07
May

नऊ। उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन वाणिज्यकर लखनऊ जोन/जिला शाखा के द्विवार्षिक चुनाव की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूर्ण होने कारण आरम्भ की जा चुकी है। इस संबंध में जनपद इकाई को दिनांक 28 अप्रैल 2018 को एसोसिशन के अध्यक्ष गिरीश कुमार पाण्डेय द्वारा भंग कर दिया गया है और चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए संयोजक नामित कर एडीशनल कमिश्नर बी.डी. द्विवेदी से चुनाव अधिकारी नामित करने के लिए अनुरोध किया गया है। यह जानकारी एसोसिशन के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरीशी कुमार पाण्डेय ने दी। श्री पाण्डेय के अनुसार जोन के चुनाव के लिए जो प्रक्रिया पूर्व से लम्बित चल रहा था, जोनल मंत्री आर.के. पाल द्वारा प्रक्रिया में लाकर पत्र संख्या—मेमो दिनांक 5 मई 2018 द्वारा चुनाव कराये जाने के लिए एडीशनल कमिश्नर से अनुरोध किया गया था। उपरोक्त के अनुसार दोनों चुनाव एडीशनल कमिश्नर बी.डी. द्विवेदी द्वारा चुनाव अधिकारी नामित कराने के बाद संपन्न कराये जायेगे।

03
May

जांच दल से अधिवक्ता भिडे, विरोध के चलते पुलिस ने किया किनारा

लखनऊ। सड़क हादसों पर अंकुश लगाने तथा लोगों को हेलमेट–सीट बेल्ट के प्रति जागरुक करने के लिए परिवहन विभाग ने गुरुवार को सरकारी दफ्तरों में पहुंच कर जांच अभियान चलाया। खास बात यह है कि दो पालियों में चले अभियान में खुद अपर परिवहन आय़ुक्त (प्रवर्तन) बीके सिंह भी मौजूद रहें। अभियान के दौरान दो हजार कर्मचारियों का चालान किया गया। उधर जांच के लिए रोके जाने पर इंदिराभवन के गेट पर अधिवक्ताओं ने जमकर हंगामा किया। अधिवक्ताओं के हंगामा करने पर जांच दल में शामिल पुलिस व अधिकारी वहां से हट गए। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर गुरुवार को दूसरे दिन भी सरकारी विभागों में हेलमेट व सीट बेल्ट के प्रति कर्मचारियों–अधिकारियों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया गया। इसके लिए पुलिस व परिवहन अधिकारियों का संयुक्त टीमें बनाई गईं थीं।

 

इन टीमों ने जांच शुरू की। अपर आयुक्त ने बताया कि दो पालियों में जांच अभियान चलाया गया। टीमों ने राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस के साथ मिलकर वाहनों की जांच की और बिना सीट बेल्ट–हेलमेट के मिले लोगों का चालान किया। उधर संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) विदिशा सिंह ने बताया कि गुरुवार को करीब दो हजार वाहन चालकों का चालान किया गया। इसके साथ ही उन्हें ड्राइविंग करते वक्त हेलमेट –सीट बेल्ट लगाने तथा मोबाइल आदि का इस्तेमाल न करने के लिए जागरुक किया गया। लोगों को बताया कि यह उन्हीं की सुरक्षा से जुड़ा है और इसमें लापरवाही नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को हेलमेट व सीट बेल्ट के प्रति जागरुक करने के लिए सभी सरकारी विभागों को पत्र भेजा जाएगा। इस पत्र में विभागाध्यक्षों को दफ्तर आने वाले कर्मचारियों को हेलमेट –सीट बेल्ट के प्रयोग अनिवार्य रुप से कराने को कहा जाएगा। इसके साथ ही दफ्तर में ही इस तरह की व्यवस्था करने को कहा जाएगा कि ताकि लोग इसका पालन करें।

 

 

 

