surkhiyan

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24
March

 

 

 

नई दिल्ली। चारा घोटाला में सजा काट रहे आरजेडी सु्प्रीमो लालू प्रसाद यादव पर उनके नोटबंदी विरोध को लेकर बीजेपी नेता हमला किया है। बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा कि लालू अपनी पार्टी के नेता को कालेधन की मनी लांड्रिंग करने से बचाने के लिए यह सब कर रहे थे। बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने ट्वीट कर लालू प्रसाद यादव पर सीधा हमला बोला. उन्होंने लिखा नोटबंदी के दौरान फर्जी आईडी पर 41 खाते खोले गए. इनके जरिए 70.46 लाख रुपये की ब्लैकमनी की मनी लांड्रिंग के आरोप में सीबीआई ने अवामी कोआपरेटिव बैंक के निदेशक और आरजेडी के पूर्व एमएलसी के बेटे को अरेस्ट किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में खिला कि अवामी बैंक के चार बड़े ओहदों पर एक ही परिवार के चार मेंबर हैं।  साफ है कि कालाधन बाहर लाने वाली नोटबंदी का विरोध कर लालू किनको बचा रहे थे. सुशील मोदी ने फेसबुक डेटा चोरी मामले को लेकर भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि फेसबुक मामले पर भी किया ट्वीट 2019 के आम चुनाव को गलत तरीके से प्रभावित करने की साजिश नाकाम करने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी. इसके बाद फेसबुक के सीईओ जकरबर्ग ने कुछ घंटे बाद ही माफी मांग ली। उन्होंने यकीन दिलाया कि वे चुनाव से पहले डेटा चोरी रोकने वाले सुरक्षा सम्बंधी फीचर बढ़ाएंगे. सुशील मोदी ने लिखा कि पोल खुलने से कांग्रेस सकपका गई है और अब डेटा चोरी को ध्यान बंटाने का राग अलाप रही है. उन्होंने राहुल गांधी पर सवाल दागते हुए कहा कि क्या वे डेटा चोरी के जरिए भारत में बाहरी दखल के पक्ष में हैं? बिहार के डिप्टी सीएम ने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि केंद्र सरकार ने शहीद जवानों के बच्चों की पढ़ाई के लिए 10 हजार रुपये मासिक की सीमा हटा दी है। इससे अब ऐसे बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च दिया जा सकेगा। उन्होंने लिखा कि लापता और दिव्यांग हुए जवानों के बच्चों को भी इसका फायदा मिलेगा. उन्होंने वन रैंक-वन पेंशन देने वाली एनडीए सरकार का सैनिकों के साथ हमेशा खड़े रहने की भी बात लिखी है।

 

 

 

 

24
March

 

 

 

लखनऊ। भारत सरकार द्वारा देश के शहरो के आधारभूत ढांचे के विकास हेतु विभिन्न मिशन व योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन्ही योजनाओं के संदर्भ में भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा शहरो में रहने की योग्यता मानको पर मूल्यांकन कराया जा रहा है। इस क्रम में भारत सरकार के शहरी कार्य एवं आवासन मंत्रालय (एमओयूडी) देश के 116 शहरो का मूल्यांकन हेतु प्रमुख मानक/इंडीकेटर्स निर्धारित किए गये है जिसे लिविबिलिटी इंडेक्स का नाम दिया गया है। इन प्रमुख मानक/इंडीकेटर्स के अंतर्गत प्रशासन द्वारा प्रदान की जाने वाली ऑनलाइन सुविधाएं, इंटरनेट कनेक्टिविटी, संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और रोजगार, आवास, ओपन स्पेस, भूमि उपयोग, बिजली व पेयजल की आपूर्ति, अपशिष्ट जल प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण इत्यादि के विभिन्न बिन्दुओं पर मूल्यांकन किया जायेगा। इस कार्य हेतु नगर निगम लखनऊ को नोडल कार्यालय नामित किया गया है। आज को नगर निगम मुख्यालय में अपर नगर आयुक्त पी.के. श्रीवास्तव की अध्यक्षता में उपरोक्त बिन्दुओं से सम्बन्धित विभागो के अधिकारियों हेतु एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में लखनऊ विकास प्राधिकरण, मुख्य चिकित्साधिकारी, आपदा प्रबंधन, जलकल, वन विभाग, शिक्षा विभाग, पुलिस, यातायात, उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वाणिज्य कर विभाग, ईकोग्रीन के अधिकारीगण उपस्थित हुए। कार्यशाला में सिटी को-आर्डिनेटर श्री राकेश भट्ट (आईपीएसओएस) भी उपस्थित रहे। उपस्थित अधिकारियों को भारत सरकार के असेसमेंट ऑन सिटी लिवेबिलिटी इंडेक्स कार्यक्रम तथा इंडीकेटर्स के संबंध में विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया। असेसमेंट हेतु वांछित डेटा उपलब्ध कराने की अपेक्षा की गयी ताकि उन्हे समय से भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड कराया जा सके। मूल्यांकन हेतु सूचनायें दिनांक 12 अपै्रल, 2018 तक प्रत्येक दशा में उपलब्ध करायी जानी है। तत्पश्चात शहरो की रैंकिंग भारत सरकार द्वारा जून, 2018 में प्रकाशित की जायेगी।

 

 

 

23
March

 

 

 

