26
March

टाटा साल्ट को एक हजार करोड़ की निविदा देने की तैयारी

भ्रष्टाचार के दीमक के रूप में राज्य कर्मचारी कल्याण निगम को खोखला कर रहा  ईडी

मैनफोर्स

लखनऊ। यूं तो मैनफोर्स समाचार पत्र द्वारा अपने प्रत्येक अंक में उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी महकमों के भ्रष्टाचार से संबंधित समाचार क्रमवार प्रकाशित किया जाता है। मगर इस बार समाचार पत्र ऐसे सरकारी महकमें में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल उजागर करने जा रहा है। जो खुद अपने ही कर्मचारियों को आपूर्ति किये जाने वाले खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता में हेरफेर कर भ्रष्टाचार के नये-नये कीर्तिमान बना रहा है। आपको बता दें कि यह सरकारी महकमा कोई और नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम है। जिसमें कंधे पर उत्तर प्रदेश के राज्य कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्रियों के साथ अन्य रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराना है। मगर इसके जिम्मेदार अधिकारी स्वयं की स्वार्थ पूर्ति के लिए राज्य के कर्मचारियों की सेहत को दांव पर लगा रहे है। कहते है कि डायन भी एक घर छोड़कर अपना शिकार करती है। मगर उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी निगम स्वयं के ही राज्य के कर्मचारियों को अपने स्वार्थ का शिकार बना रहा है और गुणवत्ता विहीन सामग्रियों की आपूर्ति कर राज्य कर्मियों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। कैसे खिलावाड़ कर रहा है। इसे क्रमश: अग्रलिखित रूप में अवलोकन करने का पाठकगण कष्ट करें:- आपको बता दें कि आयोडीनयुक्त नमक की आपूर्ति के लिये उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा निकाली गई एक हजार करोड़ की निविदा निकाली गई। यह निविदा गुजरात की एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए निकाली गई थी। उक्त कंपनी के लिए विभाग के आकाओं ने निविदा के नियमों में परिवर्तन भी किया। उक्त कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए विभाग के भ्रष्टाचारी कर्णधारों ने शुरू से ही साजिश रची। आपको बता दें कि उक्त कम्पनी को लाभ पहुंचाने के लिए शासन और सरकार के दबाब मे उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के ईडी अशोक श्रीवास्तव ने निविदा को भले ही नियमों का सरलीकरण कर दिया हो। मगर काम उसी गुजरात की कम्पनी को दिया गया। जिसके कहने पर पूर्व मे निविदा को काफी जटिल बना दिया गया था। इसके लिये कर्मचारी कल्याण निगम निविदा के टेक्निकल नियम की आड लेगा। ज्ञात हो कि निविदा मे भाग लेने वाले सभी कम्पनियो के टेन्डर बीड खुलने के बाद टेक्निकल बीड मे पास होना जरूरी होता है। जब टेक्निकल बीड मे उक्त कम्पनी सफल तभी होगी। जब उन कम्पनियो को फाइनेन्सियल बीड के लिये बुलाया जाये। सूत्रो की माने तो टेक्निकल बीड में योग्य होने के बाद भी तीन कम्पनी को छोड़कर भाग ले रही सभी कम्पनियो को अयोग्य घोषित करने की साजिश रची जा रही है। जो तीन कम्पनिया टेक्निकल बीड मे पास होगी उसमे से एक गुजरात की वह कम्पनी होगी। जिसको आयोडिन नमक की आपूर्ति देने के लिये कर्मचारी कल्याण निगम ने निविदा के नियमों और शर्तो को जटिल किया था। शेष दो कम्पनिया इसी गुजरात वाले कम्पनी की डमी कम्पनिया है। ऐसा सूत्रों से जानकारी मिली है। हो सकता है समाचार प्रकाशन के बाद उक्त कंपनियों के साथ-साथ कुछ अन्य कंपनियों को भी शामिल कर दिया।इस प्रकार कम दर के बाद गुजरात की उसी कम्पनी जिसके नमक का प्रचार सिने अभिनेत्री करती है। उसे 1000 हजार करोड के नमक आपूर्ति का काम एक साजिश के तहत सौंपे जाने की योजना है। इस प्रकार यह कहने में लेसा मात्र भी हिचक नहीं होगा कि टेक्निकल बीड के सहारे कर्मचारी कल्याण निगम गुजरात की उपरोक्त कम्पनी को भ्रष्टाचार की बैतरणी पार कराने में कोई कसर छोड़ेगा। इस बात का अंदेशा होते ही कुछ कम्पनियां जिन्हें यह महसूस हो रहा है कि उन्हें उनको टेक्निकल बीड मे सही होते हुए भी अयोग्य करार दे दी जायेगा। वे उन्होने मुख्यमंत्री को एक प्रत्यावेदन देकर मांग कर रही है कि सभी कम्पनियो के नमक की जांच प्रदेश सरकार के अलीगंज स्थित सरकारी लैब में न कराकर देश की किसी तीन बड़ी प्रतिष्ठित लैबों में कराया जाये। जिससे सम्पूर्ण साजिश और आयोजित किये जाने वाले भ्रष्टाचार का दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इधर कर्मचारी कल्याण निगम के ईडी अशोक श्रीवास्तव को हटाने के लिये सिवालखास मेरठ के विधायक जितेन्द्र सतवई द्वारा भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया था। जिस पर जांच भी शुरू हो गयी है। विधायक जितेन्द्र सतवई ने कर्मचारी कल्याण निगम के ईडी अशोक श्रीवास्तव पर भष्ट्राचार का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा आयोडीनयुक्त नमक की आपूर्ति के लिये निकाली गई निविदा के नियम और शर्तो पर शासन ने भी संज्ञान लिया। जिसे देखते हुये कर्मचारी कल्याण निगम के ईडी ने 20 नवंबर २018 को प्री बिड मीटिंग बुलाई। इस बैठक में उन नमक कम्पनियो को भी न्यौता भेजा गया है, जो इस निविदा में भाग तो लेना चाहती है। मगर उनको निविदा के कुछ नियमो पर आपत्ति है। इस निविदा पर पहले ही पतंजली, गोयल साल्ट और ब्राइब्रेन्ट ने आपत्ति दर्ज करा दी है। इस मामले को इन तीनो कम्पनी के लोगो ने पहले ही मुख्यमंत्री और मंत्री से मिलकर शिकायती पत्र सौंप दिया था। इन कम्पनियो ने इस निविदा पर सवाल उठाते हुए पूर्व में यह स्पष्ट कर दिया था कि उपरोक्त निविदा किसी खास कम्पनी को लाभ पहुंचाने के लिये बनाया गया है। पत्र मे सभी लोगो ने निविदा विवरण पुस्तिका के पेज नम्बर तीन के क्रमांक 4 पर आपत्ति दर्ज करायी है। जिसमें 60 करोड़ कम्पनी का एकल टर्न ओवर और सरकारी विभाग में आपूर्ति के अनुभव को प्राथमिकता देने की बात कही गयी है। अब देखना यह है कि ज्यादातर कम्पनियो