30
July

विभागीय अधिकारी जेबें भरने के लिए चौकीदार को दे रहे संरक्षण

मैनफोर्स संवाददाता को मिलती है झूठे मुकदमें में फंसाने की धमकी

मैनफोर्स संवाददाता ने चार मामलों की वनाधिकारी से की शिकायत

दो मामलों में हुई कार्यवाही, शेष कमीशनबाजी की चढ़ी भेंट

मो. राजू खान

अमेठी। सूबे की योगी सरकार सूबे की हरियाली को बनाने के लिए एक तरफ जहां पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी के सरकार के कार्यकाल में कराये गये पौधरोपण  से कम्पटीशन करते हुए इस बार पूर्व के लक्ष्य का दोगुना पौधरोपण कराने का निर्देश वन विभाग को दे रही है। वही दूसरी ओर वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों की मिलीभगत से जनपद अमेठी के थाना शुक्ला बाजार स्थित ग्राम बदलगढ़, शेखवापुर, नादी, लालगंज में धड़ल्ले से हरे पेड़ों की हत्या की जा रही है। मगर उसके बावजूद भी वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के कांनों पर जूं नहीं रेंग रही है।

शुक्ल बाजार ब्लॉक का माली, चौकीदार असफाक हुसैन बदलगढ़, शेखवापुर, नादी, लालगंज में खुलेआम लकड़ी माफियाओं और ठेकेदारों के साथ मिलीभगत करके अपने अधिकारियों के आंखों में धूल झोंकते हुए हरें पेड़ों की हत्या करा रहा है। माली, चौकीदार असफाक हुसैन खुद ठेकेदार तासीन के साथ खड़े होकर हरें पेड़ों की हत्या करा रहा है। मैनफोर्स संवाददाता ने वन विभाग के जिला वनाधिकारी को चार स्थानों पर हो रहे हरें पेड़ों की कटान का मौके वारदात से विडियों क्लीप भेजी थी। जिसके उपरान्त वनाधिकारी के निर्देश पर दो स्थानों पर कार्यवाही की गई। जिसके तहत बदलगढ़ में ठेकेदार अमी और लालगंज में ठेकेदार बाबा हसीब पर जुर्माना लगाया गया था। शेष अन्य दो स्थानों पर हो रही पेड़ों की अंधाधुन्ध कटान पर अधिनस्थ अधिकारी ठेकेदार से साठगांठ करके मामलो को रफा दफा कर दिये। मगर मौके वारदात पर खड़े होकर हरें पेड़ों की हत्या कराने वाले वन विभाग के माली, चौकीदार असफाक हुसैन पर अब भी वन विभाग के अधिकारियों की मेहरबानी बनी हुई। वन विभाग के अधिकारी अपने उत्तरदायित्वों की सिर्फ कुछ मामलों में कार्यवाही करके के इतिश्री कर ले रहे है।

मगर अपने विभाग के चौकीदार की अनैतिक कार्यप्रणाली पर लगाम नहीं लगा पा रहे है। जब मैनफोर्स संवाददाता वनाधिकारी को मामले का साक्ष्य बतौर विडियो क्लीप के माध्यम से देता है तो वनाधिकारी अपने अधिनस्थ अधिकारियों को मौके वारदात पर हो रहे हरे पेड़ों की कटान को रूकावाने का निर्देश देते है। मगर वनाधिकारी के अधिनस्थ अधिकारी कुछ मामलों में जुर्माना लगाकर छोड़ देते है। जबकि कुछ मामलों में ठेकेदार से अवैध वसूली करके छोड़ देते है। वनाधिकारी के अधिनस्थ अधिकारी ठेकेदारों पर तो जुर्माना लगाते है। मगर ठेकेदारों के साथ साठगांठ करके हरें पेड़ों की खुलेआम हत्या कराने वाले माली, चौकीदार असफाक हुसैन पर कोई कार्यवाही नहीं करते है। इतना ही नहीं माली, चौकीदार असफाक हुसैन जब से वन विभाग में नौकरी पाया है। तब से लगातार एक ही स्थान पर बना हुआ है। जिसकी वजह से असफाक हुसैन की लकड़ी माफियाओं और ठेकेदारों से अच्छी खासी साठगांठ हो गई। बीच में वन विभाग के अधिकारियों ने असफाक हुसैन का स्थानांतरण किया था।

मगर जुगाड़बाज असफाक हुसैन एक माह के भीतर ही अपना स्थानांतरण रूकवा दिया। इसके बाद इसने खुलेआम हरें पेड़ों की हत्या का फर्रूखाबादी खेल चालू कर दिया। वन विभाग के माली, चौकीदार असफाक हुसैन ही वो सबसे बड़ा कारक है। जिसकी वजह से बाजार शुक्ल ब्लॉक में हरें पेड़ों की अंधाधुन्ध कटान हो रही है। माली, चौकीदार असफाक हुसैन की वजह से ब्लॉक बाजार शुक्ल हरियाली विहिन होता जा रहा है। मगर वन विभाग के अधिकारियों द्वारा जानबूझ माली, चौकीदार असफाक हुसैन को संरक्षण दिया जा रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वन विभाग के अधिकारी माली, चौकीदार असफाक हुसैन से कमीशनबाजी करते है और अपनी जेबें भरने के लिए हरें पेड़ों की हत्या कराने की खुली छूट माली, चौकीदार असफाक हुसैन को दे रखे है। शायद यही वजह है कि मैनफोर्स संवाददाता जब विभाग के अधिकारियों को सूचना देता है तो माली, चौकीदार असफाक हुसैन और कुछ ठेकेदारों द्वारा मैनफोर्स के संवाददाता को जान से मरवाने और फर्जी मुकदमें में फंसवाने की धमकी दी जाती है। जब मैनफोर्स संवाददाता बार-बार अधिकारियों को मौके वारदात से साक्ष्यों को प्रेषित करता है तो अधिकारी विवश होकर कोरम अदायगी करते हुए चार-पांच मामलों में से किसी एक मामले में कार्यवाही करके अपने उत्तरदायित्वों की इतिश्री कर लेते है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अधिकारियों की इस शिथिलता का कारण भी माली, चौकीदार असफाक हुसैन है। जो अपने भ्रष्टाचार और अनैतिक कार्यप्रणाली से अधिकारियों की जेब भरता है। इसी लिए इसके द्वारा किये जाने वाले अनैतिक कृत्यों को भी अधिकारी नजरअंदाज कर दे रहे है।

 

 

 

 

06
July

धन की लालच में कबूतरबाज हेमन्त कुमार मिश्रा पत्रकार से बना ब्लैकमेलर

आईएएस अधिकारी को ब्लैकमेल करने के एवज में हेमन्त कुमार मिश्रा गिफ्ट के तौर पाया निशान की टेरेनो कार

मैनफोर्स

लखनऊ। मैनफोर्स समाचार पत्र अपने पूर्व के अंकों में लखनऊ  जनपद के गुडम्बा क्षेत्र से अवैध रूप से संचालित क्राईम रिव्यू हिन्दी मासिक/साप्ताहिक समाचार पत्र के ब्लैकमेलर संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा की कार्यप्रणाली का वर्णन किया था। साथ ही इनके द्वारा ब्लैकमेल किये गये पीडित व्यक्तियों के बयान प्रकाशित किये गये थे। समाचार पत्र ने अपने पूर्व के अंको में इनकी भ्रष्ट कार्यशैली से संबंध रखने वाले इनके कुछ अन्य सहयोगियों के नाम और काम का संक्षिप्त प्रकाशन किया था। आज उसी कडी में समाचार पत्र आपके समक्ष इनके कुछ नये सहयोगियों के नाम और ब्लैकमेलिंग के काम का प्रकाशन कर रहा है। जो क्रमश: इस प्रकार है-समाचार पत्र अपने पाठकों को बता दें कि क्राईम रिव्यू के ब्लैकमेलर संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा लोगों को अकेले ही ब्लैकमेल नहीं करते है। इनके इस ब्लैकमेलिंग के खेल में ठेकेदारी का काम करने वाले उपेन्द्र यादव, गुडम्बा के बहादुरपुर के रहने वाले श्रवण कुमार, गुडम्बा के आदिलनगर गायत्रीपुरम के आसपास के लोगों को जमीने बेचने वाली द ग्रेटर अवध सहकारी समिति के मुंशी वसीवुद्दीन निवासी भाखा मऊ और खदरा निवासी गुड्डू उर्फ मंसूर खान आदि बतौर सहयोगी है। इसके अतिरिक्त भी कुछ अन्य लोग है। जो हेमन्त कुमार मिश्रा के ब्लैकमेलिंग के गिरोह में शामिल है।

हेमन्त कुमार मिश्रा और इनके ब्लैकमेलर सहयोगियों के ब्लैकमेलिंग का शिकार सिर्फ गुडम्बा के बहादुरपुर निवासी अतहर सईद, अनवार हसन उस्मानी, उमा सिंह, सपना सिंह, आरपी सिंह ही नहीं है बल्कि इन लोगों के अलावा भी अनगिनत लोग हेमन्त कुमार मिश्रा के ब्लैकमेलिंग के गिरोह के शिकार हुए है। जिसमें कुछ सरकारी अधिकारियों के नाम शामिल है। जिसका पूर्र्व में मैनफोर्स समाचार पत्र सहित कुछ अन्य समाचार पत्रों ने भी खुलासा किया था। उपरोक्त के अलावा हेमन्त कुमार मिश्रा और उनके सहयोगियों ने किन किन लोगों के साथ ठगी और ब्लैकमेलिंग की। इसका वर्णन क्रमश: इस प्रकार है।

आईएएस अधिकारी को हेमन्त कुमार मिश्रा और उनके सहयोगी उपेन्द्र यादव ने ब्लैकमेल करने का किया प्रयास

 

यह व्यक्ति उपेन्द्र सिंह यादव है। इसी ने मंडी के पूर्व अपर निदेशक डा. राम विलास यादव को ब्लैकमेल करने के एवज में क्राईम रिव्यू के ब्लैकमेलर संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा को यह कार गिफ्ट के तौर पर दी है। जो हेमन्त कुमार मिश्रा के घर पर खडी देखी जा सकती है।

 

