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April

प्रतापगढ़ का लुटेरा चेयरमैन

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डोर टू डोर कूड़ा कनेक्शन के नाम पर करोड़ों का खेल

मैनफोर्स

लखनऊ। स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर कैसे जनपद प्रतापगढ के विकास भवन में भ्रष्टाचार का खेल अंजाम दिया जा रहा है। स्वच्छता अभियान के लिए जागरूकता के नाम पर 17 ब्लाकों में कार्यशाला और नुक्कड़ नाटक आदि कार्यों के नाम पर 8 करोड़ 15 लाख रुपये का बंदरबांट कर दिया। मगर किसी को कानों कान खबर तक नहीं हुई। एक कहावत है कि पानी में की गई गंदगी छुपती नहीं है। वो एक दिन जरूर बाहर आती है। ठीक इसी प्रकार भ्रष्टाचार की भी कार्यशैली है। कितने भी शातिराने तरीके से भ्रष्टाचार किये गये हो। वो एक ना एक दिन उजागर जरूरत होते है। उपरोक्त ब्लाकों में स्वच्छता अभियान के लिए जागरूकता के नाम पर किये गये भ्रष्टाचार जब गंधाने लगा तो पता चला कि इस भ्रष्टाचार की गंदगी ईमानदारी का ढोंग पीटने वाले तत्कालीन सीडीओ प्रतापगढ़ राजकमल यादव ने की है। शासन ने भी आननृफानन में भ्रष्टाचार की गंदगी फैलाने वाले सीडीओ राजकमल यादव को हटाकर अपने दायित्वों की इतिश्री कर ली। मगर शासन ने जांच बैठाने में परहेज किया। क्योंकि यदि जांच हो जाती तो शासन स्तर पर भी भ्रष्टाचार की गंदगी फैलाने वालों के नामों का उजागर होने लगता। तब शासन-सत्ता किस-किस को हटाकर अपना दामन बेदाग होने से बचाती है? शायद इसलिए शासन ने इस मामले में अभी तक जांच नहीं बैठायी। जिला पंचायत राज अधिकारी उमाकांत पांडेय के कंधों पर शासन ने भले सीडीओ राजकमल के पद की जिम्मेदारी सौंप दी हो। मगर 8 करोड़ 15 लाख का यह घोटाला अभी जिला पंचायत प्रतापगढ़ और शासन के आलाधिकारियों के गले की फांस बना हुआ है। पाठकों को बता दें कि यह लूट जनपद प्रतापगढ के 17 ब्लाकों में की गई है। नगरपालिका प्रतापगढ़ के 25 वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य कराना था। नगरपालिका में ठेकेदारी पद्धति से डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन और उसके निष्पादन के लिए ग्वालियर मध्य प्रदेश की एक कम्पनी को ठेका दिया गया था। इसके पहले भी इसी ग्वालियर की कम्पनी को उक्त कार्य के लिए ठेका दिया गया था। उक्त कम्पनी की नगरपालिका के संसाधनों से नगरपालिका के सभी 25 वार्डो के कूड़े को डोर टू डोर एकत्रित कर उसे डम्पिंग प्वाइंट तक ले जाकर नगर को साफ  सुथरा व स्वच्छ बनाने की जिम्मेदारी थी। इस कार्य को नगरपालिका ने अपने पिछले कार्यकाल में प्रारम्भ किया था। जिसे बीच में ही बंद कर दिया गया था। अब पुन: उसे जीवित कर जेब भरने की तैयारी प्रारम्भ हो चुकी है। अंधेरगर्दी का आलम यह है कि पिछले कार्यकाल में नगरपालिका में एक माह में 20 लाख रुपये तक का भुगतान सिर्फ  डोर टू डोर कूड़ा निष्पादन के लिए खर्च किया जाता था। यदि इसमें किसी का शोषण हुआ था तो वे सिर्फ सफाई कर्मी है। जो कागज पर वेतन तो पाते थे 7 हजार और फर्म काटकर उन्हें 4 हजार रूपये देती थी। जबकि कूड़ा तौलकर बिलिंग की जाती थी और उसी तौल में घपले घोटालों को अंजाम दिया जाता था। बिलिंग कार्य के लिए सफाई पटल प्रभारी और सफाई इंस्पेक्टर की रिपोर्ट लगती है। तब कार्य करने वाली फर्म का भुगतान हो पाता है। इस 20 लाख में पचास फ ीसदी रकम चेयरमैन और अधिकारियों के कमीशन के काम आती थी। अर्थात नगरपालिका में सिर्फ स्वच्छता के नाम पर 10 लाख की कमाई स्वघोषित ईमानदारों की हो जाती थी। इसका खुलासा तब हुआ जब पिछले कार्यकाल में चेयरमैन रहे हरि प्रताप सिंह अपने मनपसंदीदा ईओ लाल चन्द्र भारती को लाकर महज पन्द्रह दिनों में करोड़ो रूपये का भुगतान थोक भाव में कर दिया। विवादित से विवादित धूल वाली सभी फाइलों का भुगतान उस वक्त चेयरमैन हरि प्रताप सिंह के इशारे पर ईओ लाल चन्द्र भारती ने कर दिया था। मजे की बात यह है कि डोर टू डोर वाली फाइल का भुगतान तो तत्कालीन सफाई इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह के बिना हस्ताक्षर से ही कर दिया गया था। इस बात की जानकारी मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल आईजीआरएस पर ऑनलाइन शिकायत के माध्यम से दी गई। मामले की जांच करायी गई। जांच में पाया गया कि भुगतान गलत तरीके से किया गया है। शासन को रिपोर्ट भी प्रेषित की गई थी। मगर मामला ठांय-ठांय फिस्स हो गया और उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उक्त फर्म की निविदा अवधि खत्म हो गई और उसके बाद उसका समय नहीं बढ़ाया गया। चूँकि तत्कालीन ईओ अवधेश कुमार यादव और सफाई इंस्पेक्टर रहे ऋषिपाल सिंह से ठेकेदार का विवाद गहरा गया। इस वजह से चेयरमैन रहे हरि प्रताप सिंह का इन अधिकारियों से व्यवहारिक पक्ष का कमजोर हो गया। इसी बीच निकाय चुनाव 2017 सम्पन्न हुआ। जिसके बाद विगत 15 माह से नगर पालिका अपने सफाई कर्मियों से ही सफाई का कार्य कराती रही। मार्च माह में पुन: ग्वालियर की फर्म को उक्त ठेका फिर से आवंटित किया गया। अर्थात इस कार्यकाल में भी डोर टू डोर के मद से लाखों रुपये कमीशन के मिलने की पूरी व्यवस्था की गई। इससे तो यही सिद्ध हुआ कि पूर्व चेयरमैन हरि प्रताप सिंह जो कार्य अपने कार्यकाल में किये थे। वही सारे कार्य अपनी पत्नी प्रेम लता सिंह के चेयरपर्सन रहते उनके हस्ताक्षर से कराना प्रारम्भ कर दिये। एक वर्ष तक बच बचाकर कार्य करने के बाद अब चेयरपर्सन प्रेमलता सिंह के पति हरि प्रताप सिंह फिर से नगरपालिका को दोनों हाथों से लूट रहे है। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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