के आपत्ति के बाद निविदा के नियम में कुछ परिवर्तन होगा या नहीं ? यह तो समय बतायेगा। मगर एक बात स्पष्ट कर दूं कि नियम सरल नहीं हुए तो एक बात तो सुनिश्चित है कि सरकार को लगभग 500 करोड़ का घाटा अवश्य लगेगा। पतंजली, गोयल साल्ट और ब्राइब्रेन्ट के अधिकारियो ने मुख्यमंत्री और मंत्री से मिलकर केकेएन द्वारा निकाली गयी आयोडीनयुक्त नमक के निविदा पर उठाये सवाल पर कहा कि किसी खास कम्पनी को फायदा पहुंचाने के लिये ये सभी साजिशें की गई है। इन कम्पनियो ने कहा कि निविदा को इतना कठिन बनाया गया है कि तीन चार कम्पनियो को छोड़कर इसमे कोई और भाग नहीं ले पायेगी। जिससे पूर्ण रूप से प्रतिस्पर्धा नहीं हो पायेगी। सभी कम्पनियो ने पत्र मे कहा कि यदि ऐसा हुआ तो प्रदेश सरकार को कम से कम 500 करोड़ रूपये का नुकसान उठाना पड सकता है। इन कम्पनियो ने कहा कि भष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए निविदा के बिन्दुओ में ऐसी-ऐसी बात रखी गयी है। जो कर्मचारी कल्याण निगम के 2016 के डीएफ एस के निविदा में भी नहीं थे। इन सभी कम्पनियो ने निविदा के नियमो को सरल करने की बात कहते हुए कहा कि ज्यादा से ज्यादा कम्पनी अगर भाग लेती है तो सरकार को कम कीमत पर आयोडीन युक्त नमक प्राप्त हो सकता है। इन कम्पनियो ने कहा कि यदि वर्तमान निविदा को 2016 के निविदा के अनुसार भी बनाया गया होता तो ठीक होता। मगर निविदा की ड्राफ्टिंग देखकर यह स्पष्ट हो गया है कि उपरोक्त निविदा एक खास कम्पनी को ध्यान मे रखकर बनाया गया हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक तरफ  जहां मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दे दिए है। वही दूसरी तरफ  विभागीय मंत्री अतुल गर्ग ने भी जांच करने और निविदा को नियम-कानून को ध्यान मे रखकर सरल बनाने की बात ई.डी. कर्मचारी कल्याण निगम से कही है। विभागीय मंत्री अतुल गर्ग का कहना है कि जब किसी निविदा मे ज्यादा लोग प्रतिभाग करेगे तो निश्चित तौर पर सामान के दाम की वैल्यू कम होगी। जिससे सरकार को फायदा होगा। गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम 65 जनपदों में आयोडीनयुक्त नमक की आपूर्ति के लिये एक निविदा 7 नवम्बर को निकाला था। जिसकी अन्तिम तिथि 27 नवम्बर थी। लगभग एक हजार करोड के इस काम को पाने के लिए देश की जानी मानी एक नमक कम्पनी जिसका प्रचार देश की जानी मानी एक अभिनेत्री करती है (टाटा साल्ट) ने साम, दाम, दण्ड, भेद सारे हथियार इस्तेमाल कर इस निविदा को हथियाना चाहती है। इसी कम्पनी के इशारे पर इस साल की निविदा विवरण पुस्तिका में पेज नम्बर तीन के क्रमांक 4 में ऐसा हेर फेर किया गया है कि देश की चार-पांच कम्पनियो को छोड़ कोई कम्पनी इसमे भाग नहीं ले सके। सूत्रो की माने तो नमक की इस कम्पनी के नाते रिश्तेदारो को मिला लिया जाये तो इसकी खुद चार कम्पनी हो जायेगी। इस कम्पनी ने इसके पूर्व 2016 में अपने तीन छुपी हुई कम्पनियो के साथ डबल फोर्टिफाइड साल्ट के निविदा में भाग लिया था। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम ने आयोडीनयुक्त नमक की आपूर्ति के लिए निकाली गई निविदा के नियम और शर्तो को एक खास कम्पनी को फायदा पहुंचाने के लिए इतने कठिन बना दिये है कि इसमे कोई भाग ही नहीं ले सकता। इस निविदा में भाग न ले पाने के कारण सरकार को मजबूरी में उस कम्पनी को उपरोक्त ठेका देने के लिए विवश होना पड़ेगा, जिसके लिए पूरे निविदा में हेर-फेर किया गया है। ऐसा हो गया तो सरकार को कम से कम पांच सौ करोड़ का चूना लग सकता है। ऐसा इसलिये कि निविदा के नियम के हिसाब से वही कम्पनी जिसके लिए निविदा बनायी गयी है। वही योग्य होगी। जो रेट वह कोड करेगी जैसा कि कर्मचारी कल्याण निगम ने 9 रूपये प्रति किलो रेट तय किया है। नियमत: उसे उस रेट में आयोडीन युक्त नमक का ठेका देना होगा। यहां जानकारी के लिए बता दूं कि अन्य प्रदेशों में आयोडीन युक्त नमक 5 से 6 रूपये प्रति किलो कम्पनियो द्वारा आपूर्ति की जा रही है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम 65 जनपदों में आयोडीनयुक्त नमक की आपूर्ति के लिए एक निविदा 7 नवम्बर को निकाला था। जिसकी अन्तिम तिथि 27 नवम्बर थी। लगभग एक हजार करोड़ के इस काम को पाने के लिये देश की जानी मानी एक नमक कम्पनी ने (टाटा साल्ट) प्रदेश सरकार, खाद एव रसद विभाग और कर्मचारी कल्याण निगम पर अपना ऐसा एकाधिकार स्थापित किया कि अब उसके नुमाईन्दों से मशविरा कर निविदा के नियमो को बनाया गया। सूत्रो की माने तो इस बार की जो निविदा पुस्तिका तैयार की गयी है। उसमें वह कम्पनी जिसको 65 जिलो में लगभग 1 हजार करोड के आयोडीन युक्त नमक की आपूर्ति का काम देना है, उसके इशारे पर तैयार की गयी है। ऐसा इसलिये कि प्रतिस्पर्धा में कम लोग आये और वह कम्पनी जिसको उपरोक्त काम को देने का मन कर्मचारी कल्याण निगम ने बना लिया है। उसको उक्त निविदा के माध्यम से बगैर प्रतिस्पर्धा के कार्य दिया जा सके। इस संबन्ध मे जब कर्मचारी कल्याण निगम के ई.डी. ए.के. श्रीवास्तव से 60 करोड के टर्न ओवर की बात पूछने और 2016 के उन्ही के विभाग के टेन्डर नियम मे 30 करोड टर्नओवर की बात याद दिलायी गयी तो उन्होने कहा कि उस वक्त 10 जिलो मे नमक की आपूर्ति होनी थी, इसलिए 30 करोड़ रखा गया था। उन्होंने कहा कि अब 65 जिलो मे आपूर्ति हो रही है। इसलिए 60 करोड़ टर्नओवर रखा गया है। यदि ई.डी. ए.के. श्रीवास्तव की बात मान ले तो 10 जिलो मे 30 करोड़ का टर्नओवर तो उस हिसाब 10 जिले बराबर 30 करोड़ तो 65 जिलो मे नमक आपूर्ति के लिये तो 195 करोड़ का टर्न ओवर होना चाहिए, जो कि नही किया गया। अर्थात जब सारे नियमो को कानून मुताबिक बनाया गया तो फिर उपरोक्त निविदा पर अंगुली क्यों उठ रही है ? यह सबसे बड़ा सवाल है। किसी भी समाचार पत्र में उपरोक्त निविदा को प्रकाशित न करवाना भी उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम की कार्यप्रणाली का पर्दाफाश करने के लिए पर्याप्त है।

