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01
July

नौकरशाही की ढिलाई से विकास की योजनाएं वास्तविकता के धरातल से कोसों दूर

मैनफोर्स

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी की सरकार को उत्तर प्रदेश की सत्ता का बागडोर संभालते हुए दो साल हो गये। मगर आज तक सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार के नौकरशाहों पर नियंत्रण करने में असफ ल रहे। जिसका परिणाम यह रहा कि उनकी सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाएं वास्तविकता के धरातल पर उतरने से पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय में दम तोड़ दी। जिसका परिणाम यह रहा है कि यूपी की जनता के मन में सरकार की नाकारात्मक छवि प्रस्तुत होने लगी। योगी सरकार के दो साल के कार्यकाल में हर वक्त नौकरशाही और उसके संवर्गों के मध्य आपसी खींचतान चर्चा का केन्द्र बनी रही। नौकरशाही के मध्य सरकार की योजनाओं को साकार करने के लिए किसी बेहतर नीति पर भले ही चर्चा नहीं की गई। मगर अपने संवर्गो के मध्य विवाद उपजाने और उस पर चर्चा करने से नौकरशाहों को फुर्सत ही नहीं मिली कि वे आम आवाम तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाएं और सरकार की छवि जनता के मध्य स्थापित करें। नौकरशाहों के इस विवाद में कई बार तो स्वयंमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी हस्तक्षेप भी करना पडा। जनता की शिकायतों को सुनने और सहूलियतें देने के लिए बैठे इन नौकरशाहों के ठाठ एकदम निराले है। नौकरशाहों के इस निराले ठाठ बाट में एक नाम प्रमुख सचिव ऊर्जा अलोक कुमार और प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास का है। जिनसे मिलने के लिए खास लोगों को छोड़कर किसी भी जन सामान्य को पापड़ बेलने पड़ते है। विभाग के लोगों को को यहां तक कहते हुए सुना जाता है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मिलना आसान है लेकिन इन दोनों नौकरशाहों से नहीं एवरेस्ट पर चढऩे के समान है। इन नौकरशाहों ने गोवंश संरक्षण योजना जो स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना में भी नौकरशाहों ने ऐसा कारनामा कर दिखाया कि लोगों के दांतों तले अंगुलियां दब जाये। नौकरशाहों ने गायों के चारे के बजट पर भी कैंची चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ा है। गायों के चारों के लिए जो पहले 50 रूपये प्रतिदिन दिया जाता था उसे अब 30 रूपये प्रतिदिन कर दिया गया। नौकरशाहों का ये करतब नंगा निचोड़ेगा क्या और खायेगा का क्या ? की कहावत पर शत प्रतिशत सटीक बैठ रहा है। भूसे का कारोबार करने वालों का कहना है कि एक गाय पर एक दिन का खर्च औसतन 100 रूपये आता है। इसके अतिरिक्त अभी हाल ही में आईएएस वीक से पहले सूबे के जनपदों में गोवंश आश्रय केंद्र बनाये जाने के लिए दिए जाने वाले धन को सीधे जिलाधिकारी के खाते में न डालकर एक बदनाम एजेंसियों के खाते में ट्रांसफ र कर दिया गया। नौकरशाहों के कलाकारी से मुख्यमंत्री खासे नाराज भी दिखे। मगर अफ सोस कि जब सब चोर मौसेरे भाई है तो किसी चोर के डांटने और फ टकारने का मतलब का क्या औचित्य रह जाता है। मुख्यमंत्री ने इस मामले में प्रमुख सचिव सुधीर बोबडे को सार्वजनिक रूप से फ टकार लगाई थी। पिछले यदि खबरियां समाचार पत्रों की सुखिऱ्यों पर यदि गौर फ रमाये तो आये दिन किसी न किसी नौकरशाह को कोर्ट में तलब किये जाने का मामला देखने को मिलता था। कोर्ट द्वारा नौकरशाहों को फ टकार लगाये जाने, जुर्माना लगाए जाने और नसीहत देकर छोड़े जाने की खबरें सामान्य रूप से देखने को मिलती थी। इसी प्रकार का एक ताजा मामले जिसमें कोर्ट ने एक प्रकरण में पेशाब पर भी पाबंदी अर्थात आदेश मिलने के बाद पेशाब करने की सख्त सजा सुनाई थी। इस प्रकार की घटना को देखते हुए यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि नौकरशाहों पर मुख्यमंत्री की ढिली पकड़ का परिणाम है कि सरकार को कोर्ट में जलील होना पड़ता है। सरकार की किरकिरी कराने में ऊर्जा विभागए वित्त विभाग सचिवालय प्रशासनएऔद्योगिक विकास विभागए ग्राम विकास विभाग और बेसिक शिक्षा विभाग जैसे अहम महकमों के नौकरशाह सरकार की नाक काटने में पीछे नहीं रहे है। इन नौकरशाहों के कारनामों की वजह से सिर्फ आम आवाम को ही नहीं बल्कि सरकारी महकमों के लाखों अधिकारियों और कर्मचारियों को भी भुगतना पड़ता है। 

