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March

ताकते रहे पहरेदार, चोर कर गये दरवाजा पार

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हर महीनों रेलवे को करोड़ों के टैक्स का चूना लगा रहे दलाल

अवैध माल को चेकिंग के लिए नहीं होता स्कैनर मशीन का इस्तेमाल

मैनफोर्स

लखनऊ । सूबे की भाजपा सरकार में रेलवे के दलालों की पौ-बारह हो गई है। जब से जीएसटी लागू हुआ है। तब से रेलवे के दलालों टैक्स चोरी की नई-नई विधा की इजाद कर रहे है। ऐसे टैक्स चोरों के पास चोरी करने के लिए दांव-पैतरें है। रेलवे लीज व पार्सल से आवागमन होने वाले माल पर टैक्स चोरी करने के लिए रेलवे के दलाल चोरी के सारे फार्मूलों का इस्तेमाल कर रहे है। टैक्स चोर और रेलवे के दलाल जीएसटी के निरीक्षक और सिपाहियों की निगरानी के कारण रेलवे के दलालों का सहारा ले रहे है। रेलवे के दलाल नये-नये जुगाड़े तलाश कर जीएसटी विभाग को ही धूल चटाने में माहिर साबित हो रहे हैं। पाठकों को बता दें कि टैक्स चोरी से बचने के लिये रेलवे से रेडीमेड गारमेंट्स और होजरी के माल में टैक्स चोरी करने वाले सबसे बड़े दलाल धर्मेंद्र जायसवाल सुतरखाना निवासी बॉबी खान छोटा और बड़ा चिग्गू पान मसाला सुपारी और केमिकल के सबसे बड़े स्मगलर पप्पू मीठे उर्फ दिलीप कुमार गुप्ता ने संयुक्त रूप से रेलवे के दलालों और जीएसटी निरीक्षकों से सांठगांठ कर सरकार को हर माह करोड़ों रूपये टैक्स की चोरी कर रहे है। पाठकों को बता दें कि विगत 18 वर्ष पूर्व एक नंबर प्लेटफार्म के 3 नंबर गेट के सामने अपने पिता के साथ केले का ठेला लगाने वाला पप्पू मीठा आज राजनैतिक दलाल की भूमिका में लोगों के सामने आ चुका है। टैक्स चोरी के इस खेल में एक सत्ताधारी नेता के साये में इन लोगों का अवैध कारोबार फल फूल रहा है। वह सत्ताधारी दल का नेता ही टैक्स और रेलवे की दलाली का मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है। टैक्स चोरी की इस नये गठजोड़ के अनुसार राज्य जीएसटी के चौकीदार खाली दरवाजे को ताकते रह जाते हैं। जबकि सारा अवैध माल उनकी नाके के नीचे से 9 व 10 नम्बर प्लेटफार्म की सुरंगों के माध्यम से नौ दो ग्यारह हो जाता है। पाठकों को बता दें कि इस खेल के लिये निर्धारित रकम हजारों में न हो कर लाखों में है। जिसमें नीचे से ले कर ऊपर तक सबका हिस्सा निर्धारित है। इस व्यवस्था में इतना फायदा जरूर है कि जब कोई जांच हो तो चौकीदार दरवाजे पर हमेशा मुस्तैद मिलेंगे और चोर दरवाजे से सारा खेल बदस्तूर जारी रखेंगे। स्टेशन पर आने-जाने वाले इस अवैध माल को चेक करने के लिए कोई भी कहीं भी किसी स्कैनर मशीन का इस्तेमाल नहीं करता। जबकि गत दिनों स्टेशन की सुरक्षा को लेकर डी.आर.एम से लेकर कई बड़े अधिकारी खासे नाराज दिखाई दिये थे। मगर पार्सल कर्मचारियों की सेहत पर इसका कोई असर नहीं दिखाई पड़ा। उन्हें किसी का भय नहीं है। उन्हें तो बस अपनी जेबें भरने से मतलब है। कार्रवाई के नाम पर सभी जिम्मेदार विभाग खामोश हैं। सुरक्षा व्यवस्था में हर जगह झोल  है। जो आज नहीं कल बड़ी घटना का कारण जरूर बनेगा।

