20
January

मुकाम फाउण्डेशन के प्रथम कार्यक्रम की आवाम ने की भूरि—भूरि प्रशंसा

ट्राईसाइकिल, बैसाखी, व्हील चेयर, कान की मशीन और कंबल पाकर दिव्यांगजनों का खिला चेहरा 

मुकाम फाउण्डेशन ने दान दाताओं का भी किया सम्मान

मैनफोर्स

लखनऊ। राजधानी के गोमतीनगर के रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया कार्यालय के सामने स्थिति अन्तर्राष्टीय बौद्ध शोध संस्थान के आडिटोरियम में मुकाम फाउण्डेशन द्वारा दिव्यांगजनों के लिए उपकरण वितरण और कंबल वितरण कार्यक्रम ‘‘दिव्यांग उत्थान सहभागिता-वर्ष 2018-19‘‘ का आयोजन किया गया। इस उपकरण वितरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप काकोरी ब्लॉक प्रमुख कुंवर राम विलास उपस्थित थे। जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में पत्रकारिता जनसंचार संस्थान व विश्व संवाद केन्द्र जियामऊ के निदेशक अशोक सिन्हा, स्वंतत्र भारत समाचार पत्र के पूर्व संपादक नन्द किशोर श्रीवास्तव, वन विभाग के एसडीओ एके द्विवेदी, लखनऊ विश्वविद्यालय के पब्लिक एडमिनिस्टेशन विभाग प्रो. डा. रवीश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार डा. आशीष वशिष्ठ उपस्थित रहे।

 

कार्यक्रम का संचालन मुकाम फाउण्डेशन की कोषाध्यक्ष श्रीमती विष्णुमाया ने किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ कुमारी अनुष्का शर्मा, कुमारी अंशिका शर्मा और कुमारी आयुषि शर्मा ने संयुक्त रूप से गणेश वन्दना की गीत ‘‘जय गणेश देवा, जय गणेश देवा‘ पर नृत्य के साथ प्रारम्भ किया। स्वागत गीत के साथ कुमारी सुरभि साहू ने अतिथिगणों का स्वागत किया। इसके बाद अतिथिगणों ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। मुकाम फाउण्डेशन के अध्यक्ष विनीत कुमार, संस्था के उपाध्यक्ष रंजीत शर्मा, संस्था की प्रबंधक शशिप्रभा शर्मा, फाउण्डेशन के आम सभा के प्रदेश अध्यक्ष महेश साहू, आम सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव, संस्था के प्रचार मंत्री सुनील कुमार, संस्था की सदस्य श्रीमती सविता एवं श्रीमती नीलिमा सिंह आदि ने कार्यक्रम के अतिथि गणों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख कुंवर श्री राम विलास ने उपस्थिति सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहाकि मुकाम फाउण्डेशन का यह प्रथम कार्यक्रम है। प्रथम कार्यक्रम में मुकाम फाउण्डेशऩ द्वारा बगैर किसी सरकारी सहायता के मात्र जनता के सहयोग से इतने बडे पैमाने पर निःशक्तजनों को उपकरण मुहैया कराने का लक्ष्य अत्यन्त सराहनीय कार्य है।

