09
August

भ्रष्टाचार में लिप्त अधिशासी अभियंता

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फ्लाईओवर के लिए हुई साढ़े तीन करोड़ की निविदा में बंदरबांट का षणयंत्रकारी

मैनफोर्स

लखनऊ। यूं तो भाजपा सरकार देश और प्रदेश के सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए तमाम बड़े-बड़े दावे और वादे करती रही है। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार को नजीर बनाकर कोसती रही है। मगर जब स्वयं सत्तासीन हुई तो उसे स्वयं के कार्यकाल में हो रहे भ्रष्टाचार पर नजर फिराने की भी फुर्सत नहीं रही है। बल्कि इसके विपरीत वह भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले लोगों के साथ ''उल्टा चोर, कोतवाल को डांटे'' वाली कहावत को चरितार्थ करने लगी है। भाजपा सरकार में कैसे सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पुष्पित और पल्लवित हो रहा हैं। इसका एक ताजा उदाहरण उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग में देखने को मिल रहा है। कुछ माह पूर्व खुर्रमनगर फ्लाईओवर का लगभग साढ़े तीन करोड़ की निविदा निकाली गई थी। निविदा निकालने के बाद कार्यो को क्रियान्वित किया जाने लगा। मगर क्रियान्वित कार्यो में खुलेआम मानकों की धज्जियां उड़ाकर कार्यो को संपादित किया जाने लगा। पाठकों को बता दें कि इसका श्रेय किसी और का नहीं बल्कि अधिशासी अभियंता  एसपी सक्सेना को जाता है। इससे पूर्व भी एसपी सक्सेना अपने काले कारनामों की वजह से लोक निर्माण विभाग के चर्चित अभियंताओं में शुमार है। अधिशासी अभियन्ता एसपी सक्सेना न केवल पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का गुल खिलाये थे बल्कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी भ्रष्टाचार का गुल खिलाने में परहेज नहीं कर रहे है। एसपी सक्सेना ने उपरोक्त निकाली गई निविदा के माध्यम से क्रियान्वित कार्यो के लिए आवंटित सरकारी धन का भी बंदरबांट करने में परहेज नहीं कर रहे हैं। भ्रष्टाचार की कला में महारत हासिल करने वाले अधिशासी अभियन्ता एसपी सक्सेना अपनी भ्रष्ट कार्यशैली से भ्रष्टाचार के कीचड़ में कमल को सड़ाने का कार्य कर रहे है। अधिशासी अभियंता एसपी सक्सेना ने खुर्रमनगर फ्लाईओवर पर जो पोल और हाईमास्क लगवा है और लगवा रहे है वह सभी के सभी मानक के विपरीत है। निविदा में जो मानक निर्धारित किया गया हैं। दरअसल वह वास्तविकता के धरातल से कोसों दूर है। यह अनैतिक कार्या जांच का विषय है। हालांकि कुल लोगों ने इनके अनैतिक कार्यो की शिकायत की है। मगर वर्तमान सरकार के कार्यकाल में शिकायतकर्ताओं की हालत ''भैस के आगे बीन बजाओ, भैंस लगे पघुराये'' की कहावत पर चरितार्थ हो रही है। जो काम मानक के अनुरूप होना चाहिए, वही कार्य एसपी सक्सेना के कार्यकाल में मानक के विपरीत हो रहे है। वह दिन दूर नहीं कि कुछ ही  दिनों के बाद पोल और हाईमास्क जमीन पर पड़ा जर्जर हालत में दिखाई देगा। इस फ्लाईओवर पर कराये जाने वाले इस विद्युत कार्य की टीएसी से जांच करा दी जाये तो स्वत: अधिशासी अभियंता एसपी सिंह के भ्रष्टाचार की पोल खुल जायेगी। 

लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष को भी एसपी सक्सेना ने किया गुमराह
 
 