सिद्धार्थनगर । पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर द्वारा चलाए जा रहे अपराध एवं अपराधियों के विरूद्ध अभियान के क्रम दिनांक 16/03/18 को ग्राम भलुहा में कोटा चयन प्रक्रिया के दौरान दूसरे पक्ष के रामनरेश चौधरी, रामरक्षा चौधरी ,रामकरन चौधरी , रामभवन पुत्रगण रामराज साकिनान ग्राम भुलहा थाना खेसरहा 5. शिवप्रसाद पुत्र फूलचन्द निवासी ग्राम भलुहा 6. विनोद पुत्र रामअवतार साकिन कुर्थिया थाना खेसरहा सिद्वार्थनगर आदि द्वारा अपने अन्य समर्थकों के साथ ADO पंचायत श्रीनिवास, ग्राम पंचायत अधिकारी श्री राजदेव मिश्रा पर निष्पक्षता का आरोप लगाते हुए हमला कर दिये वहां पर मौजूद निरीक्षक रामदरश, उ0नि0 हरेन्द्र नाथ राय, का0 सुभाष राय, का0 सर्वेश यादव, का0 हरेन्द्र प्रसाद ने हजारों की भीड़ में घुसकर ADO पंचायत, ग्राम विकास अधिकारी को बचाने में चौकी प्रभारी भी घुस गये । उपरोक्त अभियुक्तों ने चौकी प्रभारी के ऊपर प्राणघातक हमला कर दिया इस संबन्ध में पंजीकृत हुआ जिसकी विवेचना SHO श्री रणधीर कुमार मिश्रा द्वारा क्षेत्राधिकारी श्री उमाशंकर सिंह के निर्देशन में की जा रही है अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर द्वारा तीन पुलिस टीमें गठित की गयी है जिसके तहत जनपद बस्ती, सन्तकबीर नगर, बलरामपुर में अभियुक्तों के घर लगातार दबिश दी जा रही थी । प्र0निरी0 द्वारा पूर्व मे भी 15 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है शेष अभियुक्तों के माननीय CJM न्यायालय में NBW/82 CrPC कार्यवाही हेतु प्रतिवेदन किया गया है । पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर द्वारा गिरफ्तारी हेतु 2500-2500 रु0 का इनाम घोषित किया गया है । आज सुबह प्र0निरी0 को मुखबिर द्वारा सूचना मिली की भलुहा घटना का मुख्य आरोपी रामनरेश अपने 06 साथियों के साथ तेलौरा मोड़ पर वाहन का इन्तजार कर रहा है जिससे वह न्यायालय में आत्मसमर्पण कर सके । मौके पर ही पुलिस टीम द्वारा घेरकर गिरफ्तार कर लिया गया ।

 

 

 

23
March

अमेठी। बिजली विभाग की करतूत और लापरवाही तो क्षेत्र मे बिख्यात तो है साथ में अब उनकी दबंगई भी समय समय पर उजागर होती देखी जा सकती है । मामला जनपद अमेठी के जायस विद्दुत उपखंड के ग्राम खरौली का है , जहाँ लापरवाही की हद हो गई मामला कुछ ऐसा है कि उपरोक्त गावँ में करीब 8या 9 साल पहले 11000 लाइन आई थी उस समय पुरे ग्राम में लगभग 50 kv+ लोड था लेकिन विभागीय अधिकारियों ने जबर्दस्ती 25 kv का ट्रांसफार्मर गावँ में लगवा दिया| जैसे तैसे समय बीतता गया और विभागीय अधिकारियों की कृपा से दिन प्रतिदिन लोड बढ़ता गया और लोड के चलते महीने भर में 20 दिन लाइट खराब रहने लगी और 2 साल पहले लोड बढ़कर 80kv+ पहुँच गया तब जाकर गांव के लोगो ने इसकी शिकायत उस समय के वर्तमान जेई से की , उन्न्होंने भी करीब एक साल तक मामले को लिपापोती करते रहे, लेकिन दबाव वस आखिरकार जेई अमित चौधरी ने 20 अप्रैल 2017 को 63kv के ट्रान्सफार्मर का एस्टिमेट बनाकर अपने सीनियर विभागीय अधिकारी को दिया , लेकिन सवाल ये उठता है कि| 1- आखिर कब तक इस गावँ में विभागीय अफसरों की कृपा होगी|2 – प्रश्न ये भी उठता है कि क्या योगी सरकार का कोई डर नही इन अधिकारियों को। 3 – और सबसे अहम सवाल की वर्तमान डीएम माननीय शकुंतला गौतम जी से भी इस मामले पर बात हुई और लिखित ज्ञापन भी दिया गया , लेकिन वहां से भी केवल सांत्वना ही मिला। 4- गांव वालों का कहना है कि अगर आने वाले 10 दिनों के अंदर समस्या का समाधान न हुआ तो तो हम लोग एक विशाल धरने पर बैठ जाएंगे, अब इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी अभी से विभागीय अधिकारी तय कर ले ।

 

