम कानून और उन नियमो को पालन कराने के लिए संविधान के तहत विभाग भी बने हुए है। किंतु आर्थिक पूर्ति के चलते सभी नियम कानून सिर्फ कागजो तक ही सीमित होकर रह गए है। वही दूधिया लोग मिलावटी दूध खुले आम सुबह दूध लेकर रोड पर दिखाई देते है। मगर खाद्य विभाग को खुले आम चुनौती देते है। इन दुधियो के ऊपर कोई कार्यवाही नही करते है। इससे इनके हौशला बुलन्द है, मिलावटी दूध बेच रहे है। लगभग सभी सड़कों पर दिखाई देते है। मानव मशीनरी को सुचारू रूप से चलाने के लिए शुद्ध वातावरण के साथ शुद्ध खाद्य सामग्रियों की अहम भूमिका रही है। बदलते दौर में शुद्ध वातावरण में बदलाव आए है तो वही खाद्य सामग्रियों की शुद्धता मिलावट खोरों के ज्यादा मुनाफे की भेंट चढ़ गई है।