पाठकों को याद होगा कि मैनफोर्स समाचार पत्र ने अपने पूर्व के अंकों में क्रमश: यह वर्णित किया था कि किस प्रकार हेमन्त कुमार मिश्रा ने मंडी परिषद के पूर्व निदेशकों को ब्लैकमेल करने का प्रयास किया था। उसी क्रम में मैनफोर्स समाचार पत्र ने यह भी वर्णित किया था कि हेमन्त कुमार मिश्रा ने मंडी परिषद के पूर्व निदेशक डा. अनूप यादव, राजशेखर और पूर्व अपर निदेशक डा. राम विलास यादव को कैसे ब्लैकमेल करने का प्रयास किया था। समाचार पत्र ने कैसे और किस लिए इन अधिकारियों को ब्लैकमेल किया गया था। इसका वर्णन किया था। मगर किसके इशारे पर हेमन्त कुमार मिश्रा ने इन अधिकारियों को ब्लैकमेल करने का प्रयास किया था। इसका वर्णन पूर्ण रूप से नहीं किया गया था। मैनफोर्स समाचार पत्र पाठकों को स्पष्ट कर दे कि उपरोक्त आईएएस अधिकारियों के ब्लैकमेलिंग के खेल में मुख्य रूप से चार लोग थे। पहले ब्लैकमेलर हेमन्त कुमार मिश्रा थे। जबकि तीन अन्य लोगों में एक मंडी का ही संयुक्त निदेशक निदेशक था और एक उपनिदेशक स्तर का अधिकारी था। संयुक्त निदेशक को भ्रष्टाचार के कुकर्मो के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। जो आज भी निलंबित है। तीसरा मंडी का एक उपनिदेशक है। जो श्रीवास्तव बिरादरी से ताल्लुक रखता है। जिसे पूर्व में एक दो बार भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया है। जो आज भी मंडी परिषद में अपनी जडे जमाये हुआ है। इन अधिकारियों के नामों का खुलासा आगामी अंकों में करेगा। उपरोक्त दोनों अधिकारियों का भी एक गिरोह है। इन लोगों द्वारा ठेकेदारों को लाभ देने के उद्देश्य से और अनैतिक तरीके से धन कमाने की उद्देश्य से मंडी में जितने भी निदेशक या अपर निदेशक तैनात होते है। उन्हें एक षडयंत्र के तहत कागजी कार्यवाही में फंसाकर हेमन्त कुमार मिश्रा के माध्यम से ब्लैकमेल कराया जाता है, और अंतत: ठेकेदारों को काम दिलाकर मोटी धन उगाही करायी जाती है। चौथा ब्लैकमेलर उपेन्द्र यादव है। जो ठेकेदारी का काम करता है। मैनफोर्स समाचार पत्र ने अपने पूर्व के अंक में किस प्रकार हेमन्त कुमार मिश्रा एक ठेकेदार के माध्यम से मंडी के पूर्व अपर निदेशक राम विलास यादव को ब्लैकमेल करने का प्रयास किया था। दरअसल उस ठेकेदार का नाम उपेन्द्र यादव है। उपेन्द्र यादव ने मंडी के उपरोक्त निलंबित संयुक्त निदेशक और श्रीवास्तव बिरादरी से संबंध रखने वाले उपनिदेशक के इशारे पर अनैतिक और तथ्य विहिन आधार पर मंडी के पूर्व अपर निदेशक राम विलास यादव के विरूद्ध क्राईम रिव्यू के ब्लैकमेलर संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा के माध्यम से विभाग में और मुख्यमंत्री के यहां शिकायत करानी शुरू कर दी। जब मामला कही नहीं बना तो सतर्कता विभाग और प्रवर्तन निदेशालय को भी हेमन्त कुमार मिश्रा और उपेन्द्र यादव ने गुमराह करना शुरू कर दिया और मंडी के पूर्व अपर निदेशक डा. राम विलास यादव के वाट्स एप पर विभिन्न प्रकार के अनैतिक मान मर्दन करने वाले और सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल करने वाले शब्दों को इनके फोटो पर अंकित कर भेजना शुरू कर दिया। जिससे वे मानसिक रूप से त्रस्त हो गये। मगर उसके बावजूद भी उन्होंने इन ब्लैकमेलरों के खिलाफ हार नहीं मानी और ब्लैकमेल नहीं हुए। हां यह जरूर था कि वे मानसिक रूप से परेशान जरूर हुए। जब हेमन्त कुमार मिश्रा और उपेन्द्र यादव अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हुए तो इन लोगों ने मंडी के अधिकारियों सहित सभी समाचार पत्रों के संपादकों और पत्रकारों के वाट्स एप पर अनैतिक तथ्य विहिन झूठी शिकायतों को वायरल कर डा राम विलास यादव का मान मर्दन करना शुरू कर दिया। इन लोगों ने डा राम विलास यादव के जितने भी रिश्तेदार है, उनकी संपत्तियों का ब्यौरा लिखकर और गांव के अन्य कई लोगों की संपत्तियों का ब्यौरा लिखकर ईडी शिकायत करनी शुरू कर दी कि सभी लोगों को डा राम विलास यादव ने अनैतिक तरीके से कमाकर संपत्ति अर्जित करायी है। इस प्रकार की झूठी और मनगढंत जानकारी लिखकर प्रवर्तन निदेशालय और सतर्कता विभाग, मुख्यमंत्री सहित अन्य विभागों को हेमन्त कुमार मिश्रा और उपेन्द्र यादव ने गुमराह करने का प्रयास किया है। यही शिकायत पत्र मंडी के पूर्व निदेशक डा राम विलास यादव को ब्लैकमेल करने उद्देश्य से हेमन्त कुमार मिश्रा द्वारा उनके वाट्स एप पर भेजकर मानसिक रूप से परेशान किया जाने लगा। डा राम विलास यादव को अनैतिक तरीके से परेशान करने के लिए ठेकेदार उपेन्द्र यादव ने क्राईम रिव्यू के ब्लैकमेलर संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा को गिफ्ट के तौर पर एक निशान मोटर कंपनी की एक ग्रे कलर की कार जिसका नाम निशान टेरेनो एक्सई डीसीआई ८५ पीएस है। जिसका रजिस्ट्रेशन नम्बर यूपी 3२ एसवाई २७७0 है। इतना ही नहीं अभी हाल ही में उपेन्द्र  सिंह यादव हेमन्त कुमार मिश्रा को जानकीपुरम में भी दो प्लाट खरीदवाया है। अब पाठक भी समझ गये होगे कि आखिर क्यों हेमन्त कुमार मिश्रा डा राम विलास यादव की सामजिक प्रतिष्ठा धूमिल कर रहा है। ऐसे  समाज विरोधी ब्लैकमेलर पत्रकारों और ब्लैकमेलर ठेकेदारों के साथ क्या होना चाहिए। इसका आम को फैसला करना चाहिए। मैनफोर्स ने अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी पूर्वक निभायी है। अब आम आवाम और सरकार के नुमाईन्दों को चाहिए कि अपनी जिम्मेदारी निभाये और ऐसे भ्रष्ट तथाकथित समाज विरोधी पत्रकारों पर कार्यवाही करें।

हेमन्त कुमार मिश्रा के सहयोगी वसीवुद्दीन और गुड्डू ने फूलबाग के रमेश की जमीन धोखे से करायी रजिस्ट्री