मुकाम फाउण्डेशन के इस कार्य की जितनी भी प्रशंसा की जाये, वह कम ही होगी। इस अविस्मरणीय कार्य के लिए संस्था के अध्यक्ष विनीत कुमार और संस्था के सभी पदाधिकारी और सदस्य बधाई के पात्र है। उन्होंने कहाकि मुकाम फाउण्डेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 75 दिव्यांगजनों को आम जनता के सहयोग से मुकाम फाउण्डेशन द्वारा निःशुल्क ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, कान की मशीन और गरीब असहायों को कंबल वितरित गया है। निःशक्तों के हितार्थ निःस्वार्थ भाव से मुकाम फाउण्डेशन द्वारा जो सराहनीय और प्रशंसनीय कार्य किया गया है। उससे कही अधिक सराहना और प्रशंसा के पात्र मुकाम फाउण्डेशन को दान देने वाले दान दाता है। जो मुकाम फाउण्डेशन के इस सराहनीय और प्रशंसनीय कार्य में सहभागी है। उन्होंने कहाकि सामाजिक नैतिकता की दृष्टि से दिव्यांगजनों का सामाजिक स्तर उठाना, उन्हें सशक्त बनाना आदि पुनीत कार्य हैं। लोग दिव्यांगजनों को अभिशाप समझने के बजाय उनकी शारिरिक क्षति के कारण को दूर करने का प्रयास करें। इससे न केवल मानवता सुरक्षित रहती है बल्कि व्यक्ति का अंतर्मन भी संतुष्ट रहता है। हर व्यक्ति को ऐसे मनोभाव से प्रेरित होना चाहिए। तभी जाकर एक स्वस्थ हिन्दुस्तान और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते है। हमें दिव्यांगजनों को सामान्य जीवन जीने का अवसर प्रदान करना चाहिए। हमें दिव्यांगजनों का मनोबल बढ़ाना चाहिए। उन्हें जिन्दगी के खेलो में हारने नहीं देना चाहिए उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए हमें हर संभव सहयोग प्रदान करना चाहिए। यदि समाज हमारे दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा की गारन्टी मानवीय अधिकारों के परिपेक्ष्य में दे तो शारिरिक मानसिक आर्थिक कमजोरियों के भार को कम किया जा सकता हैं।

 

कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि अशोक सिन्हा ने मुकाम फाउण्डेशन के इस सेवापूर्ण कार्यो की सराहना करते हुए कहाकि संस्था के अध्यक्ष विनीत कुमार हमारे शिश्य थे। आज मुझे अपने शिष्य द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित होने पर गर्व की अनुभूति हो रही है। आज दिव्यांगजनों के सेवार्थ मेरे शिष्य ने जो अद्भूत कार्य किया है। वह अत्यन्त सराहनीय कार्य है। हम यह आशा व्यक्त करते है कि इसी प्रकार पूरी ऊर्जा के साथ समाजहित में विनीत कुमार कार्य करें। ईश्वर इन्हें दिन दूनी रात चौगुनी की रफ्तार से तरक्की प्रदान करें। उन्होंने कहाकि आमतौर पर व्यक्ति की आय, उसकी क्रय क्षमता, यह बताती है कि व्यक्ति की आर्थिक स्थिति कैसी है। मगर जब किसी दिव्यांगजन की बात आती है, तो अक्सर हम इस पैमाने को दरकिनार कर देते हैं। दिव्यांगजनों को दयनीय मान लिया जाता है। इसलिए न तो उसकी आर्थिक स्थिति की किसी को कोई चिंता है और न ही उस पर किसी प्रकार के चिंतन की चिन्ता है। क्योंकि उसे दयनीय माना जाता है। इसलिए दिव्यांजनों के कल्याण के लिए तैयार होने वाले कार्यक्रमों और योजनाओं में कृपा का भाव दिखाई देता है। दरअसल इसी सोच को बदलने की जरूरत है।

अगर हम यह मानकर चलें कि दिव्यांगजन भी समाज की उपयोगी अंग हैं। तो शायद हम उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में विचार करने के लिए विवश होंगे। इसके बाद जो योजनाएं बनेंगी। वह निश्चय ही दिव्यांगजनों को उनके पैरों पर तो खड़ा कर देगी और उनकी आर्थिक स्थिति को भी सुधारें देगी। दिव्यांगजनों को समाज में सही सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारना सबसे जरूरी है। यही स्थायी समाधाना भी है। इस समाधान की दिशा में मुकाम फाउण्डेशन ने आज अपने प्रथम कार्यक्रम में पहल कर दिया है। उम्मीद है कि मुकाम फाउण्डेशन इस पहल को सार्थक रूप देगा। मैं मुकाम फाउण्डेशन के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से कार्यक्रम के प्रेरणास्रोत पूर्व वर्गीकरण मंडी निरीक्षक श्रीकांत प्रसाद शर्मा, कार्यक्रम की संरक्षक श्रीमती आभा राय, प्रदीप कुमार राय एडवोकेट हाईकोर्ट, सदस्य समीर राय, सदस्य संजय राय, संस्था की प्रबंधक श्रीमती शशिप्रभा, श्रीमती सविता, श्रीमती नीलिमा सिंह, संस्था के आम सभा के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव, संस्था के जनपद बहराइच के जिलाध्यक्ष मो. इरशाद, जिलाउपाध्यक्ष मो. इसरार, सदस्य किरन यादव, संतराम, सुदीप कुमार उपस्थित रहे।