सरकार की नाक काटने और उसकी फ जीहत कराने वाले कुछ विभागों और उसके नौकरशाहों की कार्य प्रणाली का वर्णन मैनफ ोर्स समाचार पत्र पाठकों के समक्ष इस प्रकार कर रहा है।

प्रमुख सचिव ग्राम विकास अनुराग श्रीवास्तव

70 भूतपूर्व सैनिको का चयन ग्राम विकास अधिकारी पद पर हुआ था। जिसमें   विभाग द्वारा इनके भूतपूर्व सैनिक होने का प्रमाण मांगा गया था। चयनित भूतपूर्व सैनिकों का वेरि िकेशन प्रमाण पत्र रक्षा मंत्रालय द्वारा पिछले वर्ष 7 सितम्बर को भेज दिया था। मगर 9 माह गुजर जाने के बाद भी इन चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं दि गया। जिससे नाराज होकर कोर्ट ने प्रमुख सचिव ग्राम विकास अनुराग श्रीवास्तव को दिनांक 10 अप्रैल कोहाईकोर्ट में तलब किया था।

प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा प्रभात कुमार

 पिछली सरकार से लेकर योगी सरकार तक शिक्षामित्र सरकार के गले की 1हड्डी बनते रहें और शिक्षा विभाग नौकरियों के लिहाज से सबसे अहम और संवेदनशील रहा है। गौरतलब हो कि 69 हजार रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्तियां होनी है लेकिन विभाग के अफ सरों की लापरवाही और मनमानी यहां भी देखने को मिली। पहली भर्ती में कटऑफ रखा गया था। मगर दूसरी भर्ती का विज्ञापन निकाला गया तो कट ऑफ को गायब कर दिया। जिससे अभ्यर्थियों के असंतोष और सरकारी दबाव के चलते विभाग ने फि र से कट आफ तय कर दिया। जोकि पिछली बार से भी ज्यादा था और शिक्षामित्रों द्वारा मामले को हाई कोर्ट ले जाया गया। जिस पर कोर्ट ने बाद में तय की गई कट ऑफ को रद्द करते हुए प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा प्रभात कुमार को काफ ी फ टकार लगाई। शिक्षा विभाग के नौकरशाहों की यह कार्यशैली कोर्ट के निर्णय के बाद योगी सरकार द्वारा शिक्षामित्रों को संतुष्ट करने के लिए 10000 रूपये के दिए गए मानदेय पर भी पानी फेर दिया गया।