23
March

मैनफोर्स

लखनऊ। कहने को एलडीए मुख्यमंत्री का विभाग है लेकिन प्रदेश में सुधार के तमाम दावे करने वाले सीएम खुद अपने विभाग का भ्रष्टाचार रोकने में नाकाम दिख रहे हैं। भ्रष्ट एलडीए अभियंताओं की सरपरस्ती में अवैध निर्माण का खेल खुलेआम चल रहा है। उलाहना भले ही पिछली सरकारों को दी जाए लेकिन हकीकत में यह गोरखधंधा अब पूरे चरम पर है। आलम यह है कि विधायक मंत्री से लेकर भाजपा पार्षद तक बिल्डर बन गए हैं और कमल निशान और सीएम का पोस्टर उनका संरक्षण हो गया है। पहले अवैध निर्माणों पर अमूमन अधिवक्ताओं मीडिया आदि के होर्डिंग लगाकर काम कराया जाता था लेकिन अब सीधे तौर पर सत्तारूढ़ पार्टी के ही बैनर और होर्डिंग लग रहे हैं। इसी के नाम पर क्षेत्रीय अभियंता अपनी जेब भर रहे हैं तो मुख्यालय पर बैठे अधिकारी सरकार की खिदमत में समर्पित दिख रहे हैं। नतीजा यह है कि हेरिटेज जोन से लेकर गोमतीनगर तक धड़ल्ले से अवैध निर्माणों का खेल हो रहा है। जबकि एलडीए नियमों कानूनों का हवाला देकर केवल हीलाहवाली ही कर रहा है। पिछले कुछ महीनों की कार्रवाई पर नजर डालें तो साफ हो जाता है कि बिना सरकार के मंशा कहीं कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि कागज पर दर्जनों आदेश हुए। हेरिटेज जोन में बनें पूर्व समाजवादी पार्टी नेता और वर्तमान में भाजपा नेता इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। पुराने लखनऊ के ठाकुरगंज स्थित सरॉय माली खां की संकरी गलियों में कई बहुमंजिला इमारत बनकर तैयार हो गई। प्राधिकरण के अभियंताओं के संरक्षण में 10 फि ट तक के गलियारे में चार-चार मंजिल तक बिल्डिगें बनकर तैयार हैं। चार पहिया वाहन तक निकलने की जगह नहीं है लेकिन कॉम्पलेक्स के लिए बेसमेंट भी खोद दिया और निर्माण भी होने लगा। एक के बाद एक कई अवैध निर्माण बनकर तैयार हो गए। बिल्डिंग बनाने वालों ने तो सड़क तक को नहीं छोड़ा और बहुमंजिला इमारत बना डाली। क्षेत्र के अवर अभियंता राजेश राय अवैध बिल्डिंगों पर कार्रवाई ना करने का दम भर रहे हैं तो अभियंता पीके सिंह ऐसे निर्माणों के खिलाफ कठोर एक्शन लेने का दम भर  रहे हैं। इसी तरह चांदगंज स्थित मंदिर के ठीक सामनें बनी अवैध निर्माण पर जोन पांच के अधिशासी अभियंता प्रताप मिश्र ने सीलिंग की कार्रवाई तो की लेकिन भाजपा का बोर्ड लगाकर निर्माण कार्य जारी रहा। देखते ही देखते यह बिल्डिंग बन कर तैयार हो गई और अभियंता हाथ पर हाथ रखे बैठे रहे।

कार्रवाई के नाम पर थाने में एफ आईआर कराकर इतिश्री कर ली। जबकि मामले पर क्षेत्रीय अवर अभियंता सुशील सिंह कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। यह हाल केवल एक ही जगह का नहीं है बल्कि महानगर के समथर पेट्रोल पंप के पास बने अवैध बिल्डिंग को कई बार सील किया गया। तत्कालीन सचिव अरुण कुमार ने यहां पर निर्माण कार्य भी रुकवाया था और एफ आईआर दर्ज कराने के आदेश भी दिए थे लेकिन देखते ही देखते यह बिल्डिंग सफेद रंग से चमकने भी लगी और अभियंता अपनी वसूली लेकर चुप हो गए। यही हाल खाटू श्याम मंदिर के पास बने के पास भाजपा के ही पूर्व पार्षद अपार्टमेंट बनवा रहे हैं। खास  बात यह है कि निर्माण के लिए जिम्मेदार अवर अभियंता सुशील सिंह इस मामले पर कुछ बोलने से ही मना कर देते हैं जबकि अभियंता जानकारी ना होने की बात कर रहे हैं। इसी तरह कपूरथला के आगे और अलीगंज में कई स्थानों पर धड़ल्ले से अवैध बिल्डिंगें बन रही हैं जबकि अधिशासी अभियंता अपने क्षेत्र में किसी भी अवैध निर्माण से इनकार कर रहे हैं। अब ऐसे विरोधाभासी बयानों के बीच सवाल यह है कि अभियंता और अवर अभियंताओं में कौन सही है और कौन गलत।

अधिकारियों के तर्क

प्राधिकरण अधिकारियों ने सील बिल्डिंग पर होने वाले अवैध निर्माण का सारा ठीकरा पुलिस विभाग के सिर फ ोड़ा है। जोन पांच के अधिकारी प्रताप मिश्र के अनुसार उन्होंने मामले पर एफआईआर कराई थी। इसके बाद अवैध निर्माण होने पर मामले को पुलिस देखेगी। क्योंकि उनके पास जो अधिकार थे उसके अंतर्गत जितना एक्शन लेना थे ले चुके अब आईपीसी की धारा पुलिस के पास है। इसलिए सील बिल्डिंग के खिलाफ आगे की कार्रवाई उन्हीं को करनी होती है।

 

23
March

मिशन डायरेक्टर के छुट्टïी पर जाते ही प्रमुख सचिव ने गलत बिलों को खुद ही वेरीफाई कर किया पास 