गुडम्बा के बहादुरपुर फूलबाग निवासी रमेश पुत्र कुन्दन जो हरिजन बिरादरी के है। ये तीन भाई है। जिनके नाम क्रमश: लाला राम, छोटेलाल, रमेश है। रमेश कुन्दन का सबसे छोटा लड़का है। इनकी फूलबाग में  खसरा संख्या 143 में लगभग डेढ बीगहा पुस्तैनी जमीन है। जिसमें तीनों भाईयों की लगभग 10-10 बिस्वे की हिस्सेदारी है। रमेश चूंकि पढ़े लिखे नहीं थे और ना ही उन्हें पता था कि कोर्ट कचहरी क्या है। रमेश के अनपढ़ का फायदा उठाते हुए द अवध ग्रेटर सहकारी आवास समिति के मुंशी वसीवुद्दीन ने रमेश को बहला फुसलाकर एक मामले में जमानतदार बनाकर रमेश से धोखे से मुख्तारनामें पर हस्ताक्षर करवा लिया और बाद में रमेश की जमीन पर दावेदारी करने लगा कि वह जमीन उसकी है। इस संबंध में रमेश ने बताया कि उसने जीवन में कभी भी कोर्ट कचहरी नहीं देखा था कि उसे पता चल सके कि कहां क्या और कैसे होता है। रमेश ने बताया कि हेमन्त कुमार मिश्रा के सहयोगी वसीवुद्दीन ने जमानतदार बनने के लिए उससे निवेदन किया। रमेश जमानत लेने के तैयार हो गया। वसीवुद्दीन ने अपने सहयोगी गुड्डू उर्फ मंसूर खान के साथ मिलकर जमीन के बैनामे का दस्तावेज तैयार कर लिया था। वसीवुद्दीन ने रमेश से जमानत के दस्तावेज पर अंगूठा लगाने की बात कहकर रमेश की जमीन के मुख्तारनामें पर अंगूठा लगवा लिया और धोखे से उसकी जमीन अपने नाम करा ली। रमेश को यह बात तब पता चली, जब वसीवुद्दीन ने कुछ दिन बाद रमेश की जमीन को किसी और को बेच दी। जब रमेश को पता चला तो उसने विरोध करना शुरू कर दिया। इसी दौरान रमेश के बेटी की शादी भी दी। वसीवुद्दीन ने रमेश से कहाकि पहले अपने बेटी की शादी कर लो, उसके बाद बैठकर बात कर लेंगे। वसीवुद्दीन ने रमेश को बेटी की शादी करने के लिए 10 हजार रूपये भी दिया था। रमेश ने शादी कर लिया और कचहरी के चक्कर लगाना शुरू कर दिया। वसीवुद्दीन ने रमेश को खदरा में गुड्डु उर्फ मंसर खान के घर पर बुलाया और रमेश से कहाकि अब तो जो होना था, वो गया। ऐसा करो कि तुम मुझसे 40 हजार रूपये लेकर मामले को रफा-दफा कर दो। इस पर रमेश गुस्से में कहाकि एक तो मेरी जमीन धोखे से हथिया लिये हो और अब मुझे देकर चुप रहने के लिए कह रहे हो। वसीवुद्दीन ने कहाकि चुपचाप पैसे लेकर अपना मुंह बंद कर लो। वर्ना मुंह खोलने के लायक नहीं बचोगे। रमेश ने बताया कि वसीवुद्दीन और गुड्डू उर्फ मंसूर खान ने अपने साथियों के साथ मिलकर रमेश की जमकर पिटायी की और उसे 30 हजार रूपये और देकर मारपीट कर भगा दिया। जब रमेश शिकायत लेकर थाने गया तो पुलिस भी वसीवुद्दीन के इशारे पर उसे मारपीट कर भगा दी। रमेश ने बताया कि समिति के मुंशी वसीवुद्दीन, गुड्डू उर्फ मंसूर खान और श्रवण कुमार सिंह ये सभी लोग क्राईम रिव्यू के ब्लैकमेलर संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा के ब्लैकमेलिंग के गिरोह के सदस्य है। हेमन्त कुमार मिश्रा ने समिति के मुंशी वसीवुद्दीन को अपने फर्जी समाचार पत्र क्राईम रिव्यू का पत्रकार भी बनाया था। जो पत्रकारिता के नाम आये दिन लोगों के साथ ठगी कर रहा था। हेमन्त कुमार मिश्रा ने श्रवण कुमार सिंह को भी पत्रकार बनाया था। ये लोग संगठित होकर लोगों को नौकरी दिलाने के नाम, लोगों को बैंक से लोन दिलाने के नाम पर, लोगों को जमीन दिलाने के नाम पर, लोगों की जमीनों पर अनैैतक तरीके से राज्य सरकार का अधिग्रहण अंकित कराने के नाम ठगी और ब्लैकमेलिंग की जा रही है। जब कोई इनके अनैतिक कृत्यों का विरोध करता है तो उसके खिलाफ इन लोगों द्वारा या तो झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है या फिर उसको मारपीट कर बराबर कर दिया जाता है। रमेश ने कहाकि मैं जाति का रैदास अर्थात हरिजन हूं। लोगों ने बताया कि किसी अन्य जाति का व्यक्ति हरिजन जाति के व्यक्ति की जमीन का बैनामा नहीं करा सकता है। मगर इन लोगों ने संयुक्त रूप से संगठित होकर मेरी जमीन को न केवल धोखे से हथिया लिया बल्कि मुझे मारपीटा भी है। आज मेरी स्थिति यह हो गई है कि मैं दाने-दाने के लिए मोहताज हो गया हूं। रमेश ने बताया कि इन लोगों द्वारा आये दिन क्षेत्र के न केवल व्यापारियों, दुकानदारों और आम आवाम को परेशान किया जाता है बल्कि इन लोगों के द्वारा सरकारी विभागों के अधिकारियों को भी ब्लैकमेल किया जा रहा है और उनसे अनैतिक कार्य दवाब बनाकर कराया जा रहा है। रमेश ने बताया कि गुडम्बा थाने के पूर्व थाना प्रभारी को भी हेमन्त कुमार मिश्रा और उनके सहयोगियों द्वारा आये दिन ब्लैकमेल करने के प्रयास किया जाता था। अक्सर लोगों के मोबाईल पर पूर्व के कई थाना प्रभारियों के फोटो पर अनैतिक और मिथ्या शब्दों को अंकित कर दुष्प्रचारित किया जाता रहा है। पूर्व के कई तहसीलदारों को इन लोगों द्वारा ब्लैकमेल करने का प्रयास किया गया है। रमेश ने बताया कि इन लोगों द्वारा खुलेआम दुकानदारों से गुंडा टैक्स की वसूली की जा रही है। मगर उसके बावजूद भी प्रशासन कान में तेल डालकर बैठा हुआ है। 

 

 

 

 

 

06
July

बलरामपुर के शिक्षक नृपेन्द्र शुक्ला और सीताराम खुलेआम बेच रहे हैं मालिक चन्द और शिमला गुटका

मैनफोर्स 

लखनऊ। न्यूज मूवमेन्ट समाचार पत्र ने अपने पूर्व के अंक में मालिक चन्द और शिमला गुटका कंपनी द्वारा उत्तर प्रदेश में अनैतिक तरीके से की जा रही सेल्स टैक्स चोरी सहित अन्य विभिन्न प्रकार के टैक्सों की चोरी का पर्दाफाश किया था। समाचार पत्र अपने इस अंक में मालिक चन्द और शिमला गुटका की बिक्री और उसके वितरकों से संबंधित एक नया खुलासा कर रहा है। जिसे पढ़कर पाठकों के पैरों के नीचे की जमीन खिसक जायेगी। क्यों मालिक चन्द और शिमला गुटका कंपनी अपने उत्पादों की बिक्री ऐसे व्यक्तियों से करा रही है। जो सरकारी विभागों में सरकारी पदों पर सरकारी सेवक के रूप में कार्यरत है। मालिक चन्द और शिमला गुटका की बिक्री के लिए जो सरकारी सेवक बतौर वितरक की भूमिका निभा रहा है। दरअसल उसका नाम नृपेन्द्र शुक्ला है। समाचार पत्र अपने पाठकों को बता दें कि नृपेन्द्र शुक्ला बलरामपुर जनपद के रहने वाले है। नृपेन्द्र शुक्ला बलरामपुर जनपद के एक सम्मानित इंटर कालेज में एक शिक्षक के रूप में कार्यरत है। मगर बतौर शिक्षक के रूप में मिलने वाले वेतनमान से नृपेन्द्र शुक्ला का पेट नहीं भर रहा है और ना ही उनके परिवार का गुजारा बसर होता है। शायद इसलिए नृपेन्द्र शुक्ला मालिक चन्द्र और शिमला गुटका के वितरक की भूमिका भी अदा करने लगे है। नृपेन्द्र शुक्ला जिस कालेज में शिक्षक के रूप में तैनात है। वहां वे उपस्थिति पंजिका में हाजिरी लगाने के बाद पुन: मालिक चन्द्र और शिमला गुटका की बिक्री के लिए वितरक की भूमिका निभाने लगते है। नृपेन्द्र शुक्ला के पास बलरामपुर जनपद में मालिक चन्द्र और शिमला गुटका के वितरक की जिम्मेदारी है। नृपेन्द्र शुक्ला द्वारा मालिक चन्द्र और शिमला गुटका की प्रतिमाह लगभग तीन-चार लाख रूपये की बिक्री की जाती है। ऐसा नहीं है कि नृपेन्द्र शुक्ला की इस कार्यशैली के बारें में किसी को पता नहीं है। सभी जानते है। मगर कोई कुछ बोलता नहीं है। आपको बता दे कि समाचार पत्र के संवाददाता को कई माह से शिकायत मिल रही थी कि बलरामपुर जनपद का रहने वाला नृपेन्द्र शुक्ला बलरामपुर में भारतीय विद्यालय इंटर कालेज में एक में शिक्षक के पद पर कार्यरत है। संवाददाता ने मामले की पड़ताल करने के लिए शिक्षक और मालिक चन्द्र और शिमला गुटका के बलरामपुर जनपद के वितरक नृपेन्द्र शुक्ला के मोबाईल नम्बर ७३0९0९२186 पर उपरोक्त गुटका कंपनी के प्रधान कार्यालय इंदौर का अधिकारी बनकर बात किया। संवाददाता ने नृपेन्द्र शुक्ला से पूछा कि मेरी बात नृपेन्द्र शुक्ला से हो रही है। नृपेन्द्र शुक्ला ने का जी हां। नृपेन्द्र शुक्ला ने पूछा आप कहां से बोल रहे है। संवाददाता ने कहाकि मैं इंदौर से बोल रहा हूं। नृपेन्द्र शुक्ला ने कहा जी बताईए। संवाददाता ने कहाकि मालिक चन्द्र और शिमला गुटका की बिक्री में किसी प्रकार की दिक्कत आ रही है। इस पर नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि दिक्कत तो बहुत आ रही है। गुटके की बिक्री के लिए कंपनी की तरफ से न तो किसी प्रकार की सहूलियत दी गई और ना ही गुटके की बिक्री के लिए किसी प्रकार की मार्केटिंक करवायी गई है। कंपनी के लोगों ने हमसे सिर्फ पैसा ले लिया है और सामान रख दिया है। इस पर संवादादात ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए अरे! यानि सामान आपके हाथ में रख दिया है लेकिन बिक नहीं रहा है। इस पर नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि आगे कोई सिस्टम नहीं है कि जिससे पता चल सके कि माल कैसे बिकेगा। महेश्वरी जी ने हमारे साथ बहुत गलत किया है। पैसा ले लिया और सामान रख दिया है। अब किसी प्रकार का सहयोग नहीं कर रहे है। संवाददाता ने पूछा कि कितना माल आपके पास है। इस पर नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि हमारे पास 8-8 बोरा माल आया था। नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि महेश्वरी जी ने हमसे कमिटमेन्ट किया था लेकिन उन्होंने अपना कमिटमेन्ट पूरा नहीं किया है। इस पर संवाददाता ने कहाकि मतलब माल बिका नहीं है। इस पर नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि नहीं ऐसा नहीं है। मैंने अपनी मेहनत से माल बेचा है। मगर अभी भी काफी माल बचा है। नृपेन्द्र ने कहाकि ऐक्च्यूली मैं एक टीचर हूं। मुझसे महेश्वरी जी ने कहाकि आप पैसा लगाईये। मैं माल बेचवाऊगां और सारा बिक्री का काम देखूंगा। सारा माल मैं बेचवाऊंगा। सारे लड़कों को मैं सेलरी दूंगा। मगर माल गिराने के बाद महेश्वरी जी ने अपना कमिटमेन्ट पूरा नहीं किया। ये मुझसे बार-बार बहाने बनाते रहे कि मैं आज आऊंगा, कल आऊंगा, लेकिन ये नहीं आये और मेरा पैसा फंस गया। इस पर संवाददाता ने कहाकि चलिए खैर, मैं आपकी शिकायत को गंभीरता से लेता हूं। फिर नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि देखिए भाई साहब, अगर माल बेचवाने में मेरी कोई हेल्प हो सके तो अपने स्तर से कराईये अन्यथा बचा हुआ माल ले लीजिए और मेरा पैसा वापस दिला दीजिए। फिर संवाददाता ने नृपेन्द्र शुक्ला से पूछा कि महेश्वरी जी ने आपको माल कच्चे पर्चे पर दिया था कि या फिर पक्के पर्चे पर बिल बनाकर दिया था। नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि मुझे कोई पर्चा नहीं दिया है। महेश्वरी जी ने कहाकि माल उतरवाईये और बेचिए। इसमे किसी पर्चे की जरूरत नहीं है। उन्होंने मुझे कोई पर्चा नहीं दिया था। हमने भी कहा चलो भाई शुरूआत है। पहले धीरे-धीरे शुरू करते है। उसके बाद जो भी रजिस्ट्रेशन वगैरह बाद में कराया जायेगा। मगर महेश्वरी जी का मकसद सिर्फ मुझसे पैसा निकलवाना था। इसलिए उन्होंने पैसा लेकर मेरे सिर पर माल पटक दिया। इस पर संवाददाता ने कहाकि देखिए कंपनी का यह मकसद नहीं है कि किसी के सिर पर माल पटक दे। कंपनी का मकसद है कि अधिक से अधिक मुनाफा हो और माल बिके। इस पर नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि जी हां। ऐसा ही होता भी है। महेश्वरी जी ने मुझसे कहा था कि माल की बिक्री के लिए बकायदे मार्केटिंग की जायेगी। प्रचार किया जायेगा। मगर उन्होंने कुछ नहीं किया। इस पर संवाददाता ने कहाकि चलिए आप की समस्या पर विचार किया जायेगा। संवाददाता की नृपेन्द्र शुक्ला से जैसी ही बात हुई। वैसे ही कंपनी के लखनऊ सीएण्डएफ मुखिया शारिख को खबर लग गई। शारीख ने संवाददाता से क्या वार्ता की थी। इसकी सम्पूर्ण जानकारी पूर्व के अंक में दे दी गई थी। संवाददाता मामले की छानबीन कर रहा है। इस बात की खबर शारिख ने अपने सभी वितरकों को तत्काल प्रभाव से दी और सभी को निर्देश दिया कि कोई किसी भी प्रकार की जानकारी किसी भी व्यक्ति को न दे। संवादादाता ने पुन: अपना वास्तविक परिचय देते हुए शिक्षक और मालिक चन्द्र और शिमला गुटका के वितरक नृपेन्द्र शुक्ला से वार्ता की और उनका पक्ष जानने का प्रयास किया। इस बार नृपेन्द्र शुक्ला ने संवाददाता से जो बात कही। वह अत्यन्त आश्चर्यजनक थी। 