मुख्य अभियंता 

एसपी सक्सेना

खुर्रमनगर फ्लाईओवर के निर्माण के अतिरिक्त भी एसपी सक्सेना ने भ्रष्टाचार का गुल खिलाया है। इनके द्वारा बभनान से गौर, टिनिच वाया वाल्टरगंज, भीटिया चौराहा जनपद बस्ती के लिए हुई निविदा में भी खेल खेला गया है। जब मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना से बभनान से गौर, टिनिच वाया वाल्टरगंज, भीटिया चौराहा जनपद बस्ती के लिए हुई निविदा को निरस्त करने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जो मैं कह रहा हूं। उसे ध्यान से सुनो। 24 मई को चार निविदा आये थे। जिसकी फ ाइनेंशियल बिड खोली गई थी। जबकि 26 मई को आचार संहिता समाप्त हो गई थी। आचार संहिता बिना समाप्त हुए कैसे फ ाइनेंशियल बिड नहीं खोली गई ? इसके बारे में एसपी सक्सेना लेसमात्र भी बोलना पंसद नहीं करते है। एसपी सक्सेना को झूठ बोलने की महारत हासिल है। उन्होंने कहाकि कई ठेकेदारों और मीडिया के लोगों ने शिकायत की इसलिए टेंडर निरस्त कर दिया गया था। जब एसपी सक्सेना के इस कृत्य के बारें में लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष वीके सिंह से पूछा गया तो उन्होंने भी वही बात कही जो एसपी सक्सेना ने कही। एसपी सक्सेना ने लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष को भी गुमराह करते हुए वही बात बतायी जो उन्होंने पत्रकारों से कही। अब गंभीर सवाल यह है कि क्या मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना ने गौर टिनिच वाया वाल्टरगंज, भीटिया चौराहा जिला बस्ती की उक्त निविदा को निरस्त करने का जो कारण जो बताया क्या वह कारण जायज है ? यदि जायज तो क्यों एसपी सक्सेना ने आचार संहिता के दौरान निविदा की फाइनेन्सियल बिड खोलने के अनैतिक कार्यप्रणाली पर खामोशी साध ली। पाठकों को बता दें कि मॉडल कोड आफ कंडक्ट ईसीएल के क्रमांक 52(9) जी क्रमांक के अनुसार यदि निविदा आचार संहिता के पूर्व मांगी गई हो तो उसका एब्यूलूशन किया जा सकता है। मगर उसका अन्तिम निर्णय बिना अनुमोदन के निर्गत नहीं किया जा सकता है। यदि निविदा मांगी नहीं गई है तो चुनाव आयुक्त के अनुमति बिना निविदा नहीं मांगी जा सकती है। इसका अर्थ यह है कि पूर्व में मांगी गई निविद की बिड को खोल कर एब्यूलूशन किया जा सकता है। किन्तु उस पर अन्तिम निर्णय अर्थात निविदा की स्वीकृति नहीं दी जा सकती है। ऐसी स्थिति में जब 24 मई को फ ाइनेंशियल बिड खोली गई थी तो इसको आचार संहिता के पश्चात 26 मई को स्वीकृति या निर्गत की जा सकती थी। मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना ने जो आचार संहिता का हवाला दिया है। यदि उस पर ही भरोसा कर लिया जाये तो फि र निविदा खोली ही क्यों गई ? इन सवालों का जवाब न तो विभाग के जिम्मेदार आलाधिकारी दे रहे है और नहीं एसपी सक्सेना स्वयं दे रहे है। एसपी सक्सेना की इस कार्यप्रणाली से जाहिर है कि दाल में ही कुछ काला नहीं है बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है।

निविदा मैनेजमेन्ट में एसपी सक्सेना को महारत हासिल

एसपी सक्सेना मुख्य अभियन्ता गोरखपुर एवं बस्ती का सबसे ज्यादा जोर भ्रष्टाचार पर रहा। मगर इसका असर सिर्फ  बभनान से गौर, टिनिच वाया वाल्टरगंज भीटिया चौराहा जिला बस्ती की निरस्त निविदा  तक सीमित नहीं रहा है। बल्कि ऐसे अनेक मामले देखे गये। जिसमें उनकी प्रत्येक निविदा में संतुलनकारी भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई दी। एसपी सक्सेना निविदा मैनेज करने में भाजपा शासन काल में भी अपनी खास पहचान बना लिए है। एसपी सक्सेना की खास बात यह कि भाजपा के कद्दावर नेताओं को बतौर अतिथि के रूप में पूजते हुए दिखाई देते है। 

दोनों हाथों से धन बटोरने में व्यस्त है एसपी सक्सेना

बभनान से गौर टिनिच वाया वाल्टरगंज भीटिया चौराहा जिला बस्ती में हुई निविदा को निरस्त करवाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले एसपी सक्सेना के पास मुख्य अभियंता गोरखपुर का भी अतिरिक्त चार्ज है। पाठकों को बता दें कि एसपी सक्सेना 30 सितम्बर 2019 सेवानिवृत हो रहे है। एसपी सक्सेना लोक निर्माण विभाग  में ऐसे दागदार अभियंता के रूप में मशहूर है। जो भ्रष्टाचार के मामले में भ्रष्टाचार के दैत्यासुर को पीछे छोड़ दे। एसपी सक्सेना ने अपने पूरे कार्यकाल में शायद ही कोई कार्य बिना रिश्वत के किया हो। इसी प्रकार की कार्यशैली इन्होंने बभनान से गौर, टिनिच वाया वाल्टरगंज भीटिया चौराहा जिला-बस्ती की हुई निविदा में खेलने का प्रयास किया। जबकि इनके पूर्व तैनात मुख्य अभियन्ता ने उक्त निविदा को ईमानदारी से खुलवाने के साथ ही अपनी बेदाग छवि के साथ सेवानिवृत हो गये। मगर एसपी सक्सेना ने उक्त निविदा के माध्यम से धन बटोरने की खातिर उक्त खोली गई निविदा को निरस्त कर दिया। पाठकों बतो दें कि एसपी सक्सेना की कार्यप्रणाली से संबंधित मात्र उपरोक्त ही मामले नहीं है बल्कि इससे पूर्व भी इन्होंने बसपा के शासन काल में भी जनपद उन्नाव में अधिशासी अभियन्ता रहने के दौरान निर्माण कार्यो में घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर अनैतिक तरीके से धन का गबन किया था और अकूत संपत्ति बनायी थी। निविदा निरस्त करने के मामले में प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग श्री गोकर्ण ने पत्रावली तलब कर ली। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया। उन्होंंने बताया कि मैन्युअल कोड ऑफ कडक्ट पेज नम्बर-182 पैरा-8 पर साफ.-साफ मोटे शब्दों में लिखा हुआ है कि जो निविदायें पहले से ही मांगी गई है। उनका मूल्यांकन किया जा सकता है। मगर आयोग की पूर्व स्वीकृति के बिना अंतिम रूप से स्वीकृत नहीं की जा सकती है। यदि निविदाएं पहले से नहीं मांगी गई तो वे आयोग की पूर्व स्वीकृति के बिना जारी नहीं की जाएंगी। मगर इन वाक्यों पर एसपी सक्सेना ने ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। उपरोक्त लाइनों को पीके सक्सेना को निविदा निरस्त करने से पूर्व पढ़ लेनी चाहिए थी। 

 

 

 

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