मंत्री ने निविदा पर उठाया सवाल, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा आयोडीनयुक्त नमक की आपूर्ति के लिए निकाली गई निविदा के नियम और शर्तो पर विभागीय मंत्री अतुल गर्ग ने भी सवाल उठाया है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यंत्री को भी पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने उल्लेख किया है कि कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा निकाले गये आयोडीन युक्त नमक की निविदा मे कई खामियां है। जिसको सही नहीं किया गया। जिससे निविदा में प्रतिभागी करने के लिए प्रतिभागियों की संख्या में काफी गिरावट होगी। जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी और प्रतियोगिता प्रोत्साहित होने की बजाय हतोत्साहित होगी। यदि ऐसा होता है तो सरकार को भारी नुकसान हो सकता है। उपरोक्त पत्र में विभागीग मंत्री ने निविदा में कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा 60 करोड़ के मांगे गए टर्नओवर पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा करने से कुुछ खास कंपनिया ही निविदा के मानको पर खरी उतरेगी। जबकि बहुतायत संख्या में व्यापारी इससे वंचित हो जायेगे। विभागीय मंत्री अतुल गर्ग ने निविदा में एकल टर्नओवर और सरकारी विभाग मे सप्लाई वाले कम्पनी को प्राथमिकता देने वाले शर्त पर भी सवालियां निशाान लगाया। उन्होने मुख्यमन्मंत्री को भेजे गये पत्र की प्रति को प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद को भेज कर सरल निविदा को नियमों को सरल बनाने के लिए निर्देश दिया। जो नियम विभाग द्वारा पहले के निविदाओ में थे। वैसे ही नियमों का अनुपालन कराने की अपेक्षा की। विभागीय मंत्री द्वारा मुख्यममंत्री को लिखे गए पत्र की लिखावट से यह निर्धारित हो गया है कि 1000 करोड के इस नमक आपूर्ति की निविदा की जानकारी कर्मचारी कल्याण निगम के अधिकारियो ने मंत्री महोदय से छिपायी थी। निविदा की जानकारी विभागीय मंत्री अतुल गर्ग से कर्मचारी कल्याण निगम ने क्यों छिपाई ? यह अपने आप में एक गंभीर सवाल है। नियमानुसार इस प्रकार की कार्यशैली को अंजाम देने वाले अधिकारियों की जांच होनी चाहिए। सूत्रों की माने तो कर्मचारी कल्याण निगम विभाग मे होने वाले किसी भी गतिविधियो की जानकारी विभागिय मंत्री को नहीं देता है। आपको बता दें कि जब कर्मचारी कल्याण निगम के ई.डी. ए.के. श्रीवास्तव से जानकारी ली गर्ईकि चार जोन मे बटे 65 जिलो के लगभग 3 करोड कार्ड धारको को प्रत्येक महीने कितना नमक मिलेगा ? मगर अफसोस कि उन्हें इस बात की जानकारी नही थी। जबकि 2016 के कर्मचारी कल्याण निगम निविदा के पेज चार के क्रमांक 4 पर यह बात स्पष्ट उल्लेखित था 60 हजार मीट्रिक टन वार्षिक नमक की आवश्यकता है। इस हिसाब से 2018 की निविदा पुस्तिका मे 65 जिलो मे 39 लाख मीट्रिक टन वार्षिक नमक की आवश्यकता की बात लिखी जानी चाहिए थी। मगर ऐसा स्पष्ट नहीं किया गया है। इस तथ्य को इस बार निविदा में छुपया क्यों गया ? इस बात की निविदा में उल्लेख नहीं करने से यह स्पष्ट हो गया कि उक्त नमक कम्पनी के हिसाब से बाद मे सप्लाई बढ़ाकर कार्डधारको को नमक लेने के लिए विवश किया जाता ताकि आसानी से कम्पनी को फायदा पहुंचाया जा सके। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा आयोडीनयुक्त नमक की आपूर्ति के लिए निकाले गये एक हजार करोड़ की निविदा पुस्तिका में बहुत सारे परिवर्तन किये गये। जो पूर्णत: नाजायज तरीके से गुजराज की उपरोक्त खास कम्पनी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था। निविदा के नियमो का सरलीकरण करने से कई कम्पनियो को टेन्डर मे भाग लेने की उम्मीद बढ़ सकती थी। जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और जनता को सस्ते दाम पर नमक मिलने उम्मीद थी। इस निविदा पुस्तिका अभी भी कितना मीट्रिक टन नमक चारो जोन मे देना है। उसको छुपाकर रखा गया है। जबकि यह बात का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए था। प्रत्येक जोन में लाखो कार्ड धारक है। जिन्हें हर महीने एक किलो नमक खरीदना या दो किलो ? इस बात को निविदा पुस्तिका में छुपा कर रखा गया है। ऐसा इसलिए ताकि व्यापारी को फायदा पहुंचाने के लिए राशन दुकानदार के माध्यम से जनता पर दबाब बनाया जा सके। चूंकि कार्ड धारको को चावल और गेहूं भी लेना होता है। इसलिये वह हर हाल मे राशन दुकानदार के कहे अनुसार चलेगा।  सूत्र बताते है कि निविदा को कितना भी सरल क्यों  न बना दिया गया हो? इसके बावजूद भी यह निविदा उसी गुजरात की कम्पनी को सौंपी जायेगी। जिससे लिए सारा खेल खेला गया है। 