नृपेन्द्र शुक्ला की भांति अध्यापक सीताराम भी बेचते हैं गुटका

मैनफोर्स समाचार पत्र पाठकों को यह अवगत करा दें कि जिस भारतीय विद्यालय इंटर कालेज बलरामपुर में नृपेन्द्र शुक्ला अध्यापक के रूप में कार्यरत है। उसी कालेज में अध्यापक के रूप में कार्यरत सीताराम भी मालिक चन्द और शिमला गुटके के वितरक की भूमिका अदा कर रहा है। ऐसा प्रती हो रहा है कि विद्यालय प्रबंधन या फिर सरकार इन अध्यापकों को समय पर या पर्याप्त वेतन नहीं दे रही है कि जिससे विवश होकर अध्यापक अनैतिक रूप से मालिक चन्द और शिमला गुटका बेच रहे है। 

फर्म का पंजीकरण चाय कंपनी का और बेच रहे गुटका 

समाचार पत्र अपने पाठको का ध्यान पूर्व के अंक में प्रकाशित समाचार की तरफ आकर्षित कराना चाहता है। जिसमें समाचार पत्र ने लिखा था कि मालिक चन्द और शिमला गुटका कंपनी अपने गुटके उत्पाद को बेचने के लिए कैसे सेल्स टैक्स चोरी कर रही है। कैसे कंपनी यातायाता कर चोरी कर रही है। इसका भी वर्णन किया था। समाचार पत्र ने अपने पूर्व के अंक में इस बात पर भी प्रकाश डाला था कि कंपनी यूपी में अपना जो भी सीएण्डएफ  स्थापित किया है। वह अनैतिक है। उसी अनैतिक सीएण्डएफ और सुपर स्टाकिस्टों की अनैतिक कार्यशैली पर मैनफोर्स समाचार पत्र इस बार के अंक में संक्षिप्त प्रकाश डाल रहा है। शेष जानकारी अगले अंक में विस्तृत रूप से देगा।आपको बता दें कि जनपद गोण्डा के रानी बाजार में सोमानी चाय के नाम से फर्म का पंजीकरण है। इस फर्म के प्रोपराईटर कमल सोमानी है। यूं तो कहने के लिए कमल सोमानी चाय का व्यवसाय करते है। सेवा चाय नाम का इनका उत्पाद है। मगर वास्तविकता यह है कि कमल सोमानी चाय के व्यवसाय के नाम पर मालिक चन्द, शिमला गुटका सहित अन्य गुटका कंपनियों के गुटके के व्यवसाय करते है। कमल सोमानी गोण्डा जनपद में एक सुपर स्टाकिस्ट है।  इनके अंडर में लगभग सात गुटका वितरक आते है। जिनके नाम क्रमश: करनैल गंज में हरिशंकर किराना स्टोर, प्रयागपुर में मुन्नीभाई, मनकापुर में कौशल जी, उतरौला में सीताराम है। जो एक अध्यापक के रूप में उतरौला बलरामपुर में अध्यापक के पद पर कार्यरत है। जिनके बारें में उपरोक्त पंक्तियों में संक्षिप्त जिक्र किया जा चुका है। थानेपुर में जावेद भाई, बलरापुर में नृपेन्द्र शुक्ला बतौर मालिक चन्द और शिमला गुटका कंपनी के वितरक के रूप में तैनात है। नृपेन्द्र शुक्ला और सीताराम एक ही स्कूल में अध्यापक के रूप में कार्यरत है। इसका जिक्र उपरोक्त पंक्तियों में किया जा चुका है। इसी प्रकार नवाबगंज में वितरक के रूप में लालजी पान भण्डार है। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि एक चाय के फर्म के नाम पर अनैतिक रूप से सेल्स टैक्स, ट्रांसपोटेशन टैक्स सहित अन्य प्रकार के करों की चोरी की जा रही है फिर विभाग कानों में तेल डाले सो रहा है। आखिर सेल्स टैक्स विभाग प्रदेश में इन कंपनियों द्वारा खुलेआम की जा रही कर चोरी के खिलाफ आंखे क्यों मूंदे हुए है। जबकि समाचार पत्रों में आये दिन मय साक्ष्यों के साथ इस प्रकार के कर चोरी की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जा रहा है। आखिर विभाग की इस कर चोरी को न रोक पाने की मजबूरी क्या है। कही ऐसा तो नहीं कि विभाग के आलाधिकारी खुद ही इस खेल के असली खिलाड़ी है। संवाददाता ने नृपेन्द्र शुक्ला से पूछा कि आप जो मालिक चन्द्र और शिमला गुटका का अवैध कारोबार कर रहे है। इस संबंध में आप का क्या कहना है। नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि यह कौन सा कारोबार है। इस प्रकार का हम कोई भी कारोबार नहीं करते है। हम किसी भी प्रकार का अवैध कारोबार नहीं करते है। संवाददाता ने कहाकि यदि आप गुटके का अवैध कारोबार नहीं करते है तो फिर आप क्या कारोबार करते है। नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि देखिए मैं पहले इस कारोबार को करने की सोच रहा था। मगर न तो मैनें यह कारोबार शुरू करवा पाया और ना ही कर पाया। गुटके का बिजनेश शुरू करने से ही नाकाम हो गया। मैं इस तरह का अब कोई काम नहीं करता हूं। संवाददाता ने कहाकि फिर आप क्या कारोबार करते है। इस पर नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि मैं कोई भी बिजनेस नहीं करता हूं और ना ही मेरा कोई बिजनेस है। संवाददाता ने कहाकि अभी दो दिन पहले आपने फोन पर कहा था कि कोई महेश्वरी जी है। जिन्होंने मालिक चन्द्र और शिमला गुटका की 8-8 बोरिया पैसे लेकर मुझे दे दी लेकिन उन्होंने न तो मार्केटिंग कराया और ना तो किसी प्रकार की कोई सहायता की थी। अब आप कह रहे है कि आप कोई भी कारोबार नहीं कर रहे है। इसका क्या मतलब है। इस पर नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि हां वो सब तो ठीक है। उन्होंने माल दिया था। मैं अब बेच कर सब खत्म कर दिया हूं। फिर संवाददाता ने कहाकि अभी तो आप कह रहे थे कि आप कोई भी व्यापार नहीं कर रहे है। आपका इस प्रकार के व्यापार से कोई मतलब नहीं है। इस पर नृपेन्द्र ने कहाकि मतलब ये कि माल आया और गया। फिर संवाददाता ने कहाकि माल कहां से आया और कहां गया। इस पर नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि भाई ये सब मैं आपको क्यों बताऊं ? आप कौन है। आप आईए पास बैठिए तो सारी बात बताऊं। मैं भी जानूं आप कौन है। क्या चाहते है। इस पर संवाददाता ने कहाकि मैं पत्रकार हूं। मैं ये जानना चाहता हूं कि आप मालिक चन्द्र गुटका का व्यापार करते है कि नहीं। आपके पास माल कहां से आया और कहां गया। क्या आप इस व्यापार को करने के लिए सेल्स टैक्स में पंजीकरण कराये है। क्या आपने इस व्यापार को करने के लिए किसी प्रकार के फर्म का पंजीकरण कराया है। मैं यही जानना चाहूंता हं। इस पर हंसते हुए नृपेन्द्र शुक्ला कहाकि भैया इस संबंध में क्या बताऊं हीं...हीं...हीं...ये सब चलता है। इन लोगों का ऐसे ही कारोबार चलता है। आप बैठिए साथ में बात हो जायेगी। जब हमारी आपकी मुलाकात होगी। तब सब बात बन जायेगी। संवाददाता ने कहाकि क्या बात बन जायेगी। नृपेन्द्र कहाकि आप आईए सब बात हो जायेगी। संवाददाता ने कहाकि आप जानते है कि आपने अवैध तरीके से गुटके का व्यापार किया है। आपको पता है कि आपने कितना सेल्स टैक्स चोरी किया है। आपने 8-8 बोरी माल बेचकर करीब दो लाख रूपये की टैक्स चोरी की है और आप कह रहे है कि सब बैठकर बात हो जायेगी। इस पर नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि इसकी आप चिन्ता न करिए। हमारे जानने वाले सेल्स टैक्स में अधिकारी है। जब हम लोग बैठेंगे तो सब ठीक हो जायेगा। इस पर संवाददाता ने कहाकि यदि आपके जानने वाले सेल्स टैक्स अधिकारी है तो क्या वे हो रही सेल्स टैक्स चोरी के मामले को दबा देंगे। क्या वे आपके कबूलनामे में झूठा करार देंगे। क्या वे सेल्स टैक्स अधिकारी है तो खुलेआम खुद ही सेल्स टैक्स चोरी की इजाजत देंगे। आप कह रहे है कि हमारे मंत्री जी जानने वाले है, विधायक जी जानने वाले है। क्या वे अनैतिक कार्य करायेगे। क्यों वे सरकारी राजस्व की चोरी करायेंगे। इस पर नृपेन्द्र शुक्ला ने घबराकर कहा अरे नहीं भाई साहब ऐसी कोई बात नहीं है। आप आकर बैठिए सब ठीक हो जायेगा। संवाददाता ने पूछा क्या ठीक हो जायेगा। नृपेन्द्र शुक्ला ने घबराते हुए कहाकि पहले आप आईये बैठकर आपस में बात हो जायेगी। फोन पर क्या बात करनी है। आप आईये, सब ठीक हो जायेगा। यह कहकर फोन काट दिया।  करीब आधे घंटे बाद नृपेन्द्र शुक्ला ने पुन: मैनफोर्स संवाददाता को फोन मिलाया। संवाददाता ने फोन उठाया तो नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि भाई साहब आपके मदद की आवश्यकता है। संवाददाता ने कहाकि बताईये क्या मैं आपकी मदद कर सकता हूं। नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि भाई साहब हमारे पास जो मालिक चन्द और शिमला गुटका बचा हुआ है। आप उसे कंपनी को वापस कराने में मेरी मदद करें। मेरा माल वापस हो जायेगा तो आपकी भी कुछ मदद हो जायेगी। संवाददाता ने कहाकि नहीं...