 

 

 

 

20
November

सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रबंधतंत्रों की अनैतिक कार्यप्रणाली के खिलाफ उ.प्र. माध्यमिक शिक्षक संघ लामबंद

मैनफोर्स

लखनऊ। लखनऊ जनपद के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रबंधतंत्रों द्वारा अवैध और अनैतिक तरीके से सहायता प्राप्त विद्यालयों की भूमि और भवनों को हथियाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रबंधतंत्रों द्वारा इन विद्यालयों के भवनों का न केवल व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है बल्कि अवैध तरीके से विक्रय करने का प्रयास किया जा रहा है। जिसका साक्षात् उदाहरण लखनऊ इण्टर कालेज के प्रबंधतंत्र और प्रबंधक की कार्यप्रणाली के रूप में देखा जा सकता है। इस प्रकार की अनैतिक कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ जनपद लखनऊ की कार्यकारिणी ने ऐसे प्रबंधतंत्रों और प्रबंधकों के खिलाफ चरणबद्ध तरीके से संघर्ष करने का निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने संघर्ष के प्रथम चरण के तहत सर्वप्रथम लखनऊ इण्टर कालेज लालबाग की करोड़ों रूपये की भूमि को हथियाने के लिए विद्यालय प्रबंधक द्वारा जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से साठगांठ करके विद्यालय के भवन को हड़पने की नियत से विद्यालय के भवन को ध्वस्त कराने की कार्यप्रणाली का व्यापक विरोध करेगा और माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा द्वारा प्रबंधक को दिये गये आदेश दिनांक 07 अप्रैल 2018 के अनुपालन में विद्यालय के एक कक्ष की मरम्मत का कार्य शुरू कराये जाने की मांग को लेकर 29 नवम्बर 2018 को विद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ जिला संगठन के पदाधिकारी सहित अन्य संघ के अन्य कार्यकर्ता विद्यालय के द्वार पर व्यापक प्रदर्शन करेंगे। यह जानकारी माध्यमिक शिक्षक संघ के मंत्री एवं प्रवक्ता डा. आरपी मिश्रा ने दी। श्री मिश्रा ने बताया कि लखनऊ इण्टर कालेज के प्रबंधक द्वारा कई वर्ष से विद्यालय की करोड़ों रूपये की भूमि को हथियाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रबंधक ने पहले बिजली ओर पानी का बिल जमा करना बन्द कर दिया। जिससे विद्यालय की बिजली कट गई और पानी की आपूर्र्ति बंद हो गई। इतना ही नहीं प्रबंधक ने विद्यालय के भवन की मरम्मत, रंगाई एवं पुताई, फर्नीचर  आदि का मरमम्त कराना भी बंद कर दिया। जिससे विद्यालय में छात्रों की संख्या तेजी से घटने लगी। श्री मिश्रा ने बताया कि लखनऊ इण्टर कालेज के प्रबंधक द्वारा विद्यालय को समाप्त करने की साजिश को समझकर विद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने ऐसे विषम परिस्थितियों में स्वयं आगे बढ़कर विद्यालय के संचालन की जिम्मेदारी संभाल ली और प्रत्येक शिक्षक द्वारा रूपया 2000 तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों द्वारा रूपया 1000 प्रतिमाह बिजली बिल और पानी की बिल जमा की गई। इतना ही नहीं इन लोगों के द्वारा विद्यालय की रंगाई-पुताई और फर्नीचर की मरम्मत करायी गई। यहां तक कि गत वर्ष से विद्यालय की छात्र संख्या भी बढऩे लगी। शिक्षकों और कर्मचारियों ने छात्रों को घर से लाने और ले जाने की सुविधा मुहैया कराने के लिए वाहनों की व्यवस्था की। श्री मिश्रा ने बताया कि जब शिक्षकों और कर्मचारियों ने विद्यालय का खर्च उठाना प्रारम्भ किया तो प्रबंधक ने दिनांक 4 मई २013 को विद्यालय को जर्जर बताकर  गिराये जाने के लिए शासन को पत्र प्रेषित किया। जब शासन ने प्रबंधक के पत्र पर उनके पक्ष में कोई आदेश नहीं दिया तो प्रबंधक ने लखनऊ एजुकेशन सोसाइटी की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका और बाद में अवमानना याचिका दायर की। जिस पर प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा मनोज कुमार सिंह ने दिनांक 21 अगस्त 2014 को निर्णय दिया। जिसमें विद्यालय के भवन को जर्जर भवन बताकर विद्यालय की भूमि को हड़पने के प्रयास पर रोक लगाते हुए प्रबंधतंत्र को एक-एक कक्ष की मरम्मत कराने का आदेश दिया गया। किन्तु प्रबंधक द्वारा आज तक उक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। विद्यालय के प्रबंधक द्वारा उच्च न्यायालय और प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा तथा मुख्य अभियन्ता नगर