नमक का ठेका हथियाने के लिए दो दुश्मन कम्पनियों ने किया समझौता 

उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा आयोडीन युक्त नमक की आपूर्ति के लिए निकाले गये एक हजार करोड के नमक का ठेका हथियाने और इस निविदा से राजस्थान की नमक कम्पनियो को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए गुजरात की दो दुश्मन नमक कम्पनियो ने समझौता किया। इस समझौते में दोनो कम्पनियो के बीच 65 जनपदों में बंटे चार जोन को दो-दो जोन मे बांटे जाने की बात सामने आई है। इस समझौते के तहत दोनो कम्पनियो के अधिकारी साम, दाम, दण्ड, भेद का इस्तेमाल करके राजस्थान सहित सभी कम्पनियो को इस निविदा से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए संगठित रहे। उसके बाद गुजरात की दोनों कम्पनिया नमक की कीमत एक रखेगी। जिससे जब निविदा का फायनेन्सिल बीड खुले तो एक कीमत होने की वजह से दोनों कम्पनिया बराबर-बराबर काम पा सके। कर्मचारी कल्याण निगम की मंशा भी यही रही। उसके चाहने वाली कम्पनी को काम मिले। भले ही इसके लिए दो दुश्मनो को दोस्त ही क्यों न बनाना पडे। यह बात उस निविदा के नियम के सरलीकरण होने के बाद प्रतिस्पर्धा बढने के बाद सामने आई। कर्मचारी कल्याण निगम को लगा कि गुजरात की उक्त कम्पनी जिसके लिए सारा प्लान तैयार किया जा रहा है। अगर उसको अकेले काम मिलेगा तो अंगुली उठेगी और मामला अदालत तक जा सकता है। जैसा कि वर्ष 2016 मे डबल फोर्टिफाइड नमक के मामले में हुआ था। अदालत और अन्य जांचो से बचने के लिए कर्मचारी कल्याण निगम के एक बडे अधिकारी ने इस प्लान पर काम करते हुए दोनो कम्पनियों के बीच मध्यस्थता करके सुलह कराया और दोनों कम्पनियो को निविदा के फाइनेन्सियल बीड में एक कीमत रखने की बात कही। हालाकि इस निविदा में सुलह करने वाली गुजरात की दूसरी कम्पनी पहले इस बार सुलह समझौते के लिए राजी नही थी। क्योंकि 2016 मे डबल फोर्टिफाइड नमक की निवदा के समय इस कम्पनी को प्रदेश के 10 जिलो मे बांटने वाली डबल फोर्टिफाइड नमक में पांच जनपदों में काम देने का वादा गुजरात की पहली कम्पनी ने किया था। मगर उस वक्त पहली कम्पनी ने उसके साथ वादा खिलाफ कर उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया। जबकि काम न पाने वाली गुजरात की यह कम्पनी 2016 मे डबल फोर्टिफाइड नमक के समय टेक्निकल बीड को पास करते हुए फायनेन्सियल बीड तक पहुंच गई। मगर फायनेन्सियल बीड मे इस कम्पनी से छल से ज्यादा कीमत भरवाकर पहली कम्पनी ने बाहर करवा दिया था। तब से यह कम्पनी अपना बदला लेने के लिए समय का इंतजार कर रही थी। मगर वह कम्पनी कुछ करती कि उससे पहले गुजरात की वह कम्पनी जिसके नमक का प्रचार एक फिल्मी हीरोईन करती है ने अपने पाले मे कर अन्य कम्पनियो के सारे प्लान को फेल कर दी। सूत्रो की माने तो 1 हजार करोड़ के इस नमक के ठेके को हथियाने के लिये गुजरात की इन दोनो कम्पनियो के बीच 33 और 32 जनपदों का बंटवारा होने की बात सामने आ रही है। इसके लिए इन दोनों कम्पनियो के प्रतिनिधियों द्वारा लखनऊ मे कैम्प कर अन्य समीकरणो को सांधने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए गुजरात की उक्त कम्पनी के लोग उस बात पर नजर रखे है और चाहते है कि नमक निविदा के नियमानुसार निविदा में भाग ले रही सभी कम्पनियो के फैक्ट्री विजिट मे लिए गये नमक के सैम्पल की जांच लखनऊ के अलीगंज स्थित सरकारी लैब मे हो, जो अन्य कम्पनिया नहीं चाहती है। निविदा में भाग ले रही अन्य सभी कम्पनियों ने पहले ही इस बात का संभावना जता दी थी कि यदि नमक के सैम्पल की जांच लखनऊ के अलीगंज स्थित सरकारी लैब मे होगी तो सिर्फ  वही नमक के सैम्पल पास होगे। जिसके लिए ऊपर से इशारा होगा और अन्य कम्पनियो के