प्रमुख सचिव वित्त विभाग संजीव मित्तल 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वित्त विभाग और उसके नौकरशाह प्रमुख सचिव वित्त विभाग संजीव मित्तल ने उनकी किरकिरी कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चुनाव से पहले केंद्र सरकार द्वारा बढाये गए डीए को लागू करने में वित्त विभाग के नौकरशाहों ने अपनी मनमानी दिखाई और सरकार के एजेंडे और पार्टी की प्राथमिकताओं को दरकिनार करते हुए सरकार की छवि को निखारने के बजाय गिराने का प्रयास किया। जिस महंगाई भत्ते को बढ़ाने का फैसला केंद्र सरकार ने समय से किया था। उसी महंगाई भत्ते को वित्त के अफसरों ने आचार संहिता से पहले पास कर लिया। शेष कर्मचारियों और पेंशनरों को छोड़ दिया। बाद में सरकार की नाराजगी और मीडिया में चली खबरों के दबाव के बाद छुट्टी के दिन दफ्तर खोलकर चुनाव आयोग से अनुमति लेकर कर्मचारियों के भत्ते को पास किया। मगर उसके बावजूद भी पेंशनरों को छोड़ दिया। पुन: दबाव पडऩे पर उसको जारी किया गया। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी की खबरें भी आयीं। फि लहाल सूबे में इन अधिकारियों/कर्मचारियों तथा पेंशनरों की कुल संख्या लगभग 40 से ऊपर होगी 

प्रमुख सचिव ऊर्जा विभाग आलोक कुमार

ऊर्जा विभाग के मुखिया आलोक कुमार के कारनामे उपरोक्त नौकरशाहों से दो कदम आगे है। जिस उर्जा और पुलिस विभाग की कामयाबी का गुणगान सूबे की योगी सरकार करते हुए नहीं थकती है। उसी उर्जा विभाग के मुखिया प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने उज्जवल योजना में अनियमितताएं बिजली के मीटर खरीद में धांधली, मीटर रीडिंग से लेकर बिलिंग तक में गडबड़ी करने का नायाब खेल खेला है। जिसका शिकार खुद विभाग के पूर्व चेयरमैन अवनीश अवस्थी भी हो चुके हैं। जिस पुलिस व्यवस्था की बात सरकार करती है। उसकी हकीकत का अंदाजा एटा के जवाहरपुर परियोजना में हुई सरिया चोरी प्रकरण में पुलिस की जांच रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। जिसमें आरोपी के बयान लिए बिना पैसे के बल पर जवाब दाखिल कर दिया गया। आलोक कुमार, बीएस तिवारी और संजय तिवारी जैसे निदेशकों को भरपूर संरक्षण देने का काम कर रहे हैं और तमाम तरह के प्रमाणित आरोप होने के बावजूद उन पर कार्यवाही करने के बजाय उनको बचाने के प्रयास में लगे हैं। इन कारनामों का असली खिलाड़ी प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार है। चुनाव से कुछ दिन पूर्व जो संविदा कर्मी पावर कारपोरेशन के पैरोल पर नहीं थे। उनका भी अंतर तहसील तबादला करने का प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने कारनामा कर दिखाया। ऐसे डिस्कॉम के इन कर्मचारियों की संख्या लगभग 50 हजार से अधिक है। आलोक कुमार का फैसला एकदम नियम विरुद्ध है। इन संविदा कर्मियों के संबंध में जो विभागीय आदेश जारी किए जाते हैं उनमें इनको संविदा कर्मी बताया जाता है। जबकि वास्तविकता में ये निविदा कर्मी अर्थात ठेकेदारी अथवा कार्यदायी संस्था के कर्मचारी हैं।

अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन महेश गुप्ता 

सचिवालय प्रशासन के अपर मुख्य सचिव महेश गुप्ता को दिनभर कोर्ट में बैठाए जाने और बिना अनुमति के पेशाब नहीं करने की भी सजा सुनाई गई थी। क्योंकि इन्होंने कोर्ट की अवमानना किया था। कार्यवाई प्रस्तावित होने और किसी भी स्तर से राहत न मिलने के बावजूद अपर मुख्य सचिव महेश कुमार गुप्ता अपनी जिद पर अड़े रहे और सहायक समीक्षा अधिकारियों की वरिष्ठता का विवाद निपटाते-निपटाते खुद ही पक्षकार बन गए। महेश गुप्ता के इस कदम से समीक्षा अधिकारियों में काफ ी रोष व्याप्त था। इनकी इस कार्यप्रणाली से सरकार की किरकिरी भी हुई। कोर्ट ने महेश गुप्ता पर इसके लिए 25 हजार का जुर्माना भी लगाया था और इसको खुद अपनी जेब से भरने को कहा था।