मैनफोर्स

लखनऊ। देश के प्रधानमंत्री हो या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हो। इन लोगों द्वारा भ्रष्टïाचार और भ्रष्टïाचारियों पर लगाम लगाने के लिए न केवल लम्बी चौड़ी डींगे हांकी जा रही है बल्कि दंभ से भ्रष्टïाचारियों पर लगाम लगाने के लिए सीना भी ठोका जा रहा है। मगर इनकी लम्बी चौड़ी डींगों और दम्भ से आम जनता का कितना भला हुआ, भ्रष्टïाचार पर कितना अंकुश लगा, भ्रष्टïाचारियों पर कितना प्रभाव इसका उदाहरण मैनफोर्स समाचार पत्र आपके समक्ष उत्तर प्रदेश के नगर विकास विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार, भ्रष्टïाचारियों द्वारा संपादित भ्रष्टï कार्यशैली से संबंधित अग्रलिखित समाचार के रूप में चित्रित कर रहा है। आपको बता दे कि नगर विकास विभाग उत्तर प्रदेश में करीब दो दर्जन से अधिक ऐसे अधिकारी और कर्मचारी है, जो खुलेआम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन पर पलीता लगाने का कार्य कर रहे। इन अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत आवंटित धन का दोनों हाथों से खुलेआम लूट जारी है। इन अधिकारियों और कर्मचारियों का सहयोग जमीनों की खरीद फरोख्त करने वाले दलाल कर रहे है। जमीनों की खरीब फरोख्त में करोड़ रूपये के वारे-न्यारे करने वाले ये दलाल अब मोटी कमाई की आस में स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत क्रियान्वित होने वाले शौचालयों के निर्माण के कारोबार में भी व्यापक पैमाने पर अपनी जड़े जमा रहे है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत देश के सभी ग्रामीश, शहरी क्षेत्रों में शौचालय बनाये जाने कार्यक्रम क्रियान्वित किया जा रहा है। इस योजना का लाभ हर स्तर पर लोगों मुहैया कराया जा सके। इसके लिए उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों को मोटी तनख्वाह दी जाती है। इतना ही नहीं इस योजना के तहत रखे गये सलाहकारों को भी मोटा वेतन और भत्ते दिया जा रहा है। मगर अफसोस की बात है कि जिन सलाहकारों पर उत्तर प्रदेश सरकार मोटे वेतन और भत्ता व्यय करती है। ऐसे सलाहकारों की उत्तर प्रदेश सरकार ने योग्यता तक नहीं निर्धारित की है। यदि सरकार ने योग्यता निर्धारित की है तो सवाल यह है कि कैसे सरकार अयोग्य व्यक्तियों को इस मिशन की बागडोर सौंपी है। इस मिशन के तहत नियुक्त सलाहकारों की आज तक योग्यता का कोई अता पता नही है। फिर भी नगर विकास के प्रमुख सचिव जहां भी जाते है, इन्हें सलाह के उद्देश्य से अपने साथ रखते हैंै।

खैर, मूल मुद्दे पर आते है। वर्तमान में नगर विकास का कार्य देख रहे मंत्री महोदय और उनके मंत्रालय की कार्यप्रणाली कुछ ठीक नहीं चल रही है। नगर विकास विभाग में उत्तर प्रदेश सरकार की तबादला नीति का कोई सुर-ताल स्पष्टï नहीं हो रहा है। इतना नहीं इस विभाग की कार्यप्रणाली स्वच्छ भारत मिशन के कार्यक्रम संपादन में हर तरफ संदिग्ध प्रतीत हो रही है। इस योजना के क्रियान्वयन में विभाग के अलाधिकारियों की मनमानी से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि नगर विकास विभाग सरकारी कार्यालय न होकर उनका जेबी संगठन बन हो गया हो।  विभाग के आलाधिकारी और मंत्री महोदय के दो लाडले और लाडली हमेशा इनके साथ ग्राम विकास विभाग से लेकर नगर विकास साये की तरह साथ-साथ मंडराते रहते है। इन लाडलों का विभाग के संचालन में काफी अहम हस्तक्षेप होता है। विभाग के अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ इनका व्यवहार बिगड़े रईसजादों के औलादों की भांिित होता है। उनके इस कारनामे में विभाग के आलाधिकारी महोदय का शत-प्रतिशत सहयोग होता है। एक ऐसा वरिष्ठï कैबिनेट मंत्री और नौकरशाह जो राष्टï्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा से सीधा संबंध रखता और उससे प्रभावित रहता है। इन दोनों की नाक के नीचे अनर्गल तरीके से विभाग के कार्य में दखलअंदाजी न केवल प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के डींगों और दावों की पोल खोल रहा है बल्कि राष्टï्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा पर भी कालिख पोतने का कार्य कर रहा है।  

गौरतलब हो कि विधानसभा की कैंटीन पर कभी काबिज रहे उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ नगर विकास मंत्री सुरेशा खन्ना के विभाग में विकास कार्य छोड़कर वह सभी अनैतिक कार्य संपादित कराये जा रहे है, जिसे वास्तव में नहीं होना चाहिए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस कदर विभाग में मनमानी चल रही है वह हैरतअंगेज है। 