नमक सही होते हुए भी फेल कर दिए जाएंगे। लखनऊ के अलीगंज स्थित सरकारी लैब की जांच से डरी इन कम्पनियो ने इस बात की मांग की है कि नमक के सैम्पल की जांच लखनऊ के अलीगंज स्थित सरकारी लैब में न कराकर देश के किसी तीन बडे लैब मे कराये जाए। इधर दूसरी तरफ  राज्य कर्मचारी कल्याण निगम डिपो कर्मचारी संघ ने ईडी अशोक श्रीवास्तव द्वारा किये जा रहे भष्ट्राचार की जांच की मांग करते हुए एक पत्र मुख्यमंत्री को लिखा है। जिसमें पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि ईडी अशोक श्रीवास्तव के खिलाफ भष्ट्राचार सहित अन्य गम्भीर आरोपों की जांच कराकर उन्हें तत्काल पद से हटाया जाये।

करोड़ों के गबनकारी प्रभारी को बचा रहे ईडी 

उत्तर प्रदेश कर्मचारी कल्याण निगम के ईडी अशोक श्रीवास्तव उस कर्मचारी को बचा रहे है। जिसके ऊपर करोड़ो रूपये के गबन का आरोप लगा है। एक जांच मे यह खुलासा हुआ है कि आजमगढ, मऊ और बलिया के प्रभारी एच.एन. सिंह ने गेहूं खरीद मे लम्बी हेराफेरी करते हुए करीब 3 करोड रूपये का गबन किया है। जांच मे यह खुलासा हुआ है कि अकेले सिर्फ बलिया में प्रभारी एच.एन. सिंह ने एक लाख कुंतल गेहूं खरीदने का दावा किया। मगर वास्तविक खरीद 90 हजार कुन्तल की ही थी। जिसका खुलासा एफ सीआई के रसीद से हुआ। जिसमे लिखा है कि प्रभारी एच.एन. सिंह द्वारा उनके गोदाम मे सिर्फ 90 हजार कुन्तल गेहूं ही जमा करवाई गयी। अर्थात प्रभारी एच.एन. सिंह ने 10 हजार कुन्तल गेहूं की हेराफेरी कर उसका भुगतान लगभग 2 करोड रूपये अपने जेब मे डाल लिया। इस तरह  प्रभारी एच.एन. सिंह ने विभाग से एक लाख कुन्तल गेहूं का धनराशि मंगवाकर 90 हजार कुन्तल गेहूं का भुगतान किसानो को किया और बचे 10 हजार कुन्तल गेहूं की रकम वे स्वयं डकार गये। इतना ही नहीं एक और चौकाने वाली बात सामने आयी है। वो यह कि प्रभारी एच.एन. सिंह द्वारा करोड़ो रूपये की फर्जी खरीद दिखाकर जो भुगतान लिया जाता है। उसका हिस्सा ऊपर तक जाता है। यही कारण है कि प्रभारी एच.एन. सिंह जिसको अभी तक निलंबित हो जाना चाहिए था। वह ईडी के रहमोकरम पर अभी भी पूरे रूआब से काम कर रहा है। इसी तरह मऊ जनपद मे भी प्रभारी एच.एन. सिंह द्वारा गेहूं खरीद में हेराफेरी की बात जांच मे सामने आयी है। जहां पता चला है कि प्रभारी एच.एन. सिंह ने 1400 कुन्तल गेहूं की हेराफेरी कर लगभग 28 लाख की रकम डकार चुके है। जांच रिर्पोट में इतना सब खुलासा होने के बाद भी ईडी अशोक श्रीवास्तव ने प्रभारी एच.एन. सिंह के खिलाफ  अभी तक कोई कार्यवाही नही की। आपको बता दें कि प्रभारी एच.एन. सिंह के खिलाफ  लगातार मिल रही घोटालो की शिकायत पर मुख्यालय से एक टीम बनी। जिसमे जांच अधिकारी विजय वर्मा और अशोक तिवारी थे। इन लोगो ने सभी मामलो का खुलासा करते हुए अपनी जांच रिर्पोट ईडी अशोक श्रीवास्तव को कार्यवाही के लिए सौंप दी। मगर ईडी अशोक श्रीवास्तव उपरोक्त जांच रिर्पोट को अपने पास दबाकर बैठे हुए है। सूत्रो की माने तो तीनो जनपदों आजमगढ, मऊ और बलिया के सिर्फ  गेहूं खरीद की वास्तविक जांच करा ली जाए तो लगभग 10 करोड रूपये के घोटाले की बात सामने आयेगी। ईडी की एचएन सिंह पर मेहरबानी यही तक सीमित नहीं है। ईडी अशोक श्रीवास्तव ने एच.एन. सिंह को तीन-तीन जनपदों आजमगढ, मऊ और बलिया का प्रभारी भी बना रखा है। जबकि अन्य प्रभारियो को एक-एक जनपद का ही कमान सम्भालने के लिए दिया है। तीन-तीन जनपदों का प्रभार एक भ्रष्टाचारी अधिकारी को सौंपने के पीछें की मंशा को शायद अब पाठकगण भी समझ हो गये। अब पाठक भी समझ हो गये होगें कि प्रभारी एच.एन. सिंह के खिलाफ  घोटालो के इतने सारे सबूत होने के बाद भी ईडी अशोक श्रीवास्तव द्वारा कार्यवाही नहीं करने के पीछे मंशा क्या है ?