प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास राजेश सिंह

योगी आदित्यनाथ के सत्ता संभालते ही इन्वेस्टर्स समिट कर सूबे केबेरोजगारों को रोजगार का सपना भले ही प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास राजेश सिंह ने दिखाया हो। मगर उनके अधिनस्थ अधिकारियों ने इस औद्योगिक विकास का पहला शिलान्यास समारोह 5 महीने में किया तो दूसरा साल भर में भी नहीं कर पाया। मगर जबरदस्ती के दावे और पर्दे के पीछे के खेल का शिकार मुख्यमंत्री का मंसूबा हुआ। गौरतलब हो कि पहले इन्वेस्टर समिट में सरकार से उद्यमियों के 4.68 लाख करोड़ के एमओयू साइन हुए थे। सरकार ने एक तय समय में निवेशकों के प्रस्तावित प्रोजेक्ट के शिलान्यास समारोह की योजना बनाई थी। जिसमें पहली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी 5 महीने में हो गयी। दूसरी का ऐलान सरकार द्वारा अगले 6 महीने में किए जाने की बात कही और जिसमें पहली ब्रेकिंग सेरिमनी से ज्यादा की धनराशि जमीन पर आएगी। इसकी तैयारी के लिए एक नए प्रमुख सचिव की भी तैनाती की गई। मगर मुख्यमंत्री का यह प्रोजेक्ट भी प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास राजेश सिंह की ढिलाई का शिकार हो गया और तैयारियों में कमी के चलते इसको रद्द करना पडा।

 

 

 

 

07
June

हत्यारोपियों से साठगांठकर पीड़ित पर बना रही सुलह का दबाव

सीसीटीवी में हत्यारोपियों की स्पष्ट तश्वीर फिर भी पारा पुलिस की पहुंच से दूर हत्यारोपी

मैनफोर्स

लखनऊ। लखनऊ पुलिस की कार्यप्रणाली भी अजीबोगरीब है। एक तरफ वह कहती है कि लखनऊ पुलिस आपकी सेवा में तत्पर है। वही दूसरी ओर उसकी कार्यप्रणाली अपनी कहावत के बिल्कुल विपरीत है। आम आवाम पुलिस जब पुलिस से मदद मांगती है तो वह उसकी सुनती नहीं है। पुलिस का यह दोहरा चरित्र आम आदमी की परेशानी का समाधान कम, परेशानी का सबब ज्यादा बनती है। पुलिस अपराधियों पर नकेल लगाने में कम, आवाम से धन उगाही करने में ज्यादा दिलचस्पी लेती है। मामला चाहे सड़क का हो या फिर थाने का हो। मामला चोरी का हो या हत्या और बलात्कार हो। पुलिस प्रत्येक मामले का समाधान कम और अवैध धन उगाही ज्यादा करती हुई दिखाई देती है। इसका एक छोटा सा नमूना लखनऊ जनपद के थानाक्षेत्र पारा में देखने को मिल रहा है। आपको को बता दें कि दिनांक 30 अप्रैल 2019 को रामकली पत्नी स्व. कालिका निवासी ग्राम भपटामऊ पोस्ट राजाजीपुरम थाना पारा लखनऊ ने थाना प्रभारी पारा को यह लिखित सूचना दी कि उसके पुत्र श्याम की 30 अप्रैल की ही रात को गांव के ही विनीत पुत्र लालता, राहुल पुत्र रामचन्दर, परमेश्वर पुत्र अज्ञात ने हत्या कर दी। रामकली ने अपनी तहरीर में उल्लेखित किया था कि उपरोक्त तीनों आरोपी दिनांक 30 अप्रैल को रात के 10:30 बजे घर से बुलाकर ले गये थे। इन तीनों आरोपियों ने ही उसके बेटे श्याम को पुरानी रंजिश के कारण मारकर उसे परमेश्वर की छत से फेंक दिया था। रामकली ने उल्लेखित किया था कि उसे मोहल्ले वालों ने रात करीब 1 बजे सूचना दिया कि उसके बेटे की हत्या कर दी गई है। इतना ही नहीं रामकली ने उक्त तहरीर में यह भी उल्लेखित किया था कि उपरोक्त तीनों आरोपियों ने उसके पुत्र श्याम को दिसम्बर 2018 में जान से मारने का प्रयास किया था। रामकली द्वारा उपरोक्त आरोपियों पर लगाये गये गंभीर आरोपों में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। मगर पुलिस द्वारा आरोपियों की यह गिरफ्तारी कार्यवाही करने के लिए नहीं थी बल्कि आरोपियों से धन उगाही कर मामले को रफा दफा करने के लिए थी। शायद यही वजह है कि पुलिस ने इन आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद भी धन उगाही करके छोड़ दिया।