नहीं... हमारा ये मैटर नहीं है। हमारा मैटर सिर्फ समाचार लिखना है। इन सब से हमारा कोई लेना देना है। आप अपनी कंपनी को माल वापस करियें। इसमें मैं आपकी कैसे मदद कर सकता हूं। आप इस बारें में अपने डीलर से बात करियें। महेश्वरी जी से बात करिये। नृपेन्द्र शुक्ला ने हंसते हुए कहाकि हमें लगा कि आप इसमें हमारी कुछ मदद कर सकते है। आप महेश्वरी जी से बात करके माल वापस करा सकते है। संवाददाता ने कहाकि ये आपने कैसे सोच लिया कि मैं आपके लिए बात करूंगा। आपने डीलर से बात करियें और महेश्वरी जी से बात करियें माल वापस करने के लिए मुझसे इस संबंध में बात करने से क्या फायदा होगा। नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि माल बेकार होने से अच्छा था कि वापस हो जाता, इसमें आपका भी फायदा हो जाता और मेरा भी हो जाता। संवाददाता ने पूछा कितना माल बच गया है। दो-चार बोरा बच गया है क्या ? नृपेन्द्र ने कहाकि अरे दो-चार बोरा ही समझ लीजिए बचा है, देखना पड़ेगा कि कितना माल बचा है। संवाददाता ने कहाकि अरे भई जब इतना माल बचा है तो इसे आप अपने उस स्कूल में अपने उस स्कूल में अपने अध्यापक मित्रों को बांट दीजिए जहां आप शिक्षक के रूप में भी कार्य कर रहे है। नृपेन्द्र शुक्ला ने हंसते हुए कहा अरे क्या बता रहे हो यार। अरे मैं तो इन लोगों के बाद आया हूं इसमें। पहले तो लगा सब ठीक है लेकिन सब गडबड़ हो गई। संवाददाता ने कहाकि अरे भाई जितने भी बोरें गुटके बचे है। उसे अपने विभाग के आलाधिकारियों को भी ईद के त्यौहार पर गिफ्ट दे दीजिए। इधर-उधर लेकर भागने से क्या फायदा है। नृपेन्द्र ने संवाददाता की बात सुनकर जोर का ठहाका लगाया। कहाकि वाह भाई। सही कहा आपने। वास्तव में ये सब होयेगा कैसा। इन लोगों ने बढिय़ा चूना लगाया हमें। संवाददाता ने पता चला है कि आप स्कूल में अध्यापक के रूप में भी कार्यरत है। नृपेन्द्र शुक्ला ने हंसते हुए कहाकि अरे थोड़ा बहुत कभी-कभार स्कूल चले जाते है। संवाददाता ने थोड़ा बहुत का क्या मतलब है। चलिए मैं ये लिख दूंगा कि आप शिक्षक की नौकरी को भी मजाक के रूप में लेते है। नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि आपके लिख देने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। मेरे स्कूल के लोग जानते है कि मैं कितनी ईमानदारी से अपना  काम करता हूं।  आपके लिखने से कुछ नहीं होने वाला है। मैं अपने विभाग में निपट लूंगा। आप बलरामपुर की बात कह रहे तो मैं बता दूं कि बलरामपुर में मैं अपने विभाग में निपट लूंगा। चिन्ता करने की बात नहीं है। संवाददाता ने कहाकि आप जो कह रहे है सोच समझकर रहे है। नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि अरे मैं जो कह रहा हूं ब्रह्मïा का वाक्य थोड़े ही है। मेरे कहने से क्या फर्क पडऩे वाला है। मैं डेली अपने स्कूल में साईन करता हूं। आपके लिख देने से थोड़े कुछ होने वाला है। संवाददाता ने कहाकि गुरूदेव आपको ये शोभा नहीं दे रहा है कि आप शिक्षक होकर गुटका बेच रहे है। नृपेन्द्र शुक्ला ने कहाकि हां ये बात मैं आपकी बिल्कुल मानूंगा। क्योंकि आप दूसरे व्यक्ति है जो जिन्होंने मुझे ये लफ्ज कहा। ऐक्च्यूली हुआ क्या था कि हमारे एक छोटे भाई साहब थे। उनसे हमसे कोई मतलब नहीं था लेकिन उन्होंने कहाकि भाई पैसा लगाओ हम सब देख लेंगे। हमने पैसा लगाया लेकिन कोई खास लाभ नही हुआ। इसमें कोई खास मार्जिन नहंी थी। हमने कोई बिजनेस कभी किया नहीं था। मगर हमने उनके बिहाप पर माल मंगा लिया। चूंकि मेरे पास टाईम था। ये रेग्यूलर काम था। मैं रेग्यूलर स्कूल में व्यस्त था। इसलिए इस बिजनेस पर ध्यान नहीं दे पाया। सारा का सारा माल फंस गया। संवाददाता ने कहाकि अरे भाई आपने 8-8 बोरा माल मंगाया है। कम से कम एक बार आपने डीलर से पक्का पर्चा तो मांग लो। तभी तो माल वापस करोंगे। नृपेन्द्र शुक्ला ने अरे नहीं। 8 बोरा माल नहीं है। चार बोरा माल बचा है। संवाददाता ने कहा पहले तो आप कह रहे थे कि आप 8-8 बोरा माल लिये थे। इसके बाद कह रहे थे कि हम ये सब काम नहीं करते है। अब फिर आप कह रहे है कि हमने आठ बोरा नहीं चार बोरा माल बेचा है। 

 

 

 

03
July

 

तथाकथित पत्रकार हेमन्त कुमार मिश्रा की ब्लैकमेलिंग से सदमे में आम आवाम और सरकारी महकमे के अधिकारी

मैनफोर्स

लखनऊ। मैनफोर्स समाचार पत्र ने अपने पूर्व के अंक में लखनऊ जनपद से अवैध रूप से संचालित क्राईम रिव्यू हिन्दी मासिक/साप्ताहिक समाचार पत्र का उल्लेख किया था। साथ ही उसके ब्लैकमेलर संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा की भ्रष्ट कार्यप्रणाली का वर्णन किया था। मैनफोर्स समाचार पत्र अपने इस अंक में तथाकथित रूप से संचालित हिन्दी मासिक/साप्ताहिक समाचार पत्र क्राईम रिव्यू के ब्लैकमेलर संपादक की कार्यप्रणाली पर पुन: नया प्रकाश डाल रहा है। जो क्रमश: इस प्रकार है। गुडम्बा थाना क्षेत्र में चहुंओर इस बात की चर्चा आम है कि क्राईम रिव्यू के संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा द्वारा आम लोगों से की जा रही अवैध धन उगाही और लोगों की जमीन पर की जाने वाली अवैध कब्जेदारी के पीछे वर्तमान सरकार के एक कद्दावर मंत्री और एक अधिवक्ता का हाथ है। सरकार के जिस कद्दावर मंत्री और हेमन्त कुमार मिश्रा की साठगांठ के चर्चे आम है। दरअसल उसकी वास्तविकता का कारण कुछ और नहीं बल्कि हेमन्त कुमार मिश्रा द्वारा उक्त मंत्री को अपना रिश्तेदार बताया जाना है। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है। समाचार पत्र इस बात की पुष्टि नहीं करता है। क्योंकि समाचार पत्र ने जब उक्त मंत्री और हेमन्त कुमार मिश्रा के बीच रिश्तेदारी की आम हो रही खबर की पड़ताल की तो पता चला कि हेमन्त कुमार मिश्रा की कोसो-कोसों दूर तक मंत्री महोदय से रिश्तेदारी नहीं है। हेमन्त कुमार मिश्रा ने अपनी दुकान चलाने के लिए एक कार्यक्रम में मंत्री महोदय के साथ धोखे से फोटों खिचवा ली। उसी फोटो को लोगों को दिखा-दिखाकर हेमन्त कुमार मिश्रा आम आवाम के साथ नौकरी दिलाने के नाम खुलेआम ठगी कर रहे थे। इतना ही नहीं, आम लोगों के साथ की जा रही ठगी की शिकायत करने के बाद कार्यवाही करने वाली गुडम्बा पुलिस को भी हेमन्त कुमार मिश्रा उक्त मंत्री का नाम लेकर अदब में ले लेते है। पाठक भी सोच रहे है कि संवाददाता इतने देर से सारी बात कह दिया लेकिन उक्त मंत्री का नाम नहीं बताया कि आखिर उक्त मंत्री है कौन ? पाठकों की जिज्ञासा को शांत करने के लिए यह बता दें कि उक्त मंत्री कोई और नहीं बल्कि भाजपा सरकार के कद्दावर कानून मंत्री बृजेश पाठक है। कानून मंत्री बृजेश पाठक के नाम पर हेमन्त कुमार मिश्रा न केवल गुडम्बा थानाक्षेत्र की आवाम को अनैतिक रूप से परेशान कर रहा है बल्कि कानून के रखवाले पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी कानून मंत्री का धौंस दिखाकर कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। इतना ही नहीं कानून मंत्री बृजेश पाठक के साथ खिचाई गई तस्वीर को अधिकारियों के मोबाईल और वाट्स एप पर साझा करके हेमन्त कुमार मिश्रा न केवल काननू मंत्री बृजेश पाठक के साथ अपने मजबूत रिश्तों का ऐलान कर रहा है बल्कि अधिकारियों को अदब में लेकर अनैतिक कृत्यों को करने का दबाव भी बना रहा है। आये दिन गुडम्बा थानाक्षेत्र की आवाम द्वारा क्राईम रिव्यू के संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा के दुष्कृत्यों की शिकायत, अवैध धन उगाही, लोगों की जमीन पर की जा रही जबरन की कब्जेदारी की शिकायत की जा रही है। मगर उसके बावजूद भी प्रशासन कान में रूई डालकर खामोश बैठा हुआ है। प्रशासन की इस खामोशी से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ उक्त तथाकथित समाचार पत्र के तथाकथित संपादक की जबरदस्त साठगांठ है। शायद इस साठगांठ से आम आवाम के साथ की जा रही अवैध धन उगाही में प्रशासन और उक्त तथाकथित पत्रकार की बराबर की हिस्सेदारी है। इसी लिए तो प्रशासन सब कुछ जानने के बावजूद भी इस गंभीर मामले में कार्यवाही नहीं कर रहा है।