क्या ई.डी. के रहते निष्पक्ष निविदा संभव है ? 

उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा आयोडीन युक्त नमक की आपूर्ति के लिए निकाली गई निविदा तब तक निष्पक्ष तरीके से नहीं हो सकती। जब तक कि कर्मचारी कल्याण निगम के वर्तमान ईडी अशोक श्रीवास्तव विराजमान है।  आपको बता दें कि कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा आयोडीन युक्त नमक के लगभग 1000 करोड़ की निविदा के लिए निकाले गए निविदा विवरण पुस्तिका मे ऐसा कारनामा किया कि गुजरात की कम्पनी को आराम से फायदा पहुंचाया जा सके। साथ अन्य प्रदेशो की नमक कम्पनियां भी इसमे भाग न ले सके। इसके विरोध में कई कम्पनियों के अधिकारियों ने विभागी मंत्री सहित मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। सरकार और शासन की फ टकार के उपरान्त ईडी अशोक श्रीवास्तव ने सभी कम्पनियो को बुलाकर प्री बीड मीटिंग की और उन कम्पनियो के सुझाव मांगे। इस प्री बीड मीटिंग मे एक बात और खास रही कि जिस कम्पनी के लिए पूरी निविदा मैनेज की गई थी। न तो वह कम्पनी और न ही उस कम्पनी का कोई प्रतिनिधी इस प्री बीड मे आया। इससेे स्पष्ट होता है कि उक्त कम्पनी जिसके नमक का प्रचार एक अभिनेत्री करती है। उसको इस निविदा विवरण मे कोई सुझाव नहीं देना है। क्योकि उपरोक्त सारा काम उस कम्पनी के इशारे पर ही ईडी द्वारा किया जा रहा है। इस निविदा पुस्तिका मे कई बाते छुपा कर रखी गई है। जैसे कि 65 जिलों मे आयोडीन युक्त नमक की आपूर्ति कितनी मात्रा मे होगी। चार जोन में बिना बांटे ही सभी जिलो के लिये एक निविदा भरना है या फिर अलग-अलग भरना है। चार जोन मे बंटे सभी जिलो के लिए बैक गारन्टी एक देनी है या फिर अलग अलग देनी है। इसके साथ ही कई और ऐसी खामियांजा है। जिसके कारण हम कह सकते है कि उक्त निविदा एक खास कंपनी के मनमाफि क बनवाया गया है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश कर्मचारी कल्याण निगम के ईडी अशोक श्रीवास्तव के ऊपर सबूत होने के बाद भी भष्ट्राचारियो को बचाने का आरोप लगा हैं। यह आरोप श्री महावीर इन्टरप्राईजेज और मेसर्स शुभम टेडिंग कम्पनी ने ईडी अशोक श्रीवास्तव के ऊपर लगाया है। इन कम्पनियो ने नरेन्द्र प्रताप के खिलाफ ईडी को शपथ पत्र देकर नरेन्द्र प्रताप के कारगुजारियो का गुणगान किया है। श्री महावीर इन्टरप्राइजेज कम्पनी ने आरोप है लगाते हुए कहाकि माल आपूर्ति के लिए मांग पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए सहारनपुर, मेरठ मण्डल प्रभारी नरेन्द्र प्रताप द्वारा 5 से 10 प्रतिशत कमीशन तथा उनकी कम्पनी के संबंधित जांच को पूर्ण करने के लिए नरेन्द्र प्रताप ने 50 हजार रूपये रिश्वत की मांग की। इसके लिये एक अन्य कम्पनी ने नरेन्द्र प्रताप को रिश्वत लेते हुए एक वीडियो भी बनाया था। मगर उसके बावजूद भी नरेन्द्र प्रताप के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी। सूत्रों की माने तो नरेन्द्र प्रताप ईडी अशोक श्रीवास्तव का खास आदमी है। जो सहारनपुर, मेरठ मण्डल के फैमिली बाजार मे खाद्य पदार्थ आपूर्ति करने वाली कम्पनियो से अवैध वसूली करता हैं। नरेन्द्र प्रताप से पीडि़त व्यापारियो ने कहा कि नरेन्द्र प्रताप ईडी अशोक श्रीवास्तव का खास आदमी नहीं होता तो अब तक सस्पेन्ड हो गया होता। यही वजह है कि अभी तक नरेन्द्र प्रताप के खिलाफ कोई कार्यवाही हो पायी। उसे का हर संभव प्रयास किया गया। मामला बिगड़ता देख उसे मात्र मुख्यालय से अटैच करके जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया गया। नरेन्द्र प्रताप के खिलाफ  कोई कार्यवाही न करना और भष्ट कर्मचारियो को ईडी अशोक श्रीवास्तव द्वारा बचाने से क्षुब्ध व्यापारियो का एक प्रतिनिधी मण्डल विभागीय मंत्री से मुलाकात कर शिकायत कर चुका है। अब वही लोग पुन: मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत करने की योजना में है। इन व्यापारियो का कहना है कि जब से कर्मचारी कल्याण निगम की कमान ईडी अशोक श्रीवास्तव ने संभाला है। तब से विभाग मे भष्ट्र कर्मचारियो को सह मिली और भष्ट्राचार को बढावा मिला है। व्यापारियो ने कहा कि विभाग मे बिना चढावा-चढाये कोई फाइल आगे नहीं बढती। इन व्यापारियो ने कर्मचारी कल्याण निगम के ईडी को तत्काल प्रभाव से हटाने और भष्ट्र कर्मचारियो के खिलाफ कार्यवाही करने की मुख्यमंत्री से मांग की है। व्यापारियो ने कहा कि एक तरफ  योगी जी प्रदेश से भष्ट्राचार को खत्म करना चाहते है तो वही दूसरी उनके नुमाईन्दे भष्ट्राचार को बढ़ावा देने मे लगे है।