जीएसटी भी चढ़ गई भ्रष्टाचारियों की भेंट

पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी पूरी सरकार भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए बड़े-बड़े दावे करती है। भाजपा की केन्द्र सरकार ने जीएसटी लागू किया। मगर भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर रेलवे के दलाल सरकार को हर माह सौ करोड़ से ज्यादा की चपत लगा रहे हैं। सेंट्रल स्टेशन कानपुर से बड़े पैमाने पर बिना ई-बिल के माध्यम से गुटखा देश के कई शहरों में आपूर्ति किया जा रहा है। इन्हें ले जाने और वहां से बाहर निकालने के लिए पूरा गैंग काम कर रहा है। बाहर से बड़े पैमाने पर सुपारी, होजरी प्रोडक्ट्स, इलायची, तम्बाकू, रेडीमेड कपड़े और इलेक्ट्रानिक्स का सामान कानपुर में आता है। कानपुर सेंट्रल पर आने-जाने वाली करीब 300 से ज्यादा ट्रेनों में स्टेट जीएसटी और रेलवे के कर्मचारियों के साथ मिलकर दलाल करोड़ों की टैक्स चोरी हर माह कर रहे हैं। विगत दिनों जीएसटी के एडिशनल कमिश्नर केशव लाल को काली कमाई के आरोप में पकड़ा दबोचा गया था। केशव लाल ने अपनी 26 साल की नौकरी में सौ करोड़ से ज्यादा की रकम काली कमाई के माध्यम से बिस्तरों में छिपा कर रखा था। पाठकों को बता दें कि केशवलाल के पकड़े  जाने के बाद खुलासा हुआ कि जितना माल ट्रेनों से आता था। उसके आधे वजन पर भी टैक्स सरकारी खाते में जमा नहीं होता था। जिसके बदले में बाकी रकम का कुछ हिस्सा व्यापारी को वापस हो जाता था और बाकी केशवलाल और उसकी टीम के अतिरिक्त रेलवे के कर्मचारियों को बांट दिया जाता था। इसमें सारा खेल दलालों के माध्यम से खेला जाता था।जीएसटी घोटाले के का पर्दा उठाने के बाद ऐसा प्रतीत हुआ कि टैक्स चोरी थम जायेगी। मगर स्थिति बिल्कुल विपरीत है। क्योंकि अभी भी कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर पार्सल का खेल धड़ल्ले से जारी है। यहां खुलेआम जीआरपी, आरपीएफ और जीएसटी अधिकारियों की नाक के नीचे से दलाल बगैर ई वे बिल के माल निकलवा रहे हैं। इन सामानों को ट्रेनों के माध्यम से दिल्ली से कानपुर भेजा जाता है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली से भी माल बिना बिल के लोड होता है। कानपुर पहुंच कर बिना बिल के ही अनलोड करके बाहर निकल दिया जाता है। रेलवे स्टेशन पर दलालों का गठजोड़ इस कदर हावी है कि सरेआम करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी बेफिक्र होकर की जा रही है।  स्टेशन के दलाल इन अधिकारियोंं को भारी भी रिश्वत देते हैं।  सरकारी मशीनरी की निष्क्रियता की वजह से देश के राजस्व को हर माह करीब सौ करोड़ का चूना लग रहा है। 