निगम के आदेश को छुपाकर अब पुलिस और जिला प्रशासन से साठगांठ करके उक्त विद्यालय के भवन को जर्जर बताकर ध्वस्त कराने का प्रयास किया जा रहा है ताकि विद्यालय की भूमि को अनैतिक तरीके से बेचा जा सके। श्री मिश्रा ने बताया कि उक्त विद्यालय के प्रबंधक की इस प्रकार की अनैतिक कार्यप्रणाली के खिलाफ संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के संयुक्त सहयोग से उक्त विद्यालय के मुख्य द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया जायेगा। श्री मिश्रा ने बताया कि जिस प्रकार लखनऊ इण्टर कालेज के प्रबंधक द्वारा विद्यालय की भूमि को अनैतिक तरीके से हथियाने और विक्रय करने का षणयंत्र रचा गया है। ठीक इसी प्रकार खुनखुन जी गल्र्स इण्टर कालेज के भवन को भी लीज पर देकर विद्यालय के भवन को विद्यालय के प्रबंधक और भवन मालिक शिव नारायण अग्रवाल द्वारा संयुक्त रूप से हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। श्री मिश्रा ने बताया कि खुनखुन जी गल्र्स इण्टर कालेज के भवन का मरम्मत कराने के संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य के पत्र पर मकान मालिक द्वारा अनुमति नहीं दी जा रही है और अब नगर निगम से ध्वस्तीकरण संबंधी नोटिस जारी करायी गई। जिस पर नगर निगम के मेयर द्वारा नगर आयुक्त को जांच कर नोटिस वापस लेने का आदेश दिया गया है। श्री मिश्रा ने बताया कि शिक्षा अधिकारी से लखनऊ जनपद के अनेक विद्यालयों की भूमि एवं भवन का उ.प्र. शैक्षिक संस्थाएं आस्तियों का अपव्यय निवारण अधिनियम 1974 का उल्लंघन किये जाने की शिकायतें की गई थी। मगर शिक्षा अधिकारी ने योगेश्वर ऋषिकुल इण्टर कालेज को छोड़कर किसी भी विद्यालय प्रबंधतंत्र पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। श्री मिश्रा ने बताया कि उपरोक्त मामलों के अतिरिक्त भी शिक्षा अधिकारी से बप्पा श्रीनारायण वोकेशनल इण्टर कालेज के सांसद एवं विधायक निधि से निर्मित आडिटोरियम के व्यवसायिक इस्तेमाल तथा विद्यालय के शिक्षक आवास एवं एग्रीकल्चर विभाग  की भूमि एवं भवन को अवैध तरीके से डिग्री कालेज को सौंपने की भी शिकायत की गई थी। यशोदा रस्तोगी गल्र्स इण्टर कालेज के खेल के मैदान को प्रबंधक द्वारा ट्रस्ट को सौंपकर उसका व्यवसायिक उपयोग किये जाने की शिकायत की गई थी। स्वतंत्र इण्टर कालेज आलमबाग की भूमि को बिल्डर को बेच दिया गया। जिसकी शिकायत शिक्षा अधिकारी से की गई। मगर इस संबंध में शिक्षा अधिकारी ने कोई कार्यवाही नहीं की। इसी प्रकार रामधीन सिंह इण्टर कालेज के खेल के मैदान में मार्केटिंग काम्पलेक्स, गेस्ट हाउस तथा मैरिज हाल एवं विद्यालय के हाल में गेस्ट हाउस बनाकर उसके व्यवसायिक उपयोग की शिकायतें की गई थी। बाबा ठाकुरदास इण्टर कालेज की भूमि एवं भवन का एक दूसरे विद्यालय दादा ठाकुरदास को हस्तान्तरण करने की शिकायत की गई। दयानन्द गल्र्स इण्टर कालेज के खेल के मैदान को एक निजी विद्यालय को सौंपने की शिकायत की गई थी। नवयुग कन्या विद्यालय की भूमि एवं भवन तथा आडिटोरियम पर नवयुग रेडियन्स का अवैध कब्जा है। विद्यालय की अधिकांश भूमि एवं भवन को अवैध तरीके से डिग्री कालेज को सौंपने की शिकायत की गई है। मगर उसके बावजूद भी आज तक शिक्षा अधिकारी द्वारा इस मसले पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। श्री मिश्रा ने बताया कि महिला इण्टर कालेज की भूमि एवं भवन के अधिकांश भाग को डिग्री कालेज को सौंप को दिया गया है। लालबाग गल्र्स इण्टर कालेज की भूमि एवं भवन का अनैतिक तरीके विक्रय कर दिया गया है। मुमताज इण्टर कालेज, डीएवी इण्टर कालेज, इस्लामियां इण्टर कालेज, राम पाल त्रिवेदी इण्टर कालेज गोसाईगंज, बक्शी का तालाब इण्टर कालेज, राम भरोसे मैकूलाल इण्टर कालेज, जगन्नाथ प्रसाद साहू इण्टर कालेज आदि अनेकों विद्यालयों की भूमि और भवनों  का अनैतिक तरीके से उपयोग करने, विक्रय करने, कब्जा करने की शिकायतें संघ ने की थी। मगर आज तक शिक्षा अधिकारी ने एक भी मामले में कोई कार्यवाही नहीं की। श्री मिश्रा ने चेतावनी देते हुए कहाकि संघ द्वारा इन मामलों की शिकायतें पुन: जिलाधिकारी एवं शिक्षा अधिकारी के समक्ष आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की जायेगी। कार्यवाही नहीं होने पर जनपद स्तरीय व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जायेगा। 