 

 

 

 

13
February

युवा बालिकाओं को जागरूक करने के लिए चलाया अभियान, प्रतिभा इंटर कालेज में लगाया मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता शिविर

मैनफोर्स

बाराबंकी। हमारे समाज में आज भी मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता एक ऐसा गंभीर विषय है। जिस पर कोई खुलकर नहीं बोलना चाहता। इसमें सबसे ज्यादा कठिनाई युवा बालिकाओं को होती है। इन बालिकाओं की स्वयं की मां या परिवार की भी कोई महिला खुलकर इस मुद्दे पर बात करना नहीं चाहती है। लाज और शर्म की यही यथास्थिति मासिक धर्म के दौरान इन युवा बालिकाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। जिसकी वजह से उन्हें तमाम प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझना पड़ता है। यह विचार आज महिला चेतना समिति द्वारा जनपद बाराबंकी के प्रतिभा इंटर कालेज में लगाई गई मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता कैम्प में समिति की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम विलास यादव ने व्यक्त किया। श्रीमती यादव जब बाराबंकी स्थिति प्रतिभा इंटर कालेज में अध्ययनरत युवा बालिकाओं से जब इस मुद्दे पर वार्ता की तो सभी युवा बालिकाओं के चेहरे पर लाज और शर्म का भाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला। बहुत सी ऐसी भी बालिकाएं  थी। जिन्हें इस बारें संक्षिप्त जानकारी भी नहीं थी। इन बालिकाओं से इस गंभीर मुद्दे पर वार्ता करने के लिए समिति की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम विलास यादव को मित्रवत शब्द तलाशने पड़े। श्रीमती कुसुम विलास यादव ने कहाकि दरअसरल हमारे समाज में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधी बहुत सी धारणाएं गलत चली आ रही हैं। जब तक इन मिथक धारणाओं को तोड़ा नहीं जायेगा तब तक इन युवा बालिकाओं को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के संदर्भ में शिक्षित नहीं किया जा सकता है। समिति की अध्यक्ष ने कहाकि भारतवर्ष में लगभग 20 करोड़ से अधिक बालिकाएं मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधी जानकारियों से अनभिज्ञ हैं। लगभग 66 प्रतिशत भारतीय बालिकाएं मासिक धर्म के बारे में तब तक कुछ नहीं समझ पाती है। जब तक कि उनका मासिक धर्म शुरू नहीं हो जाता। बालिकाओं को इस प्रकार की समस्याओं से जागरूक करने के लिए और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए महिला चेतना समिति द्वारा समय-समय पर मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता शिविर का अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजन किया जा रहा है। साथ ही युवा बालिकाओं को इस शिविर में नि:शुल्क सेनेटरी नैपकिन वितरित किया जा रहा है। समिति की अध्यक्ष ने बताया कि आज प्रतिभा इंटर कालेज में संस्था द्वारा आयोजित शिविर में करीब 200 युवा बालिकाओं को नि:शुल्क सेनेटरी नैपकिन वितरित किया गया है। इसी क्रम में कार्यक्रम में उपस्थित लखनऊ के हेरिटेज हापिस्टल की डा. सरस्वती ने कालेज में अध्ययनरत युवा बालिकाओं को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधित विधिवत जानकारी दी। 

युवा बालिकाओं की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का प्रमुख कारण जागरूकता का अभाव : डा. : सरस्वती