कबूतरबाज पत्रकार हेमंत कुमार मिश्रा पुलिस के लिए ही बना नासूर

मैनफोर्स समाचार पत्र पाठकों का ध्यान एक ऐसे बिन्दु पर केन्द्रित कराना चाहता है। जो गुडम्बा पुलिस और विकासनगर पुलिस की लापरवाही का परिणाम है। गुडम्बा और विकासनगर पुलिस की लापरवाही की देन है कि हेमन्त कुमार मिश्रा अनैतिक तरीके से अनैतिक समाचार पत्र का अनैतिक संपादक और पत्रकार बनकर पुलिस और पब्लिक के लिए नासूर बन गया। यदि उपरोक्त थानों के पुलिस अधिकारियों ने पूर्व में मिल रही शिकायतों पर गौर फरमाया होता तो हेमन्त कुमार मिश्रा न तो आज अनैतिक समाचार पत्र का अनैतिक संपादक/पत्रकार होता और ना ही पुलिस कर्मियों और आम आवाम को अनैतिक तरीके से ब्लैकमेल करता। समाचार पत्र अपने पाठकों को यह बता दें कि हेमन्त कुमार मिश्रा आज से करीब 10 वर्ष पूर्व लखनऊ आया था। विभिन्न प्रकार के कार्र्यो को करने के बाद हेमन्त कुमार मिश्रा करीब 7-8 वर्ष पूर्व गुडम्बा के पास जानकी प्लाजा में सिक्यूरिटी एजेन्सी का संचालन करता था। एजेन्सी के काम में ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ तो उसने लोगों को नौकरी दिलाने के नाम लिए प्लेसमेन्ट एजेन्सी खोल ली। इस एजेन्सी में कार्य करने के दौरान हेमन्त कुमार मिश्रा बड़े-बड़े लोगों से जान-पहचान कर लिया। प्लेसमेन्ट एजेन्सी का कार्य करते-करते हेमन्त कुमार मिश्रा प्लेसमेन्ट कंपनी में नौकरी के लिए आने वाली लड़कियों को बड़े-बड़े लोगों की अय्यासी का माध्यम बनाने लगा। इस कार्य में उसे मोटी कमाई भी होने लगी। बीच-बीच में कुछ लड़कियां इस अनैतिक कृत्य को करने से इंकार करने लगी। इंकार करने पर यह लड़कियों को ब्लैकमेल करकेइस धंधे में जबरन उतारने लगा। कई बार तो उसके इस प्लेसमेन्ट कार्यालय में इसी बात को लेकर हेमन्त कुमार मिश्रा के अनैतिक कार्यो में लिप्त लड़कियों के अभिभावकों से मारपीट भी हुई। हेमन्त कुमार मिश्रा के इस प्रकार के अनर्गल कृत्यों का धीरे-धीरे भाण्डा फूटने लगा। कुछ लड़कियों के अभिभावकों ने धीरे-धीरे पुलिस-प्रशासन से शिकायत करनी शुरू कर दी। इस प्रकार की अनैतिक कार्यप्रणाली से गुडम्बा और विकासनगर थानाक्षेत्र के लोगों में असंतोष व्याप्त होने लगा। लोगों के बढ़ते असंतोष से पिण्ड छुड़ाने और पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने के खातिर हेमन्त कुमार मिश्रा कबूतरबाजी के इस धंधे को छोड़कर पत्रकारिता के धंधे में आ गया। मगर पत्रकारिता के इस धंधे को हेमन्त कुमार मिश्रा वास्तविक स्वरूप में संचालित नहीं कर सका और धीरे-धीरे पत्रकारिता के नाम पर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने, लोगों की जमीनों पर कब्जा करने, थानों में झूठे मुकदमें दर्ज कराने जैसे दलाली के दुष्कृत्यों को अंजाम देने लगा। पत्रकारिता के नाम पर की जा रही दलाली में हेमन्त कुमार मिश्रा को दिन दूनी रात चौगुनी की रफ्तार से सफलता मिलती गई। कारण, पत्रकारिता के व्यवसाय में पैसा और पावर दोनों का समावेश होना था। पत्रकारिता की आड़ में इसने न केवल लोगों की जमीनों पर अवैध कब्जा करना शुरू कर दिया बल्कि लोगों को रोजगार दिलाने के नाम पर आये दिन लाखों रूपये की ठगी करना प्रारम्भ कर दिया। इसके रास्ते में जो भी आया उसको इसने अनैतिक तरीके से झूठे मामलों में फंसाकर ठगने का अनैतिक कृत्य अवश्य किया है। इसकी अनैतिक कार्यप्रणाली की देन है कि आज गुडम्बा और विकासनगर क्षेत्र की आवाम इसके खून की प्यासी हो गई। आज उपरोक्त क्षेत्र में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो इसके अनैतिक कृत्यों से त्रस्त न हो। सब लोग इसे गाली दे रहे है। फिर भी यह अपनी अनैतिक कार्यप्रणाली से बाज नहीं आ रहा है। समाचार पत्र पाठकों को यह स्पष्टï कर दें कि हेमन्त कुमार मिश्रा पर जो भी आरोप समाचार पत्र में लिपिबद्ध है। वह समाचार पत्र की तरफ से नहीं लगाये गये है बल्कि उक्त आरोप क्षेत्र की आवाम की तरफ से लगाये है। आरोप लगाने वाले लोगों का विडियों फुटेज समाचार पत्र के पास सुरक्षित है। हेमन्त कुमार मिश्रा की कार्यप्रणाली से पीडि़त लोगों ने अपना-अपना बयान मय होश-हवास में रिकार्ड कराया है।