प्रतिबंधित पान मसाला के लिए रेलवे के लीज पार्सल यानों का हो रहा प्रयोग

प्रतिबंधित होने के बाद भी कानपुर में बने गुटखे और पान मसाले की आपूर्ति बिहार और दिल्ली में लगातार जारी है। रेलवे के सक्रिय दलाल कानपुर सेंट्रल और अनवरगंज स्टेशन पर इस सप्लाई में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। बिहार और दिल्ली में गुटखा-पान मसाला प्रतिबंधित होने के बाद भी कानपुर से वहां आपूर्ति की जा रही है। इसके लिए लीज पर लिए गये रेलवे के वीपीए पार्सल यान का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। किसी भी प्रकार की चेकिंग नहीं होने के कारण टैक्स चोरों के लिए रेलवे के दलाल सबसे उपयुक्त होते है।  सूत्रों के अनुसार कानपुर के दादानगर में स्थित तलब पान मसाला फैक्ट्री, ट्रांसपोर्टनगर स्थित मधु तंबाकू फैक्ट्री, केसर गुटखा, तिरंगा गुटखा फैक्ट्री, ट्रांसपोर्टनगर में ही स्थित राजश्री पान मसाले के विशाल डिपो व शहर के अन्य क्षेत्रों में स्थित कमला पसंद, पान बहार पान मसाला के गोदामों से मसाले व इन्ही ब्रांडों के पैक्ड तंबाकू के 3 से 4 हजार बोरे कालिंदी, श्रमशक्ति, महाबोध सहित दिल्ली, बिहार, कोलकाता तक जाने वाली ट्रेनों के लीज पार्सल यानों से भेजे जा रहे हैं। इतना ही नहीं रेलवे की लीज वाली इसी वीपी यान से पान मसाले में मिलावट के लिये जहरीली पामलेट सुपाड़ी भी कानपुर तक आयात की जाती है। जबकि ये पूरी तरह प्रतिबंधित होती है। सूत्रों की माने तो चोरी किये जा रहे टैक्स की एवज में सेल्स टैक्स के दो खास सचल दल अधिकारियों को 10 से 15 लाख रुपये प्रति माह दिया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि पान मसाला और तंबाकू उद्योग सम्बन्धी टैक्स चोरी के धन्धे में एक दलाल का एकछत्र राज है। जिसका नाम पप्पू मीठा है। पान मसाला और किराना सामग्री में टैक्स चोरी के किंग कहलाने वाले रेलवे के सबसे बड़े दलाल पप्पू मीठे का ठिकाना कानपुर में ही हरबंस मोहाल थानाक्षेत्र का सुतरखाना है। इसी थाना क्षेत्र के रेलबाजार में उक्त दलाल के अपने खुद के और दूसरे दलालों के साथ पार्टनरशिप में कई होटल भी हैं। उसका यह क्षेत्र कानपुर सेंट्रल स्टेशन और स्टेशन के माल गोदाम से महज चंद कदमों की दूरी पर ही है। पप्पू मीठा के घर, आफि स आदि ठिकानों पर सूबे की पिछली सरकारों के समय दर्जनों शिकायतों के बाद दो बार छापा मारा गया था। एक्साइज डिपार्टमेंट की डीआरआई टीम और वाणिज्य कर विभाग की स्पेशल टीमों ने बाकायदा पप्पू मीठा के घर व कार्यालयों पर छापे मारकर करोड़ों रुपये टैक्स चोरी के सबूत जमा किये थे। पप्पू मीठे के एक बड़े कारखास ने ही उसके खिलाफ  बयान दिया था। मगर सत्ता और शासन में बैठे पप्पू मीठे के मित्रों ने जांच को दबा दिया और फाइलों को गायब कर दिया। पिछली बसपा शासनकाल में पप्पू मीठा का नाम सबसे ज्यादा टैक्स चोरी करने वाले रेलवे के दलाल के रूप में शासन की की सूची में सर्वोच्च स्थान पर थी। थाने में उसके खिलाफ भारी धाराओं में रिपोर्ट लिखे जाने की तैयारी हुई थी। मगर अचानक मामला ढीला हुआ और फिर धीरे-धीरे खत्म हो गया। पप्पू मीठा के अलावा टैक्स चोरी की दलाली के बाकी बड़े खिलाडिय़ों में रेलबाजार निवासी अंकल उर्फ  वसी, श्यामनगर निवासी धमेंद्र जायसवाल, सुतरखाना निवासी बॉबी खान, छोटा और बड़ा चिग्ग, संजय प्रजापति, अजय और शनी प्रजापति, आदि प्रमुख हैं। सूत्रों की माने तो इन दलालों को किराना और पान मसाला, गुटखा जैसे व्यापार में उसके आकाओं ने हर बार बचाया। सम्पूर्ण भारत में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले कानपुर शहर में ही सबसे ज्यादा टैक्स चोरी करने वाले व्यापारियों के ये दलाल पान मसाला-गुटखा, किराना, इलेक्ट्रानिक्स सामग्रियों, रेडीमेड कपड़ों व होजरी व्यापारियों को रोजाना करोड़ों की टैक्स चोरी करवाते करवाते खुद भी करोड़पति हो गये हैं।  सूत्र बताते हैं कि अब इन दलालों ने दो नंबर के गैरकानूनी कामों से काली कमाई करने के बाद से दान-धर्म-पुण्य में पैसा लगाना प्रारम्भ कर दिया है। 