सवाल कई हैं, यह जानना जरूरी है कि आखिर किस मजबूरी के कारण एक पीसीएस स्केल वाले अनुबंध पर रखे गए अधिकारी ने इस्तीफा दिया ? विगत 10 वर्षो से कार्य करने वाले इस कर्मी के साथ ऐसा क्या हुआ कि वह तमाम आरोप लगाते हुए नौकरी से त्याग पत्र दे दिया। जाहिर सी बात है आज जहां लोगों 10 हजार रूपये प्रतिमाह की नौकरी मिलनी मुश्किल है। वहां  65 हजार प्रति माह की नौकरी कोई ऐसे ही नहीं छोड़ेगा। गौरतलब हो कि विभाग में टेक्नीकल एक्सपर्ट के तौर पर वर्ष २00९ में आईईसी अनूप द्विवेदी तैनात हुए थे। श्री द्विवेदी को वर्ष २017 के नवम्बर में विभाग के प्रमुख सचिव और उनके दत्तक पुत्र विकास रस्तोगी और आदित्य विद्यासागर की मनमानी के कारण इस्तीफा देना पड़ा था। अनूप द्विवेदी ने अपने इस्तीफे में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना स्वच्छ भारत मिशन को लेकर उपरोक्त व्यक्तियों सहित प्रमुख सचिव पर कई गंभीर आरोप लगाकर इस्तीफा दे दिया। श्री द्विवेदी ने अपने ईमेल से भेजे गये त्याग पत्र में अपनी योग्यता और अनुभव का जिक्र करते हुए लिखा है कि उन्होंने अपना कैरियर किसी आईएएस, पीसीएस अथवा किसी मंत्री के बल पर नहीं बनाया है बल्कि उन्होंने अपना यह कैरियर स्वयं की योग्यता के दम पर बनाया है। उन्होंने प्रमुख सचिव पर आरोप लगाते हुए कहाकि आपके द्वारा कई बार मेरे लिए अपमान जनक शब्दों का प्रयोग किया गया। जिससे मैं दुखी होकर इस्तीफा दे रहा हूं। उन्होंने पत्र में कहाकि जब उनके द्वारा प्रमुख सचिव से स्वच्छ भारत मिशन से जुडी समस्याओं व अन्य विभागीय कार्यों से संबंधित कोई सवाल किया जाता था तो प्रमुख सचिव द्वारा उसे नजरंदाज कर दिया जाता था। उन्होंने कहाकि प्रमुख सचिव की नजर में विकास और विद्यासागर ही सही थे और बाकी सब गलत थे। प्रमुख सचिव इन लोगों पर अंधा विश्वास करते थे।

बिना सत्यापन ही कर डाला बिल का भुगतान

गौरतलब हो स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई पावर कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी में स्वच्छ भारत मिशन के डायरेक्टर को इन सभी कार्यो के लिए अधिकृत किया गया था। मगर सारे नियमों को दरकिनार करते हुए प्रमुख सचिव मनोज कुमार सारे कार्य खुद करते रहे। नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार द्वारा इस कार्य को बिना मिशन डायरेक्टर की जानकारी में लाये रीजनल सेन्टर फार अरबन इन्फ्रास्ट्रक्चर काल सेंटर और कंसल्टेंट के माध्यम से कराना प्रारम्भ कर दिया। प्रमुख सचिव ने इस कार्य के लिए 3 लाख रूपये प्रति माह के हिसाब से कंसल्टेंट भी नियुक्त किया। प्रमुख सचिव के इस कारनामे पर विभाग से ही जुड़े एक अन्य अधिकारी ने आपत्ति जतायी कि जब हाई पावर कमेटी ने इस कार्य के लिए मिशन डायरेक्टर को अधिकृत किया है तो आरसीएस ने काम कैसे किया। मनचाहे बिल को पास करने से मना करने पर संबंधित अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की गयी। मगर मिशन डायरेक्टर के छुट्टी पर चले जाने पर मनोज कुमार को कार्यभार मिल गया। उन्होंने सभी बिल का खुद ही वेरीफीकेशन करके भुगतान करा दिया। जबकि इन बिलों को पास करने के लिए फायनेंस कंट्रोलर द्वारा  पहले से हीआपत्ति लगायी गयी थी। इतना ही नहीं शौचालय बनवाने का जो टेंडर एनजीओ को दिया गया था। उसको अपने दफ्तर में मंगवा लिया, जबकि टेंडर वित्तीय दस्तावेज होता है और इसको खोलने का अधिकार केवल मिशन डायरेक्टर के पास होता है और वह इसको कमेटी के सामने खोलता है। मगर प्रमुख सचिव मनोज कुमार द्वारा तमाम बिलों का भुगतान खुद ही दूसरे ही दिन वेरीफ ाई करके कर दिया गया। जबकि नियमानुसार बड़ी धनराशि के बिलों का भुगतान वित्त और अन्य संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पास होने के बाद ही किया जाता है। मगर यहा ऐसा नहीं हुआ। इतना ही नहीं पूर्व सचिव की कार का इस्तेमाल भी एनजीओ के लोग कर रहे हैं। जबकि मिशन डायरेक्टर के पास कोई कार नहीं है। इसके अतिरिक्त यूपी टूर के नाम से किसी का भी टिकट करा दिया जाता है। जिसका भुगतान के समय फायनेंस कंट्रोलर द्वारा क्वैरी की गई और भुगतान करने से रोक लगा दी गई। मिशन डायरेक्टर द्वारा बिना सत्यापन के बिल के भुगतान पर क्वैरी लगाने के बाद पेमेंट रोक दिया गया। मगर जब मिशन डायरेक्टर छुट्टी पर गए तो खुद चार्ज लेकर सारे बिल पास कर दिया। इसके अतिरिक्त भी प्रमुख सचिव की लगभग हर नियुक्तियों में किसी न किसी तरह साथ रहने वाले विकास रस्तोगी और आदित्य विद्यासागर हैं। इनमें विकास पहले जमीनों की खरीद फरोख्त का कार्य करते थे। जमीनों के खरीद फरोख्त के कारोबार में मंदी आने के बाद विकास रस्तोगी स्वच्छता मिशन से जुड़कर शौचालयों के निर्माण कार्य के व्यापार में लग गये। प्रमुख सचिव की इन पर इतनी कृपा है कि गर निगम से इनको 30 हजार रुपये प्रतिमाह बिना कुछ किये आमदनी प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त प्रमुख सचिव की मेहरबानी के चलते ही इन्होंने कई लोगों को इनोवा कार भी मुहैया कराई है। जिसका स्वच्छता मिशन से कोई लेना देना नहीं है। प्रमुख सचिव के दूसरे लाडले आदित्य विद्यासागर है। इन्हें प्रमुख सचिव मनोज कुमार ने अपना रिटायरिंग रूम आराम करने के लिए दे रखा है। आदित्य विद्यासागर स्वयं को एडवाईजर टू पीएस अर्बन इंस्टीट्यूटशन कहते हैं और अपने वाहन में भी लिखवा रखे है। इसकेपूर्व आदित्य विद्या सागर एडवाईजर टू पीएस रुरल इंस्टीट्यूटशन भी रहे है। यह सभी कृपा प्रमुख सचिव की मेहरबानी से हुई। विभागीय सूत्रों की माने तो जिस प्रकार से इन प्रमुख सचिव की मेहरबानी है, ठीक इसी प्रकार की मेहरबानी नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना से भी है। सूत्रों का कहना है कि मंत्री जी मेहरबानी के चलते ही प्रमुख सचिव इन पर कुछ ज्यादा मेहरबान रहते है। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम में हो रही अनियमितता की कई बार मंत्री जी से भी शिकायत की गई है। मगर आज तक मंत्री महोदय द्वारा न तो प्रमुख सचिव के विरूद्ध कोई कार्यवाही की गई और नहीं उनके दोनों लाडलों के खिलाफ कोई कार्यवाही की गई। मंत्री महोदय की इस प्रकार की खामोशी से न प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री की साख धूमिल हुई बल्कि इससे सम्पूर्ण सरकारी मशीनरी के क्रियाकलाप का भी पता चलता है। 