महिला चेतना समिति द्वारा जनपद बाराबंकी स्थित प्रतिभा इंटर कालेज में लगाये गये मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता शिविर में हेरिटज हास्पिटल की डा. सरस्वती ने कहाकि भारत में आज भी महिलाएं मासिक धर्म से संबंधित मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने में स्वयं को असहज महसूस करती है। आज भी भारतीय समाज की अधिकांश आबादी सांस्कृतिक मान्यताओं के बंधन और लोक लाज के भय और शर्म के कारण मासिक धर्म स्वच्छता के महत्व को दरकिनार कर देता है। जिसका मुख्य कारण जागरूकता का अभाव है। जागरूकता के अभाव में इन मुद्दों पर सुधार की पहल करना बेमानी है। इसलिए इस मुद्दे पर सुधार की पहल करने से पूर्व इस मुद्दे के बारे में बेहतर तरीके से जागरूक करना आवश्यक है। डा. सरस्वती ने कहाकि स्वच्छता स्वास्थ्य का सबसे बेहतर और महत्तपूर्ण कारण है। डा. सरस्वती ने कहाकि मासिक धर्म के बारे में बात करने में आज भी बालिकाएं तो बालिकाएं महिलाएं भी झिझकती हैं। इससे समस्याओं का समाधान नहीं होगा बल्कि मासिक धर्म के दौरान बालिकाओं और महिलाओं को क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। इस बारें में जागरूक होना चाहिए। जब तक बालिकाएं और महिलाएं इस बारें में जागरूक नहीं होगी तब तक वे खुद के स्वास्थ्य को खतरे में डालती रहेगी। डा. सरस्वती ने कहाकि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखे और स्वयं को संक्रमण से दूर रखे। ताकि अनचाही बीमारियों से बचा जा सके।

महिला चेतना समिति के प्रयास को कालेज प्रबंधन ने सराहा

महिला चेतना समिति द्वारा जनपद बाराबंकी के प्रतिभा इंटर कालेज में लगाये मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता शिविर कार्यक्रम की कालेज के प्रबंधक और प्रधानाचार्य सहित अन्य गणमान्य लोगों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। कालेज प्रबंधन ने कहाकि बहुत सी बालिकाएं शर्म और लज्जा के चलते मासिक धर्म के दौरान होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं को परिजनों से बताने में हिचकती है। परिजन भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बालिकाओं से वार्ता नहीं करते है। जिसकी वजह से बालिकाओं में मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता के संदर्भ में जागरूकता का अभाव होता है। जिससे बालिकाओं को स्वास्थ्य संबंधी तमाम प्रकार की गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में महिला चेतना समिति द्वारा आयोजित इस प्रकार का कार्यक्रम महिलाओं की जागरूकता के संदर्भ में मील का पत्थर साबित होगा।

 

 

 

 

31
January

मैनफोर्स

लखनऊ। दलितों की शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली संस्थाओ और व्यक्तियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति जनजाति प्राथमिक शिक्षक संघ इस वर्ष से दलित शिक्षा सम्मान प्रारम्भ कर रहा है। संघ के महासचिव वीके त्रिवेदी ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि संविधान निर्माता डॉ अंबेडकर ने दलित शिक्षा को भारत में सामाजिक परिवर्तन का आधार बताया है। अध्यक्ष पी राम गौतम के अनुसार वर्ष 2019 में दलित शिक्षा सम्मान के लिए कई व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम पर विचार चल रहा है जिन्होंने समय समय पर दलित विद्यालयों की दुर्गति सुधारने और दलित बालक बालिकाओं को शिक्षित कराने के क्षेत्र में दलित शिक्षक संघ द्वारा किये जा रहे प्रयासों में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। गौतम के अनुसार वर्ष 2019 के लिए चयनित व्यक्ति अथवा संस्था की घोषणा 5 फरवरी को कर दी जाएगी। एक सवाल के जवाब में पी राम गौतम ने बताया कि आगामी 8 फरवरी को राजधानी लखनऊ के विधानसभा सभा मार्ग पर स्थित अंबेडकर महासभा के मुख्य हाॅल में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रथम दलित शिक्षा सम्मान प्रदान किया जाएगा और इस अवसर पर दलित शिक्षक संघ की सभी मंडल और जिला इकाइयों के पदाधिकारी बडी़ संख्या में मौजूद रहेंगे। इसी अवसर पर प्रदेश के दलित विद्यालयों की आवर्तक अनुदान सूची के संबंध में भावी रणनीति पर भी विचार विमर्श होगा।

 

 

 

 

 

 

 

29
January

जन स्वास्थ्य रक्षक बहाली अभियान के पक्ष में खड़ी हुई भारतीय किसान यूनियन

मैनफोर्स

लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने जन स्वास्थ्य रक्षक बहाली अभियान को पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है। आल इण्डिया कम्युनिटी हेल्थ वर्कर एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार के पास भेजे गए अपने समर्थन पत्र में नरेश टिकैत ने कहा है कि भारत के करोड़ों गरीब किसानों और खेतिहर मजदूरों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर देने वाले जनस्वास्थ्य रक्षक साथियों के पक्ष में भारतीय किसान यूनियन साथ खड़ी है। जनस्वास्थ्य रक्षक बहाली प्रक्रिया को गति देने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों के साथ परिवार कल्याण महानिदेशालय पहुँचे मनोज कुमार ने भारतीय किसान यूनियन के इस समर्थन को बहाली अभियान में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि हापुड़ से लखनऊ तक निकाले गए 450 किलोमीटर निवेदन मार्च के बाद से सभी जिलों में चल रही सरकारी ग्राउण्ड सर्वे प्रक्रिया में तेज गति आई है और परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक डा० वीरेन्द्र सिंह ने एसोसिएशन कार्यकारिणी के साथ हुई वार्ता में स्पष्ट किया है कि विभाग सभी जनपदों से ग्राउण्ड सर्वे रिपोर्ट मंगवाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रहा है। परिवार कल्याण महानिदेशालय पर मनोज कुमार के साथ आल इण्डिया कम्युनिटी हेल्थ वर्कर एसोसिएशन की 55 जिला इकाइयों के पदाधिकारी और राष्ट्रीय अध्यक्ष धनीराम सैनी, प्रदेश सचिव चरण सिंह यादव और मीडिया प्रभारी ध्रुव राजपूत भी मौजूद थे।

 

 

 

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