03
May

लखनऊ। सपा और बसपा का सियासी समीकरण बीजेपी पर भारी पड़ता दिख रहा है। गोरखपुर और फूलपुर में ही नहीं कैराना में भी उसके खाते में इसी समीकरण ने नाकामी जुड़ी थी। बीजेपी अब इसी समीकरण को दुरुस्त कर इसके जरिए कैराना उपचुनाव में जीत दर्ज करने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि पिछले चुनाव में इस समीकरण से कैराना सीट बीजेपी हारी थी और अब इसके दुरुस्त होने से उसकी जीत पक्की है. हाल ही में गोरखपुर और फूलपुर के संसदीय उपचुनाव में सूबाई सियासत में उभरे 'बुआ-भतीेजे' के सियासी समीकरण ने बीजेपी को एक बड़ा झटका दिया था. अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बीएसपी के इस समीकरण से पहले भी बीजेपी के खाते में ऐसे ही एक और सियासी गणित ने मात लिख चुका है। यह समीकरण है पश्चिम उत्तर प्रदेश के कैराना का. बीजेपी के दिग्गज नेता हुकुम सिंह के पारिवारिक सियासी घमासान की वजह से उनकी पार्टी को नुकसान हो चुका है। दरअसल, बीजेपी सांसद रह चुके दिवंगत हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में उतारा था. लेकिन, मृगांका को सियासी राह पर अपने पहले कदम पर ही परिवार के अंदर से ही चुनौती का सामना करना पड़ा। उनके भतीजे अनिल चौहान ने उनके खिलाफ मैदान में उतरकर अपनी बुआ की राह मुश्किल कर दी. नतीजा यह रहा कि बीजेपी को कैराना विधानसभा क्षेत्र में हार का मुंह देखना पड़ा. कैराना में एक बार फिर सियासी घमासान होना तय हो चुका है। हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई लोकसभा सीट पर बीजेपी उनकी बेटी मृगांका सिंह को मैदान में उतारने की तैयारी में है। मगर उसे बुआ-भतीजे के दो-दो समीकरण से पार पाने की चिंता भी सता रही है. एक ओर अखिलेश और मायावती के एक साथ आने से कड़ा चुनावी मुकाबला होने का डर सता रहा है. वहीं कैराना विधानसभा चुनाव में उसकी हार का कारण बने हुकुम सिंह के परिवार के बुआ-भतीजे के बीच का छत्तीस का आंकड़ा भी डरा रहा था. बीजेपी ने अब मृगांका सिंह और अनिल चौहान के बीच की दुश्मनी को पाट कुछ हद तक अपनी मुूश्किलें कम कर ली हैं. उपचुनाव को लेकर हुकुम सिंह के भरोसेमंद लोगों ने उनकी बेटी मृगांका के चुनाव की कमान संभाल ली है तो अनिल चौहान को भी सुलह के लिए तैयार कर लिया है. माना जा रहा है कि अनिल चौहान की जल्द ही बीजेपी में वापसी करा उन्हें पार्टी प्रचार में उतारा जाएगा. मृगांका और उनके भतीजे अनिल चौहान के बीच सियासी दुश्मनी खत्म होने के बाद बीजेपी इस सीट को अपने खाते में बरकरार रखने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नजर आ रही है. बता दें कि कैराना संसदीय सीट और बिजनौर की नूरपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव को लेकर 28 मई को मतदान होना है। इसके नतीजे 31 मई को आएंगे।

 

 

 

24
April

 

 

 

 

एस.के. पटेल

लखनऊ। सर्वविदित है कि एक मई 2018 को बड़े मंगलवार का कार्यक्रम शुरू होने वाला है। ऐसे पावन अवसर पर राजधानी के अलीगंज स्थित प्राचीन हनुमान मन्दिर के आसपास वाले एमडीएल कॉलोनी क्षेत्र में जिधर देखों उधर कूडे का अम्बार लगा हुआ दिखाई दे रहा है। बडे मंगल के अवसर पर श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहा है। मगर इसके बाद भी नगर निगम द्वारा इस क्षेत्र सफाई का ख्याल नहीं रखा गया है। प्राचीन हनुमान मंदिर के आसपास जगह—जगह कूड़ा करकट फैला हुआ है। इस गंदगी से न केवल आसपास के लोग क्षुब्ध है बल्कि इधर से गुजरने वाले लोग भी मुंह पर हाथ लगाकर सडी गली बदबू से बचने का प्रयास कर करते दिख जाते है। गंदगी की वजह से हर रोज पशुओं का जमावडा लगा रहता है। जो गुजरने वाले नागरिकों के लिए भी कभी—कभी घातक सिद्ध हो जाते है।

सडक पर पडे कूड़े कचरे को पशु निगल जाते हैं। जिससे उनकी जान भी चली जाती है। मगर जिम्मेदर समझने को तैयार नहीं है। गंदकी की वजह से भी अनेकों प्रकार की संक्रामक बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले लेती है। भीषण गर्मी में यह गंदगी लोगों के लिए काल के समान बन जाती है। इस क्षेत्र में व्याप्त गंदगी और सफाई व्यवस्था की दयनीय दशा को लेकर अक्सर समाचारपत्रों में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया है। मगर जिम्मेदार है कि सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे है। 

 

 

 

 

 

 

Page 9 of 16