झूठे मामले में फंसाने के लिए पैसे के दम पर तैयार करता है शिकायतकर्ता

गुडम्बा थाना क्षेत्र में चहुंओर इस बात की चर्चा आम है कि नियम विरूद्ध संचालित क्राईम रिव्यू समाचार पत्र के संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा द्वारा आम लोगों से की जा रही अवैध धन उगाही और लोगों की जमीन पर की जाने वाली अवैध कब्जेदारी के पीछे वर्तमान सरकार के एक कद्दावर मंत्री और एक अधिवक्ता का हाथ है। इन्ही के संरक्षण में हेमन्त कुमार मिश्रा गुडम्बा थानाक्षेत्र के लोगों के खिलाफ झूठी शिकायत करके प्रताडि़त करता है। जब क्षेत्र के लोग अपनी जमीन पर निर्माण कार्य करते है तो हेमन्त कुमार मिश्रा उनके निर्माण कार्य को पैसे की धन उगाही की खातिर अनैतिक तरीके से पुलिस और प्रशासन को गुमराह करके रूकवा देता है। जिसका उदाहरण अभी हाल ही में दिनांक 11 जून 2018 को देखने को मिला है। हेमन्त कुमार मिश्रा के मकान संख्या ६५५ ए/ 4/331 गायत्रीपुरम के मकान के पास उमा सिंह पत्नी आरपी सिंह का प्लाट है। जिसकी बकायदा रजिस्ट्री है। उमा सिंह ने अपने प्लाट पर शुरूआती दौर से ही एक झोपड़ी डाल रखी है और वहां कुछ टिम्बर की सामग्री रखी है। उमा सिंह दिनांक 11 जून 2018 को अपने प्लाट पर टिम्बर से संबंधित कुछ अन्य सामग्रियां गिरवा रही थी। सामग्री गिरवाते हुए हेमन्त कुमार मिश्रा ने अपने छत से देखा। हेमन्त कुमार मिश्रा ने तत्काल उमा सिंह के पड़ोस में रहने वाले एक अन्य व्यक्ति को लोभ-लालच देकर तत्काल 100 पर फोन कराकर पुलिस को बुलवा लिया। हेमन्त कुमार मिश्रा के बहकावे में आकर उक्त युवक ने पुलिस को गुमराह करते हुए झूठी सूचना दी कि उमा सिंह दूसरे की जमीन पर कब्जा करा रही है। जबकि उक्त जमीन हमेशा से ही उमा सिंह की थी। जिस पर उनकी झोपड़ी बनी थी। मगर सब कुछ जानने के बावजूद भी जानबूझकर परेशान करने के उद्देश्य से हेमन्त कुमार मिश्रा ने उक्त व्यक्ति को लोभ-लालच देकर पुलिस को बुलवा लिया। पुलिस मौके पर आयी और उमा सिंह से उक्त प्लाट का दस्तावेज मांगा। उमा सिंह के परिजनों ने दस्तावेज दिखाया और पुलिस को बताया कि उसे जानबूझकर परेशान करने के लिए पुलिस को झूठी सूचना दी गई है। पुलिस जब मामले की पड़ताल कर ली तो उसने उमा सिंह को क्लीन चीट दे दी। मगर उसके बावजूद भी हेमन्त कुमार मिश्रा को चैन नहीं मिला। हेमन्त कुमार मिश्रा ने पुन: श्रवण कुमार नामक एक व्यक्ति को पैसे का लालच देकर उमा सिंह के पति आरपी सिंह के खिलाफ पुलिस अधीक्षक के पास झूठा शिकायती पत्र दिलाकर परेशान करना प्रारम्भ कर दिया। जब हेमन्त कुमार मिश्रा ने उमा सिंह के पति आरपी सिंह के खिलाफ शिकायत प्रार्थना पत्र दिला दिया। जिसमें यह उल्लेख किया गया कि श्रवण कुमार ने आरपी सिंह से दिनांक 21 अप्रैल 2015 को 5 प्रतिशत के ब्याज पर 30 हजार रूपये कर्ज लिया था। बतौर 15 सौ रूपये प्रतिमाह आरपी सिंह को दिनांक 21 अगस्त 2017 तक ब्याज अदा किया। इसके बाद वह ब्याज का पैसा नहीं दे पाया। इसके बाद गांव का खेत रेहन रखकर दिनांक 4 दिसम्बर 2017 को आरपी सिंह को 25 हजार रूपये दिया। श्रवण ने अनर्गल आरोप लगाते हुए यहां तक कहाकि आरपी सिंह उसके दुकान पर जाकर ब्याज का पैसा मांग रहे थे। श्रवण ने हेमन्त के बहकावे में आकर उमा सिंह के पति आरपी सिंह को सूदखोर बना दिया। हालांकि इस संबंध में आरपी सिंह से जब संवाददाता ने पक्ष जाना तो उन्होंने कहाकि जब भी मैं अपने प्लाट पर निर्माण कार्य करने की योजना बनाता हूं। तब-तब हेमन्त कुमार मिश्रा इसी प्रकार लोगों को पैसे देकर मेरे खिलाफ शिकायत कराता है और पुलिस को झूठी सूचना देता है और दिलाता है कि मैं अपने प्लाट पर अनर्गल निर्माण करा रहा हूं। जब-जब इसने पुलिस को झूठी शिकायत के आधार पर बुलाया तब-तब पुलिस ने मामले की पड़ताल कर मुझे बेगुनाह बताया है। कई बार हेमन्त कुमार मिश्रा और उसके झूठे शिकायतकर्ताओं को पुलिस ने डांट फटकार भी लगाई। उसके बावजूद भी यह पुलिस को गुमराह करना नहीं छोड़ रहा है। बता दें कि जिस श्रवण कुमार ने पैसे की लालच में हेमन्त कुमार मिश्रा के कहने पर उमा सिंह के पति आरपी सिंह के खिलाफ शिकायत की है। दरअसल उसी श्रवण कुमार को हेमन्त कुमार मिश्रा शिकायत करने के एवज में पैसा देने में आनाकानी करने लगा। हेमन्त कुमार मिश्रा की वादा खिलाफी से क्षुब्ध होकर श्रवण कुमार खुद आरपी सिंह के शुभ चिन्तकों से संदेश पहुंचा रहा है कि आरपी सिंह उसे माफ कर दे, और उससे गलती हो गई है। गुडम्बा पुलिस ने भी इसी आधार पर श्रवण कुमार और उमा सिंह के पति आरपी सिंह के बीच समझौता करा दिया। पाठकों को बता दें कि श्रवण ने जिस आरपी सिंह के खिलाफ हेमन्त कुमार मिश्रा के कहने पर शिकायत की थी। दरअसल, वही आरपी सिंह जरूरत पडऩे पर श्रवण कुमार की मदद किया करता था। इस बात को न केवल आरपी सिंह कहते है बल्कि खुद श्रवण कुमार भी स्वीकार करते है। आपको बता दें कि आरपी सिंह एक सरल सामाजिक व्यक्ति है। उनके दरवाजे पर कोई भी व्यक्ति जाता है तो वह खाली हाथ वापस नहीं आता है। आरपी सिंह अपनी क्षमतानुसार उसकी मदद अवश्य करते है। यह बात संवाददाता खुद की तरफ से नहीं कर रहा है बल्कि क्षेत्र के उन लोगों का कहना है। जिनसे आरपी सिंह के बाबत छानबीन की गई है। अवैध धन उगाही की खातिर हेमन्त मिश्रा किस प्रकार एक-दूसरे को लोभ-लालच देकर एक-दूसरे के खिलाफ अनैतिक तरीके से षडय़ंत्र रचता है। इससे बेहतर उदाहरण कुछ और नहीं हो सकता है।

क्या कहती हैं ब्लैकमेलर पत्रकार के उत्पीडऩ की शिकार उमा सिंह...

हेमन्त कुमार मिश्रा के उत्पीडऩ की शिकार बहादुरपुर गुडम्बा निवासिनी उमा सिंह कहती है कि उन्होंने वर्ष 2014 में दि ग्रेटर अवध सहकारी आवास समिति के सचिव अनवार अहमद से लगभग 800 वर्गफीट जमीन खरीदी थी। उक्त जमीन तथाकथित अखबार के संपादक और पत्रकार हेमन्त कुमार मिश्रा के मकान के पास है। उमा सिंह ने बताया कि उक्त जमीन को खरीदवाने के लिए श्रवण कुमार सिंह और समिति के मुंशी वसीवुद्दीन ने बिचौलिये की भूमिका निभायी थी। जिस वक्त उक्त जमीन को खरीदने की चर्चा चल रही थी। उस वक्त श्रवण कुमार सिंह और वसीवुद्दीन ने कहाकि उक्त जमीन साफ सुथरी है। इसमें किसी प्रकार का विवाद नहीं है। समिति के मुंशी वसीवुद्दीन ने भी कहाकि इस जमीन पर किसी प्रकार का वाद-विवाद नहीं है। यह जमीन साफ-सुथरी है। चूंकि मामला जमीन की खरीद फरोख्त का था। इसलिए जमीन के संबंध में सभी प्रकार की जानकारी जुटाना आवश्यक था। मेरे पति ने भी जमीन के बारे में छानबीन की। जिसमें यह स्पष्टï हुआ कि जमीन पर किसी प्रकार का विवाद नहीं है। जमीन साफ सुथरी है। इसके बाद हम लोगों ने उक्त जमीन की दिनांक २4 अप्रैल 2014 को रजिस्ट्री करवायी थी। मामला साल दो साल तक ठीक रहा है। अचानक करीब एक डेढ साल पहले हेमन्त कुमार मिश्रा ने श्रवण कुमार और वसीवुद्दीन से साठगांठ कर मेरी उपरोक्त जमीन में जबरन नगर निगम के कुछ कर्मचारियों को पैसे का लालच देकर पूरब से पश्चिम तक लगभग ढ़ाई फीट चौड़ी और 5-6 फीट लम्बी नाली बनवाना शुरू कर दिया। जब मैंने नाली बनाने का विरोध किया, तब हेमन्त कुमार मिश्रा अपने गुर्गो के साथ मारपीट करने पर आमादा हो गया। किसी तरह मामला शांत हुआ लेकिन हेमन्त कुमार मिश्रा शांत नहीं हुआ। हेमन्त कुमार मिश्रा ने श्रवण कुमार सिंह और मुंशी वसीवुद्दीन से साठगांठ कर पैसे की लालच देकर मेरे उक्त प्लाट के रजिस्ट्री की प्रति तहसील से निकलवा ली। उक्त रजिस्ट्री की प्रति को लेकर हेमन्त कुमार मिश्रा ने पैसे के दम पर श्रवण कुमार सिंह और मुंशी वसीवुद्दीन के सहयोग से लेखपाल को पैसे देकर मेरी जमीन पर राज्य सरकार का अधिग्रहण अंकित करवा दिया। जिसके संबंध में मैने कोर्ट में वाद भी दायर कर दिया। जिसका मामला आज भी विचारधीन है। उमा सिंह ने बताया कि हेमन्त कुमार मिश्रा ने मेरी जमीन पर धोखे से राज्य सरकार का अधिग्रहण अंकित करावाकर मुझसे और मेरे पति से 3 लाख रूपये की मांग करने लगा और कहने लगा कि मुझसे उलझने का परिणाम तुम लोगों को भुगतना ही पड़ेगा। तुम लोगों ने मुझसे दुश्मनी की है। अब मैं देखता हूं कि तुम लोग कैसे अपनी जमीन पर मकान बनवा पाते हो। हेमन्त कुमार मिश्रा कहने लगा कि अभी भी समय है। तुम लोग मुझसे माफी मांग लोग और 3 लाख रूपये देकर इस दुश्मनी को खत्म कर लो। वर्ना तुम लोगों को मुझसे दुश्मनी करनी महंगी पड़ जायेगी। चूंकि बात सत्य और असत्य की थी। इसलिए मैंनें हेमन्त कुमार मिश्रा के इस उत्पीडऩ के आगे सिर नहीं झुकाया। जब-जब मैने अपने प्लाट पर मकान बनाने का प्रयास किया, तब-तब हेमन्त कुमार मिश्रा ने पुलिस से झूठी शिकायत करके मेरा मकान नहीं बनने दिया। हालांकि पुलिस जितनी बार आयी, उसने मुझे निर्दोष बताया और हेमन्त कुमार मिश्रा को डांट फटकार लगाई लेकिन उसके बावजूद भी हेमन्त कुमार मिश्रा अपनी दूषित मानसिकता से बाज नहीं आ रहा है और मुझे बिना मतलब परेशान कर रहा है। अब तो हेमन्त कुमार मिश्रा ने मेरे पति आरपी सिंह को ही सूदखोर बना दिया। हेमन्त कुमार मिश्रा ने श्रवण कुमार सिंह को धन का लालच देकर मेरे पति के खिलाफ शिकायत करा दी। श्रवण कुमार ने मेरे पति पर आरोप लगाया कि उसने मेरे पति से उधार पैसे लिया है और सारा पैसे दे दिया है लेकिन उसके बाद भी मेरे पति उससे पैसे मांग रहे है। उमा सिंह ने कहाकि श्रवण कुमार सिंह गरीब परिवार से है। कई बार उसे पैसे की जरूरत रही। उसने मेरे पति से मांगा भी था। मेरे पति ने उसे दिया था। मगर न तो उन्होंने उसे उधार के रूप में दिया और ना ही श्रवण कुमार ने उधार के रूप में लिया। मेरे पति ने उसकी मदद की थी। श्रवण कुमार सिंह एक अच्छा आदमी था। मैं और मेरे पति दोनों ने उसकी कई बार मदद की है। मगर हेमन्त कुमार मिश्रा ने उसे पैसे का लोभ देकर मेरे और मेरे पति के खिलाफ अनैतिक रूप में इस्तेमाल किया हैं। हेमन्त कुमार मिश्रा कभी मेरे और मेरे पति के खिलाफ श्रवण कुमार से झूठी शिकायत कराता है तो कभी अन्य के खिलाफ झूठी शिकायत कराता है। लोगों को अनैतिक तरीके से ब्लेकमेल करना इसका पेशा बना गया है। कभी खुद के नाम से हेमन्त कुमार मिश्रा लोगों के खिलाफ झूठी शिकायत करके ब्लैकमेल करता है तो कभी दूसरे से झूठी शिकायत कराकर ब्लैकमेल करता है। इसके ब्लैकमेलिंग के खेल में सिर्फ अकेले श्रवण कुमार और समिति के मुंशी वसीवुद्दीन ही नहीं है बल्कि चार-पांच अन्य लोग भी है। जिनके नाम पर हेमन्त कुमार मिश्रा लोगों की अनैतिक और झूठी शिकायत करके ब्लैकमेल करता है। हेमन्त कुमार मिश्रा के इस ब्लैकमेलिंग की कार्यप्रणाली से सिर्फ मैं ही त्रस्त नहीं हूं। क्षेत्र में ऐसे अनगिनत लोग है, जो हेमन्त कुमार मिश्रा की ठगी और ब्लैकमेलिंग का शिकार हुए। हेमन्त कुमार मिश्रा पत्रकार कम ब्लैकमेलर ज्यादा है।