 

 

 

 

11
November

कब जागेगा पर्यटन विभाग, कब सील होगा फोनिक्स लॉन एंड बैंक्वेट

मैनफोर्स

लखनऊ। राजधानी में खुलेआम सराय एक्ट की धज्जिया उड़ाई जा रही है, और प्रशासन खामोश होकर तमाशा देख रहा है। राजधानी में करीब यहां चार सौ अधिक होटल, गेस्ट हाउस और लॉज हैं। जिसमें  से कुछ ही सराय एक्ट के तहत पंजीकृत हैं। जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग को भी गैर पंजीकृत होटल और गेस्ट हाउस का पता है। मगर सभी अपनी ऊपर की कमाई के लोभ के खातिर अपनी आंखों पर पट्टी बांधे हुए है। यात्रियों के ठहरने के लिए बनाए गए इन व्यवसायिक भवनों, धर्मशालाओं, गेस्ट हाउसों, होटलों लॉज, मैरिज हालों,  प्रीत भोज स्थलों आदि का सराय एक्ट 1867 के तहत पंजीकरण करना आवश्यक होता है। पंजीकरण के लिए इन प्रतिष्ठानों के संचालकों को निर्धारित मानक पूरे करने अनिवार्य होते है। जैसे स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, प्रदूषण विभाग, अग्निशमन विभाग, विद्युत विभाग आदि सहित कई सरकारी संस्थओं से अनापत्ति प्रमाण सहित अन्य आवश्यक अनुमति प्राप्त करनी होती है। इन सभी विभागों में सबसे महत्तवपूर्र्ण जिम्मेदारी पर्यटन विभाग की होती है। मगर अधिसंख्यकों के पास सराय एक्ट के तहत पंजीकरण प्रमाण पत्र ही नहीं है। ऐसे में ये व्यवसायिक भवन किसकी अनुमति से चल रहे है ? यह सबसे अहम सवाल है। इन व्यवसायिक भवनों से अपरोक्ष लाभ किन-किन विभागोंं के आलाधिकारियों द्वारा अनैतिक तरीके से अर्जित किया जा रहा है ? यह भी एक जांच का गंभीर विषय है। राजधानी में कई दर्जन होटल, लॉज, मैरिज हाल, प्रीत भोज स्थल और गेस्ट हाउस अवैध संचालित हो रहे है। राजधानी के आलमबाग क्षेत्र में भी इसी प्रकार एक प्रीति भोज स्थल जिसका नाम फोनिक्स बैनक्वीट हाल है। यह भी अवैध रूप से संचालित हो रहा है। इस बैनक्वीट हाल का संचालन पर्यटन विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण, स्वास्थ्य, आग्निशमन विभाग व क्षेत्रीय पुलिस के संरक्षण मे अनैतिक रूप से हो रहा है। मगर सभी जानबूझकर खामोश है। कारण यह है कि इसके संचालन से होने वाले लाभ में सभी की अनैतिक कमाई का एक माध्यम बंध हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फोनिक्स बैनक्वीट हाल की वार्षिक बुकिंग लगभग पचास लाख से पचहत्तर लाख रूपये का है। मगर इसके बावजूद भी सरकार को राजस्व का ढेला भर भी लाभ नहीं हो पा रहा है। उपरोक्त सभी विभागों के अधिकारियों और फोनिक्स बैनक्वीट हाल के संचालक की सांठगाठ की देन है कि सरकार को फोनिक्स बैनक्वीट हाल का संचालक खुलेआम वर्ष 2013 से लाखों रूपये का का चूना लगा रहा है और जिम्मेदार खामोश होकर तमाशा देख रहे है। नियमानुसार बगैर पंजीकरण के होटल, गेस्ट