23
March

डीएम की सख्ती से खुलने लगी पोल, ब्लाक अधिकारियों व कर्मचारियों में मचा हड़कम्प 

मैनफोर्स

हसनगंज/उन्नाव। विकास खंड हसनगंज में बी डी ओ के बदलते ही रुपये लेकर अपात्रो को आवास देने की शिकायते थमने का नाम नहीं ले रही है। एक दजॅन से अधिक ग्रामीणों ने नवागत बी डी ओ से शिकायत कर ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी की जांच कराने की मांग की है।हसनगंज विकास खंड के ग्राम पंचायत मौला बाकी पुर के दर्जनो ग्रामीणों ने खण्ड विकास अधिकारी को शिकायती पत्र देकर दो वर्ष में दिये गये आवास शौचालयों की जांच कराने की मांग उठाई है। जिसमे ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रधान प्रतिनिधि ने अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए 15 से 20 हजार रूपये लेकर प्रधानमंत्री आवास व शौचालय दे दिए हैं। जिसमें इससे पहले अपात्रो को आवास देने की शिकायत की गई थी लेकिन निवर्तमान बी डी ओ सपना अवस्थी व सेक्रेटरी की मिलीभगत से जांच ठंडे बस्ते में डालकर इति श्री करती रही है।जिसमें अधिकतर अपात्रो को आवास दिये गये हैं। जबकि दजॅनो ग्राम पंचायत के पात्र लोग आवास व शौचालयों के लिये ब्लाक के चक्कर काट रहे है।ग्राम पंचायत के शक्ति सिंह ए लाला राम ए अरुण कुमार ए श्याम सुंदर ए शिवपाल ए सूरज ए आकाश ए आयुष ए शिवपाल आदि ग्रामीणों ने खण्ड विकास अधिकारी से अपात्रो को आवास व शौचालय दिए जाने की शिकायत कर जाँच कराने की मांग की है। उधर नवागत खण्ड विकास अधिकारी जितेंद्र बहादुर सिंह ने इस संबंध में बताया कि मौला बाकी पुर ग्राम सभा की ग्रामीणों ने आवास व शौचालय अपात्रलोगो को दिए जाने की शिकायत की है। जाँच कराकर जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही करने का अश्वासन दिया है। 

यह तो महज बानगी है। ब्लाक की अमोइयाए रफीगढीए खैराबादए हसनापुरए छरिहराए ऊंचा द्वारए वाराखेडा नव ई ऊंच गांव ए हसनगंजए मुन्नीखेडा पिलखना रसीदपुर, नेवाजखेडा, आदमपुर बरेठी, लालपुर, खपुरा मुस्लिम आदि ग्राम पंचायतों में आवास योजना में गड़बड़ी करने की शिकायतों का अम्बार लगा हुआ है।अभी तक आवासों की शिकायतों में जांच तो दूर कोई देखने तक नहीं जाता था। घर बैठे अधिकारी कर्मचारी मनचाही रिपोर्ट भेज कर फुर्सत कर देते थे।

