03
July

स्वास्थ्य विभाग में घोटालों की कतार, एक खत्म नहीं दूसरा शुरू

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निर्माणाधीन चिकित्सालय के संसाधनों हेतु मिले 5 करोड़ 44 लाख

पूर्व में हुए 1 करोड़ 20 लाख के खरीद घोटाले की अभी चल रही है जांच

मैनफोर्स

गोण्डा। जनपद में बन रहे 300 शैय्या वाले निर्माणाधीन चिकित्सालय में  संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के लिए शासन ने 5.44 करोड़ रूपये का बजट जारी कर दिया है। सीएमओ कार्यालय की माने तो यह बजट विभाग को प्राप्त भी हो चुका है। जिसका उपयोग शीघ्र ही संसाधनों की खरीद मेंं किया जायेगा। मगर सवाल यह उठता है कि पूर्व में 1.2 करोड की हुई खरीद में जिस तरह से घोटाला उजागर हुआ और उसकी जाचं भी चल रही है। क्या यह 5.44 करोड की खरीद भी कहीं घोटालों की भेंट न चढ जाये? हालाकि स्वास्थ्य विभाग के मुखिया यह दावा करते नहीं थक रहे कि सभी खरीद शासन की गाइडलाइन के अनुसार ही की जायेगी। जनपद के ही नहीं वरन मण्डल के जिलों से आने वाले ंमरीजों की भारी संख्या को देखते हुए जिले में महिला चिकित्सालय एवं पुरूष जिला चिकित्सालय को विस्तार देते हुए शासन द्वारा 300 शैय्या वाले नये चिकित्सालय भवन निर्माण की संस्तुति पूर्व समाजवादी शासन काल में की गयी थी। प्रदेश सरकार के अनुसार इन भवनों को तीन वर्ष में बनाकर जिले के स्वास्थ्य विभाग को हैण्डओवर करना था। किन्तु स्थानीय शासकीय लेटलतीफी और राजनैतिक हस्तक्षेप के चलते जिम्मेदारों ने इसके निर्माण मे रूचि नही दिखाई और चार वर्ष का समय व्यर्थ गवांं दिया। वर्तमान समय में अभी भी भवन में अनेकों महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण होने बाकी हैं जिसके पूरे होने की संभावना आगामी 2 से लेकर तीन महीनों में है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने इस भवन के संचालन के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद के लिए 5.44 करोड़ रूपये का बजट जारी किया। इस बजट के द्वारा आपरेशन कक्ष आपतकालीन कक्ष, गहन चिकित्सा कक्ष एवं वार्डो के संसाधनों की खरीद की जानी है। जिसके लिए शासन ने बजट जारी करते हुए खरीद की मंजूरी भी दे दी है। इसके लिए गाइडलाइन भी जारी किया गया है। विभाग इस गाइडलाइन का अध्ययन कर रहा है। इसके बाद ही खरीदी की जायेगी। विभाग का कहना है कि कौन कौन से उपकरण कितनी संख्या में खरीदे जायेगें ? इसका शासनादेश प्राप्त हुआ है। उसी के अनुरूप खरीदारी की जायेगी। जिसमें मुख्यत: आक्सीजन प्लाण्ट का निर्माण एक्सरे मशीन, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउण्ड मशीनों की खरीद की जानी है।