हाउस, लॉज, मैरिज हाल, प्रीत भोज स्थल आदि का संचालन किया जाना अपराधिक कृत्य माना जाता है। मगर आज तक जिम्मेदार विभागों द्वारा फोनिक्स बैनक्वीट हाल के संचालक के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि नियमानुसार होटलों, गेस्ट हाउसों, लॉजो, मैरिज हाला आदि व्यवसायिक भवनों के संचालन में सरकार को किराये का पांच प्रतिशत टैक्स देना अनिवार्य होता है। मगर बगैर पंजीकरण कराये ही विभागीय अधिकारियों से सांठगाठ होटल संचालकों द्वारा खुलेआम राजस्व की चोरी की जा रही है। फोनिक्स बैनक्वीट हाल का संचालक न केवल बिना पंजीकरण और टैक्स चुकाये बगैर हाल का संचालन कर रहा है बल्कि कृषि योग्य भूमि पर अनैतिक तरीके से इस व्यवसायिक भवन को खड़ाकर व्यवसायिक इस्तेमाल कर रहा है। सूत्रों की माने तो फोनिक्स बैनक्वीट हाल के संचालक विजय अरोड़ा के पुत्र अमित अरोड़ा हैं। विजय अरोड़ा ने अपने शातिराना दिमाग का इस्तेमाल करते हुए एनजीओ का संचालन प्रारंभ किया था। किसी को कानो कान खबर भी न हुई थी कि एनजीओ की आड़ में अनैतिक कार्य भी इनके द्वारा संपादित किये जाते रहे है। जैसे चिट फं ड कंपनी चलाना, जमीनों पर अवैध कब्जे करना आदि इस प्रकार के अनैतिक कार्य संपादित किये गये। हालकि समाचार पत्र ऐसे आरोपों की पुष्टि नहीं करता है। फि लहाल यह सब जांच का विषय है। अगर किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा लगभग वर्ष 2000 के आस-पास से जांच करायी जाये तो लखनऊ से दिल्ली तक इनके कारनामों का चिट्ठा परत दर परत खुलता जायेगा। फिलहाल विजय अरोड़ा जिस फोनिक्स बैनक्वीट हाल का संचालन कर रहे है। दरअसल फोनिक्स हाल बैनक्वीट हाल की जमीन जिसका खसरा संख्या 455 स है। जिसका क्षेत्रफल 0.1700 है। उक्त जमीन ग्राम बरगवां परगना बिजनौर तहसील सरोजनीनगर जनपद लखनऊ फसली वर्ष 1421-1426 खाता संख्या 00210 पर दर्ज है। जिसके स्वामी क्रमश: चन्द्र प्रकाश लाल, चेतन प्रकाश लाल, कुन्दल लाल पुत्र सुन्दरलाल निवासी फतेहगंज शहर लखनऊ है। मगर विजय अरोड़ा अपने तिकड़मी दिमाग से साजिश रचकर उक्त स्वामियों की जमीन पर फोनिक्स बैनक्वीट हाल खड़ा करा दिये है। जिसकी जमीन है, वह व्यक्ति अपना कब्जा पाने के लिए तमाम हाथ पैर मार रहा है। मगर वह इनके चंगुल से निकल नहीं पा रहा है। फोनिक्स बैनक्वीट हाल का का निर्माण जिस उपरोक्त भूमि पर हुआ है, उसका कुल एरिया लगभग 34000 स्क्वायर फिट है। जिसमें से लगभग 17000 स्क्वायर फि ट जमीन चन्द्र प्रकाश लाल, चेतन प्रकाश लाल, कुन्दल लाल पुत्र सुन्दरलाल निवासी फतेहगंज शहर लखनऊ की है। जो कृषि योग्य भूमि के रूप में आज भी अभिलेखों में दर्ज है। ऐसी भूमि पर खुलेआम व्यवासियक इस्तेमाल किया जा रहा है। फिर प्रशासन खामोश है। अर्थात दाल में कुछ काला अवश्य है।