 

क्या कहती हैं हेमंत कुमार मिश्रा के उत्पीडऩ की शिकार सपना सिंह का कहना है...

जिस प्रकार उमा सिंह पत्नी आरपी सिंह ब्लैकमेलर पत्रकार हेमन्त कुमार मिश्रा की अनैतिक कार्यशैली से पीडि़त है। ठीक उसी प्रकार सपना सिंह पत्नी मनीष सिंह निवासी इस्माईलगंज सिधौली सीतापुर भी पीडि़त है। सपना सिंह कहती है कि हेमन्त कुमार मिश्रा के मकान के पास ही 900 वर्गफीट का प्लाट भूखण्ड संख्या 11 ए दिनांक 21 नवम्बर 2014 को दि ग्रेटर अवध सहकारी आवास समिति लखनऊ के सचिव अनवार अहमद से खरीदी थी। सपना सिंह ने बताया कि उन्हें यह जमीन श्रवण कुमार सिंह और समिति के मुंशी वसीउद्दीन ने बिचौलिये की भूमिका अदा करते हुए समिति के सचिव अनवार अहमद से खरीदवायी थी। इन लोगों ने कहाकि जमीन पर किसी भी प्रकार का वाद विवाद नहीं है। जमीन साफ-सुथरी है। मैंने जमीन के बारे में बकायदा छानबीन की। उक्त जमीन सभी प्रकार के वादों से मुक्त और साफ सुथरी थी। इसके बाद उन्होंने बकायदा रजिस्ट्री करायी। जिसके सभी दस्तावेज मेरे पास है। सपना ने बताया कि वे जब भी अपनी जमीन पर निर्माण कार्य कराने का प्रयास करती है। हेमन्त कुमार मिश्रा अपने गुर्गो के साथ उनके प्लाट पर आकर खड़ा हो जाता है और निर्माण कार्य करने के एवज में पैसे मांगने लगता है। हेमन्त मिश्रा कहता है कि आप निर्माण कार्य तभी कर सकती है। जब मुझे 3 लाख रूपये देंगी। सपना सिंह कहती है कि मैं आपको किस बात के पैसे दूं। हेमन्त कुमार मिश्रा कहते है कि अगर पैसे नहीं दोगी तो तुम्हारी भी जमीन अभिलेखों में नगर निगम की संपत्ति दर्ज करा दूंगा। यदि निर्माण कार्य कराना चाहती हो तो 3 लाख रूपये दो अन्यथा ऐसे ही कागज में मालिकाना हक लेकर बैठी रहोगी। मेरे रहते तुम इस जमीन पर कभी भी निर्माण कार्य नहीं करा पाओगी। सपना सिंह ने कहाकि जब भी मैं निर्माण कार्य कराने का प्रयास करती हूं तो अपने गुर्गो के साथ आकर मारपीट करने पर आमादा हो जाता है। चूंकि हम लोग सीतापुर के रहने वाले है और हेमन्त कुमार मिश्रा यहा का स्थानीय निवासी है। हम लोगों इसके साथ मारपीट नहीं सकते है। इसलिए इसका हौसला बुलंद है। सपना कहती है कि इसकी अवैध धन उगाही और अनैतिक कार्यप्रणाली से हम लोग मानसिक रूप से प्रताडि़त हो रहे है। हम लोग अपनी ही जमीन पर इसकी की गुण्डई के कारण मकान नहीं बनवा पा रहे है। हम लोगों को समझ में आ रहा है कि आखिर इस तथाकथित पत्रकारिता के गुण्डे से कैसे निपटा जाये ?

 

हेमन्त की ब्लैकमेलिंग से त्रस्त अतहर सईद उस्मानी...

जिस प्रकार उमा सिंह और सपना सिंह ब्लैकमेलर पत्रकार हेमन्त कुमार मिश्रा के उत्पीडऩ का शिकार है। ठीक इसी प्रकार का शिकार अतहर सईद उस्मानी निवासी बहादुरपुर गुडम्बा भी है। अतहर ने बताया कि वे हेमन्त कुमार मिश्रा के मकान के पास अपना 1200 स्क्वायर फीट का एक भूखण्ड दि ग्रेटर अवध सहकारी आवास समिति लखनऊ के सचिव अनवार अहमद से खरीदे है। अतहर सईद कहते है कि जब भी वे अपने भूखण्ड पर निर्माण कार्य कराने की कोशीश करते है। हेमन्त कुमार मिश्रा अपने गुर्गो के साथ उनके भूखण्ड पर आ जाता है और कहता है कि या तो तुम मुझे 3 लाख रूपये दो या फिर इस जमीन पर मकान बनाने का सपना छोड़ दो। अतहर सईद ने कहाकि हेमन्त कुमार मिश्रा जबरन मेरे जमीन में नगर निगम का बोर्ड लगा दिया। मेरे खिलाफ झूठी शिकायत नगर निगम में दे दी कि मैं नगर निगम की जमीन कब्जा कर रहा हूं। हालांकि नगर निगम के लोग आये और पैमाईश किये। नगर निगम के अधिकारियों ने मुझे क्लीनचीट भी दे दी। मगर उसके बावजूद भी हेमन्त कुमार मिश्रा मेरा मकान नहीं बनने दे रहा है। जब मकान बनाने जा रहा हूं तो अपने गुर्गो के साथ मुझसे मारपीट करने पर आमादा हो जा रहा है। मैंने इसके खिलाफ थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया है। मगर उसके बावजूद भी तथाकथित पत्रकारिता की आड़ में खुलेआम गुण्डई कर रहा हैं। मैं और मेरा परिवार इसकी अनैतिक कार्यप्रणाली से मानसिक रूप से परेशान त्रस्त हो गये है। हमें समझ में नहंी आ रहा है कि हम अपनी जमीन पर कैसे मकान बनाये।

 

क्या कहते हैं पीडि़त अनवार हसन उस्मानी...

उमा सिंह, सपना सिंह, अख्तर सईद उस्मानी जिस प्रकार हेमन्त कुमार की अनैतिक कार्यप्रणाली से त्रस्त है। ठीक उसी प्रकार अनवार हसन उस्मानी भी हेमन्त कुमार की अनैतिक कार्यप्रणाली से त्रस्त है। अनवार हसन उस्मानी कहते है मेरा और मेरे रिश्तेदारों का हेमन्त कुमार मिश्रा के मकान से कुछ दूरी पर प्लाट है। जब हम लोग मकान बनाने जाते है तब हेमन्त कुमार मिश्रा आकर गाली-गलौज और मारपीट करने लगते है। कहते है कि जब तक तुम लोग मुझे पैसे नहीं दोगे तब तक मकान नहीं बनवा पाओगे। अनवार हसन उस्मानी ने कहाकि वे पास के ही रहने वाले डीपी पाण्डेय से संदेश भिजवाये कि वे मुझसे कह दें कि हेमन्त कुमार मिश्रा ने कहाकि निर्माण कार्य कराने के लिए 2 लाख रूपये दे दो, अन्यथा मकान नहीं बनने दूंगा। अनवार हसन उस्मानी ने कहाकि डीपी पाण्डेय का भी बगल में प्लाट है। उस पर निर्माण कार्य कराने के लिए उनसे भी हेमन्त ने पैसा लिया है। अनवार हसन ने कहाकि क्षेत्र में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है। जो अपना निर्माण कार्य कराये और हेमन्त कुमार मिश्रा अवैध वसूली करने न पहुंचे। हेमन्त कुमार मिश्रा सबसे धन उगाही करते है। हेमन्त ने डीपी पाण्डेय, अतहर सईद उस्मानी सहित कई दुकानदारों से पैसा लिया है। मेरे कई रिश्तेदारों से मकान निर्माण करवाने के लिए पैसा लिया है। अनवार हसन ने कहाकि हेमन्त ने क्षेत्र के सभी लोगों को मानसिक सदमें में डाल दिया है। कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं, जिसको हेमन्त ने ठगा नहीं है। इसकी अनैतिक कार्यशैली से सिर्फ मैं ही नहंी बल्कि क्षेत्र के अनगिनत लोग मानसिक रूप से त्रस्त है।

 

 

 

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