जबकि रामकली के घर से कुछ ही दूरी पर स्थानीय निवासी जंगली उर्फ जय प्रकाश की किराने की दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में 12 बजकर 44 मिनट पर घायल अवस्था में श्याम घर की तरफ आते हुए दिखाई दिया। जबकि इससे पूर्व 10:30 बजे के बाद विपिन पुत्र राकेश, राहुल पुत्र रामचन्दर, पूनम पुत्री मुन्ना के साथ उक्त कैमेरे में श्याम कई बार आता—जाता दिखाई दिया था। मृतक श्याम की मां रामकली ने बताया कि उसके पुत्र श्याम ने पूनम पुत्री मुन्ना निवासी डेढ़ेमऊ थाना मलिहाबाद से कोर्ट मैरेज अर्थात न्यायालय के समक्ष विवाह किया था। रामकली ने बताया कि इसकी उसे जानकारी उसे होली दिन हुई थी।

रामकली ने कहाकि जब उसे इस विवाह की जानकारी हुई तो उसने पूनम के भाई सूरज, राज और उसके माता पिता से बात की। जिन्होंने शादी होने की बात को नकारा दिया। पूनम के घर वालों ने बताया कि पूनम विपिन से शादी करना चाहती है। रामकली ने बताया कि इसके बाद उसने पूनम से बात किया तो पूनम ने कहाकि श्याम मेरी जरूरतों को पूरा नहीं कर पायेगा। इसलिए वह उससे शादी नहीं करना चाहती हैं। उसने कहाकि वह विपिन से शादी करेगी। रामकली ने बताया कि इसी रंजिश में पूनम का भाई सूरज और आदित्य पुत्र इश्वरदीन ने कतिकी के गंगा स्नान के दिन रात में चलती हुई मोटरसाइकिल से मेरे पुत्र श्याम को धक्का मार दिया। इस घटना में मेरा पुत्र श्याम घायल भी हो गया था। श्याम की चोट लगने से नाक फट गया था। घटना स्थल से गुजर रहे अंकित निवासी मायापुरम ने श्याम को अस्पताल में ले जाकर इलाज करवाया। श्याम की नाक में सात टांके लगे थे। रामकली ने बताया कि आदित्य पुत्र ईश्वरदीन उसी के गांव है। पूनम आदित्य की रिश्ते में साली लगती है। अक्सर पूनम आदित्य के घर पर आती जाती थी। रामकली ने बताया कि घटना के दिन के 15 दिन पूर्व से ही पूनम आदित्य के घर पर ही रूकी हुई थी।