 

 

 

14
October

चिकित्सा व्यवसाय ही नहीं बल्कि आम आवाम के प्रति जिम्मेदारी भी डा. अमजदुल हक खान

लखनऊ। राजधानी के अर्जुन गंज स्थित आर्थो न्यूरो फिजियोथेरेपी क्लीनिक में डा. अमजदुल हक खान के नेतृत्व में दो दिवसीय नि:शुल्क फिजियोथेरेपी चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इस चिकित्सा शिविर का उद्दघाटन सतर्कता अधिष्ठान से सेवानिवृत्ति अधिकारी एजाजुल हक खान और सामाजिक कार्यकर्ता धरमानन्द यादव ने किया। इस शिविर में डा. अमजदुल हक खान की नेतृत्व में डा. देवेन्द्र विश्वकर्मा एवं नर्सिंग स्टाफ अजीत कुमार यादव ने सैकडों रोगियों के जोडों के दर्द, घुटने में दर्द की समस्या, कंधा जाम की समस्या, गर्दन में जकडन, फालिज की गंभीर बीमारियों का इलाज फिजियोथेरेपी के माध्यम से किया गया। इस अवसर पर डा. अमजदुल हक ने विचार व्यक्त करते हुए कहाकि यूं तो वर्तमान में चिकित्सा पद्धति को चिकित्सकों द्वारा व्यवसाय का रूप दे दिया गया है। मगर वर्तमान में चिकित्सकों के लिए व्यवसाय के अतिरिक्त भी कुछ सामाजिक जिम्मेदारियां है। जिसे चिकित्सकों को व्यवसाय के साथ—साथ आम आवाम के कल्याण करने के लिए दृष्टि से भी चिकित्सा पद्धति इस्तेमाल करना चाहिए। इससे ने केवल चिकित्सकों की सामाजिक प्रतिष्ठा में ख्याति प्राप्ति होगी बल्कि एक सामाजिक कल्याण का कार्य भी संपादित हो जायेगा। डा. अमजदुल हक ने कहाकि हम लोगों ने इस शिविर में स्वयं की सार्मथ्य के अनुसार कुछ दवाओं का भी नि:शुल्क वितरण किया है। उन्होंने कहाकि इस प्रकार के स्वाथ्य शिविर उनके द्वारा हमेशा समय—समय पर लगाये जाते है।   

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