पीएम आवास योजना में रिश्वत लेने वालों की खैर नहीं: डीएम

प्रधानमंत्री आवास योजना में अब हसनगंज/उन्नाव। जिलाधिकारी के सख्त फरमान पर बी डी ओ ने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास और स्वच्छ भारत मिशन में शौचालयों के लिए जागरूक करने लिए प्रचार वाहन रवाना कर रिश्वत लेने वालों पर शिकंजा कसने की कवायत शुरू की। बताते चलें अभी तक पात्र आवास के लिए दर दर भटक कर गुहार लगा रहे थे। वहीं ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी की मिलीभगत से पक्के मकान वालों को बीस से चालीस हजार रुपये लेकर प्रधानमंत्री आवास बेचे जा रहे थे। जिस पर गरीबों व बेसहारा लाभार्थियों को छत दिलाने के लिए घूसखोरी करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों की डी एम रवि कुमार एन जी ने नब्ज पकड़ कर शिकंजा कसना शुरू किया। जिससे अब गरीबों आवास मिलने की आस जागी है। डी एम के फरमान पर बीडीओ ने सोमवार को प्रचार वाहन के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए प्रचार शुरू कराया है। अब प्रधानमंत्री आवास योजना में खूस लेने वाले जेल जा सकते हैं। जिसके तहत शासकीय नियमों व पात्रता के अनुसार आवास देने के लिए गांव गांव निरीक्षण करने का अभियान शुरू किया गया है।आवासों के आवंटन में ग्राम प्रधान और किसी भी अधिकारी का कोई योगदान नही होता है। यदि कोई भी प्रधान या अधिकारी आवास और शौचालयों के नाम पर अवैध धन की मांग करता है तो उसकी शिकायत जिलाधिकारी और सीडीओ से फोन पर सूचना दे। बी डी ओ जितेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि पैसा मांगने वाले पर तुरन्त कार्यवाई की जाएगी तथा डीएम के निर्देश पर एफ आईआर दर्ज कर जेल भेजा जायेगा।

23
March

मैनफोर्स

लखनऊ। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ जहां भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए कठोर रवैया अपना रहे है और भ्रष्टाचार रोकने के लिए दावे कर रहे है। वही दूसरी ओर मुख्यमंत्री के दावे के विपरीत परिवहन विभाग के अधिकारी भ्रष्टïाचार के नित नये-नये कीर्तिमान रच रहे है। अभी हाल ही में हुए जानकीपुरम सीतापुर रोड पर एआरटीओ द्वारा ट्रक ड्राइवर से लूट के मामले में विभाग ने आंख मूंद ली है। विभाग के मुताबिक पहले पुलिस मामला दर्ज करें। फिर आगे जांच कराई जाएगी। हालांकि यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले लूट में आरोपित एआरटीओ के खिलाफ  जांच हो रही है। दरअसलए पिछले महीने आरटीओ दफ्तर में तैनात एआरटीओ बीके अस्थाना तो हरदोई रोड पर वसूली के मामले में लोगों ने पकड़ लिया था। हंगामा और माहौल बिगड़ता देख पकड़े गए एआरटीओ दूसरे का नाम लेकर भाग खड़े हुए। मामला पुलिस तक पहुंचा और फोटो से शिनाख्त कराई गई तो पीडि़त ने एआरटीओ को पहचान भी लिया। यह मामला सामने आने के बाद संभागीय परिवहन अधिकारी अशोक कुमार ने घटना से चर्चा में आए दोनों एआरटीओ से स्पष्टीकरण तलब किया था। मगर इन अधिकारियों का स्पष्टीकरण आया या नहीं, किसी को मालूम नहीं है। यह मामला चल ही रहा था कि सुबह जानकीपुरम में एआरटीओ पर ट्रक चालक से 54 हजार रुपये लूटने का आरोप लग गया। पुलिस के मुताबिक विवाद परिवहन विभाग व ट्रक चालक के बीच विवाद का है। इसकी तहरीर लेकर जांच कराई जा रही है। हालांकि यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि ट्रक चालक को एआरटीओ ने जांच के लिए रोका था। उसके बाद क्या हुआ। इसकी पड़ताल चल रही है। घटना के बाद परिवहन अधिकारी भी बैकफु ट पर दिखाई दे रहे हैं। लखनऊ परिक्षेत्र के उपायुक्त अनिल कुमार मिश्रा के मुताबिक हरदोई रोड पर हुई घटना उनके संज्ञान में ही नहीं है। जानकीपुरम की घटना पुलिस जांच कर रही है। एफआईआर होगी तो घटना की विभागीय जांच भी कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि अमूमन जांच के विरोध में लोग अधिकारियों पर आरोप लगाने लगते हैं।

 