रामकली ने बताया कि घटना के रात श्याम के साथ पूनम, विपिन, राहुल कई बार आते जाते दिखे। जो जंगली के सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड है। विपिन के साथ अन्य लोग भी आते दिखे है। रामकली ने कहाकि जब उसका पुत्र श्याम मृत अवस्था में मिला तो उसके पूरे शरीर पर चोट के निशान थे। घुटना छिला हुआ था। दोनों पैरों का तलवा पूरी तरह से काला हो गया था। दाहिने पैर की अंगुली के नाखुन गायब थे। नाक और कान से खून बह रहा था। रामकली ने बताया कि श्याम की हत्या पूनम और विपिन ने ही उपरोक्त लोगों के माध्यम से करायी है। क्योंकि पूनम और विपिन दोनों की शादी करना चाहते थे। इसलिए ने पूनम और विपिन ने मेरे बेटे को रास्ते से हटाने के लिए उपरोक्त लोगों के साथ मिलकर हत्या करा दी। रामकली ने कहाकि वह पढ़ी लिखी नहीं है। इसलिए पुलिस ने तहरीर में जो बाते लिखने के लिए कही थी। पुलिस ने वह नहीं लिखा। रामकली ने कहाकि पुलिस से जब वह पोस्टमार्टम की रिपोर्ट मांगती है तो पुलिस रिपोर्ट तक नहीं देती है।

रामकली ने कहाकि उपरोक्त लोगों के साथ—साथ पुुलिस भी इस मामले में सुलह करने का जबरन दबाव बना रही है। पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। मगर उसके बावजूद भी पुलिस उसकी एक नहीं सुन रही है। रामकली ने कहाकि उसका पूरा परिवार हर डर—डर कर जी रहा है। मगर पुलिस कार्यवाही करने की बजाय आरोपियों के साथ साठगांठ कर उसे ही सुलह करने के लिए भयभीत कर रही है। 

 

 

 

14
May

भगवती जागरण में महापौर, विधायक, ब्लाक प्रमुख काकोरी की उपस्थिति ने लगाया चार चांद

मैनफोर्स

लखनऊ। राजधानी के पारा थाना छेत्र के बुद्धेश्वर विहार कालोनी में समाजसेवी महेश साहू ने भगवती जागरण का आयोजन किया। मां भगवती की ज्योती बुद्धेश्वर महादेव मंदिर से भक्त लेकर आए और महेश साहू ने अपनी धर्मपत्नी के साथ मां का पूजन आवाहन किया। जिसमें मां के भजनों का गुणगान रवि मंचन शर्मा एण्ड ग्रुप ने किया। गायक सुमित श्रीवास्तव बरेली के सुरों पर भक्त जमकर झूमे। भव्य झांकियो में ब्रज की होली, राधा तेरी चुनरी, भी भक्तों को खुबभाई। आयोजक महेश साहू ने संवाददाता से बात करते हुए कहा कि यह भगवती जागरण मां भगवती की कृपा से  7 वर्षो से लगातार हो रहा है।

12
May

भविष्य निर्माण में सानिया इंटर कालेज साबित हो रहा मिल का पत्थर

मो. इसरार 

बहराइच। किसी भी विद्यालय की गुणवत्ता मूल्यांकन एवं प्रत्यायन प्रणाली में विद्यालयों के कामकाज के सभी पहलुओं को सम्मिलित करने की आवश्यकता है। जिसमें शैक्षिक और सह-शैक्षिक डोमेन, भौतिक बुनियादी ढांचे, संकाय प्रबंधन, स्कूल नेतृत्व, सीखने के परिणामों और विद्यार्थियों की संतुष्टि और उनके माता-पिता/अभिभावक भी शामिल हो। शैक्षणिक दृष्टि से यह सभी बुनियादी आवश्यकताएं जनपद बहराइच के फखरपुर ब्लॉक के वजीरगंज में स्थिति सानिया इंटर कालेज शत—प्रतिशत पूरा करने में सार्थक सिद्ध हो रहा है। जिसका एक मुख्य कारण सानिया इंटर कालेज का बेहतर प्रबंधन और उसके सहयोगी शिक्षक है।