इस बारें मे सीएमओ डा. संतोष श्रीवास्तव का कहना है कि मण्डलीय चिकित्सालय के लिए शासन से उपकरणों की खरीद के लिए बजट विभाग को मिल गया है। शीघ्र ही चिकित्सालय बन कर तैयार हो जायेगा। हैण्डओवर होते ही आवश्यक उपकरणों और संसाधनों की खरीदारी की जायेगी। जिससे मण्डल के लिए बेहतर चिकित्सीय सुविधा जिले में उपलब्ध होगी। उल्लेखनीय है कि इस बजट के जारी होने से पूर्व ही इस नये 300 शैय्या वाले चिकित्सालय के लिए नियमों को ताक पर रखकर 1.2 करोड़ रूपये से तत्कालीन सीएमएस डा. आशुतोष कुमार गुप्त के कार्यकाल में ही खरीददारी की जा चुकी है। इस खरीद में दिखाई पड़ रहे संसाधनों में मात्र कुछ बिस्तर, सैकडों की संख्या में स्टूल ट्रे एवं दर्जनों की संख्या मेंं अलमारियों की खरीदारी कर करोडों रूपये के सरकारी धन का बदंरबांट कर लिया गया। मामलें ने जब तूल पकड़ा तो इस खरीद की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी गयी। जिसका अभी तक कोई भी प्रभाव दिखाई नहीं पड़ रहा। पूर्व में हुयी इस खरीद घोटालें की जाचं अभी पूरी भी नही हुई थी कि नया 5.44 करोड का बजट और आ गया पूर्व में खरीदे गये उपकरण निर्माणाधीन भवन के बाहर खुले में ही रखें हुए है जिनकी सुरक्षा का भी अब तक कोई इंतजाम नहीं किया गया है। लापरवाही के साथ रखे ये करोडों के उपकरण धीरे धीरे कबाड में तब्दील हो रहे है। विभागीय सूत्रों की माने तो खुले मे रखे गये ये सामान वहां इसलिए रखे गये है कि बाद में इन्हें यह दिखा कर भारी गोलमाल किया जासके कि कई उपकरण चोरी हो गये। जिले के लोगों के साथ ही मण्डल के मरीजों को बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दे रहा जिले का स्वास्थ्य विभाग अपने अन्दर ही व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जिससे लोगों में यह आशंका घर कर रही है कि कही इस बजट का भी वही हाल न हो जैसे पूर्व का बजट घोटालों का भेंट चढ़ गया था। जिला स्वास्थ्य विभाग कब लोगों के लिए इस मण्डलीय चिकित्सालय का द्वार खोलेगा ? इसका जिले के जनता को वर्षो से एक लम्बा इंतजार है।

 

उलझी हुई हैं जिला चिकित्सालय की स्वास्थ्य व्यवस्था

जिला चिकित्सालय को मण्डल का मुख्यालय चिकित्सालय भी कहा जाता है। कहते है कि जब जिले के स्वास्थ्य सेवाओं को हाल देखना हो तो जिला चिकित्सालय में उपलब्ध सेवाओं को देखिए। यहां आम जनमानस को उपलब्ध करायी जा रही सेवाएं असल में जिले में उपलब्ध सेवाएं हैं। विगत की स्थिति को यदि छोड दिया जाये तो इस वर्ष जिला चिकित्सालय में बड़ी तेजी के साथ कई जन उपयोगी निर्माण कार्य कराये गये। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सालय प्रशासन द्वारा कई प्रयास भी किये गये। यह पिछले कई वर्षों की तुलना में एक बडी उपलब्धि है। इनमें मुख्यत: बच्चों को नया बनाया गया पीकू वार्ड, तीमारदारों के लिए निर्मित प्रतीक्षालय, नेत्र विभाग के मरीजों के लिए प्रतीक्षालय, लाश घर का जीर्णाेद्वार व चिकित्सालय में मुख्य औषधीय पार्क शामिल है। इसके बाद पूर्व में कराये जा रहे चिकित्सायल के रंग रोगन कार्य में भी बदलाव किया गया और नये रंगों को चयन कर चिकित्सालय को एक नया रूप भी दिया गया। यह वर्ष समाप्त होते होते एक बार फिर जिले की जनता को दो स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निराशा ही हाथ लगी जिनमें निर्माणाधीन एमआरआई सेन्टर यूनिट व डायलासिस यूनिट का कार्य पूरा न हो पाने की वजह से इस वर्ष भी लोगो को इस सुविधा से वचिंत रहना पडा। चिकित्सालय प्रशासन के अनुसार वर्ष 2019 में यह सेवाएं उपलब्ध करायी जा सकती हैं। चिकित्सालय प्रशासन के द्वारा तेजी से कराये जा रहे कार्यो को लेकर प्रदेश स्वास्थ्य प्रशासन ने जनपद के चिकित्सालय को प्रदेश के टाप फाइव चिकित्सालयों की सूची में जगह दी है यह भी जनपद के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। एक जनवरी को प्रदेश स्तरीय एक उच्चस्तरीय यूपीएचएसएसपी की टीम यहां पहुंची । जो कराये गये सभी अब निर्माण कार्यो का वीडियाग्राफी भी करायी। वर्ष 2018 समाप्त होते ही वर्ष 2019 में जिले को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए जिला चिकित्सालय प्रशासन एवं कर्मचारियों मे एक नया जोश दिखाई पड रहा है और वे इसके लिए प्रयासरत है।

 

 

 

Read 1085 times Last modified on Wednesday, 03 July 2019 07:24
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