23
March

मैनफोर्स

लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण में अवैध निर्माण के खिलाफ सारे अभियान दफ्तर में टेबल पर चक्कर खाकर औंधे मुंह गिर रहे हैं। हल्ला तो खूब होता है, मगर हकीकत में निर्माण पहले ज्यादा तेज रफ्तार से होने लगते हैं। भ्रष्टाचार में डूबे विभागीय अधिकारी ही अवैध निर्माण के ढाल बने हुए हैं। इसीलिए कोर्ट से ध्वस्तीकरण से लेकर सीलिंग तक के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही। अब इसका लाभ सीधे अवैध निर्माण कराने वालों को मिल रहा है। बात चाहे सिस गोमतीन क्षेत्र की हो या फि र ट्रांसगोमती में। हर जगह अधिशासी अभियंता से लेकर सुपरवाइजर तक अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं। शहर के चौक स्थित सरॉय माली खां में एक के बाद एक कई निर्माण हुए हैं। इनमें से कई जगहों पर तो लोग भी रहने लगे और कॉम्प्लेक्स तक खुल गए। मगर एलडीए के काबिल अभियंता इन्हें ना तो खोज पाए और ना ही इनपर लगाम लगा पाए। बात चाहे घंटाघर स्थित अवैध निर्माण की हो या फि र अमीनाबाद के मुमताज मार्केट में बन रही दुकानों की हो, हर जगह से सुपरवाइजर और अभियंताओं को मोटी रकम पहुंच रही है। यही कारण है कि अकबरी गेट के अंदर से लेकर चौक के गोल दरवाजा से 100 मीटर दूर घनी बस्ती में बहुमंजिला निर्माण जारी हैं। ट्रांसगोमती क्षेत्र के चांदगंज में भाजपा नेता ने पार्टी के रंग का गेट रंगवा कर एलडीए अधिकारियों को अपने प्रभाव में लिया और बिल्डिंग सील होने के बाद भी धड़ल्ले से अवैध निर्माण करा डाला। जबकि अधिकारी देखने और कठोर कार्रवाई का ही दम भरते रह गए।

बीते दिनों आदेश तो हुए लेकिन कार्रवाई नहीं

सरस्वती देवी ईडी.61 सेक्टर क्यू अलीगंजए डॉ. सर्वेश कुमार ईडी 760 सेक्टर क्यू अलीगंजए अंजनी एमजीएस 20 सेक्टर बी अलीगंज, शोभा सिंह एसए गणेशपुर राहमनपुर, गणेश प्लाट नंबर 6/6/735 कल्याणपुर, राकेश सिंह कुर्सी रोड, शंकर लाल मेघवानी सुगामऊ, आरिफ श्यामनगर खुर्रम नगर, आशीष ओमेगा ग्रीन सिटी उत्तरधौना, मुश्ताक अली 4/757 विभव खंड, निसार अहमद 120,51 इलियास 120/209 लालबाग में हुए अवैध निर्माण को सील कराने का आदेश हुआ।

जबकि ध्वस्तीकरण के लिए सिस गोमती में सलीम बंगला बाजारए हितेश्वर तिवारी सेक्टर एल खजाना चौराहा, दीपक 27/2 गोखले मार्ग हजरतगंज, कमर हुसैन जगत नारायण रोड वजीरगंज, सायरा मशकगंज वजीरगंज, भगवान कुमारी 182/120 वजीरगंज, रानी कुमुद पंडित नगर वजीरगंज, सोईन 192.15 वजीरगंज, इसरार गोसाईगंज, सुल्तानपुर रोड, कृष्णा मेडिकल सेंटर सुलतानपुर, कुलदीप कोहली मस्तेमऊ सुलतानपुर रोड, अश्वनी कुमार 2/11 रजनीखंड शारदा नगर, पन्ना लाल कैलाशविहार जिंदल खेड़ा सरोजनीनगर, संजय सिंह शहीद नगर कॉलोनी अंबेडकर विवि, इसी तरह टीजी क्षेत्र में शिकैब आलम कुर्सी रोड, मो शाकिब भू खंड संख्या 11 एसएस डेवलपर्स इंदिरानगर, शरद देवड़ा 3/39 विनय खंड पत्रकारपुरम, रुीक 2/27 विजय खंड, मिश्री लाल सेक्टर चार की दुकानें, फरजाना सिद्दीकी 1521 विजय खंडए राम सहारे गड़ेरियन पुरवा खरगापुर, मुनीर दसौली इंटीग्रल रोड, अन्नू सिंह हरहर नगर, मुन्नी देवी हिम सिटी कंचनपुर मटियारी चिनहट, इंद्रारानी राव आस्था नगर देवा रोड, रहबर कामिल इंसाफ नगर इंदिरानगर संजय सिंह तकरोही रोड, अपर्णा डी.2/492 विवेक खंड, दिनेश कुमार 1/238 विशाल खंड, आरके सिंह 1/14 विजय खंड मृदुला 1/22 विराम खंड, उत्तम प्रकाश 1/262  विराम खंड, मान सिंह 1/97 विरामखंड, साहिद 3/252 विनय खंड, सचिन यादव, भैसोरा गोमतीनगर, उषा प्रभाकर 1/191 वास्तु खंड को ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए हैं।  

21
March

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा दिए जाने की सिफारिश मंजूर कर ली है। राज्य सरकार ने लिंगायतों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर विचार के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस नागामोहन दास की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था।

बता दें कि इस समिति ने लिंगायत समुदाय के लिए अलग धर्म के साथ अल्पसंख्यक दर्जे की सिफारिश भी की थी, जिसे कैबिनेट की तरफ से अब मंजूरी मिल गई। अब यह सिफारिश बीजेपी नीत केंद्र सरकार के पास भेजी जाएगी, जिसे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इस मामले पर अंतिम फैसला करना होगा।

दरअसल लिंगायत समुदाय राज्य में काफी प्रभावशाली माना जाता है और लंबे समय से इसका झुकाव बीजेपी की तरफ देखा जा रहा था। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के मौजूदा सीएम उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में इस साल अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से मुख्यमंत्री का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।

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