रेडीमेड कपड़ों में टैक्स चोरी के लिए पार्सल में किया जा रहा घोटाला

किस प्रकार कानपुर में रेलवे के माध्यम से बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी हो रही है। इस टैक्स चोरी का एक बड़ा हिस्सा कानपुर के गम्मू खां के हाते में स्थित रेडीमेड गारमेंट्स बच्चों के कपड़ों और होजरी के विशाल कारखानों से संचालित हो रहा है। यह सिलाई और रेडीमेड के कारखाने व शोरूम गम्मू खां के हाते और बांसमंडी स्थित हमराज कांप्लेक्स व उसके आसपास हैं। सूत्रों के अनुसार इन क्षेत्रों से निकलने वाली माल की पेटियां हाते की विभिन्न गलियों से ही सील पैक्ड होकर रिक्शों ट्रॉलियों व लोडरों में लदकर सीधे हरबंस मोहाल स्थित रेलवे के मुख्य मालगोदाम में रात 12 बजे के बाद से ही पहुंचना शुरू हो जाती हैं। इसके बाद सारा माल गोदाम से सीधे बिना किसी क्रॉस चेकिंग के सुरंगों के रास्ते प्लेटफ ार्म पर पहुंचा दी  जाती है। ट्रेन आते ही पार्सल वैगन खोलकर उसमें सीधे लोड कर दिया जाता है। सूत्रों की माने तो कानपुर से बनकर पैक होकर देशभर में और कई पड़ोसी मुल्कों तक एक्सपोर्ट हो रहे इन बच्चों के कपड़ों और रेडीमेड गारमेंट्स के डिब्बों को पैक कराके पहुंचाने का जिम्मा जेल में बंद एक खतरनाक हिस्ट्रीशीटर और उसके भाई ने ले रखी है। इतना ही नहीं रेडीमेड कपड़ों के इन पार्सलों-डिब्बों में हवाले की मोटी रकम और दूसरी खतरनाक चीजें भेजी जा रही हैं। मगर आरोप है कि स्थानीय पुलिस, टैक्स डिपार्टमेंट और रेलवे सहित जिम्मेदार लोग सुविधा शुल्क के कारण आंखें मीचे हैं। सेल्स टैक्स या एक्साइज आदि विभागों के पास तो रेडीमेड के इस एक्सपोर्ट का जैसे कोई हिसाब-किताब ही नहीं है। स्टेशन पर इन रेडीमेड गार्मेंट्स के पहुंचने, पार्सल यानों में रेडीमेड या दूसरी चीजों को लोड किये जाते वक्त आसपास खड़े एक-दो आरपीएफ  और जीआरपी के जवान दूर कहीं हंसी-ठिठोली में व्यस्त रहते हैं। चीफ पार्सल सुपरवाइजर, उनके सहायक या रेलवे विजलेंस का कोई अधिकारी तो आसपास कभी दिखता ही नहीं। माल के लिये वैगन के लीज होल्डर या ठेकेदार द्वारा भरा गया मनमाना डिक्लेरेशन तो पहले ही जमा हो चुका होता है। पीएमएस में या कोरियर में इनके बिल, बिल्टी या रसीदें कोई मांगता नहीं है, टैक्स बचाने के लिये ये कागज भी मनमाने तरीके से बनाकर लगा दिये जाते हैं। कर्नलगंज से निकलने वाली रेडीमेड कपड़ों की पेटियां दो प्रकार की हैं। पहली तो छोटी, यानि कि 80 एमएम और दूसरी 120 एमएम की। ये लकड़ी के बॉक्सेज होते हैं, जो इलाके में ही लकड़ी के पुराने टालों पर बनते हैं। इनका वजन एक कुंटल से सवा कुंटल के बीच होता है। इनके अंदर भरा रहता है बेहद कीमती और महंगा कपड़ा, एक्सपोर्ट क्वालिटी वाले रेडीमेड गारमेंट्स। एक पेटी की कीमत एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक होती है। यूं तो सेंट्रल स्टेशन पर छुटभैया बहुत से दलाल हैं, लेकिन जो सरकार को बड़े स्तर पर टैक्स का चूना लगा रहे हैं और जिनकी रेडीमेड कपड़ों की ही कम से कम 100 पेटी सेंट्रल स्टेशन से रोज जाती हैं। इस तरह से दो कथित बड़े दलाल दिलीप कुमार गुप्ता उर्फ  पप्पू मीठे तथा अंकल उर्फ वसी हैं। ये सभी दलाल थाना कर्नलगंज क्षेत्र में स्थित रेडीमेड के बड़े-बड़े कारखानों से रेडीमेड के करोड़ों रुपये मूल्य के डिब्बे पैक करवा के लीज वाले पार्सल यानों में भरकर कर बिना फूटी कौड़ी टैक्स दिये, रेलवे के नाम पर बनाई गई फ र्जी बिल-बिल्टियों के माध्यम से सीधे गंतव्य तक पहुंचाते हैं। अनवरगंज स्टेशन पर दिल्ली से आने वाली कालिंदी एक्सप्रेस से उतरने के बाद महंगी महीन तंबाकू, विदेशी एक्सपोर्ट की गई सिगरेट आदि तुरंत पीछे के गेटों से बाहर निकाल कर, लोडरों से अनवरगंज थानाक्षेत्र में पहुंचा दी जाती है। ये माल अनवरगंज थाने के एकदम बगल वाली, पान दरीबा कहलाने वाली गली में पहुंचता है। जहां पर सिगरेट, पान मसाला, महंगी तंबाकू सहित किराना के भी ढेरोंं स्टाकिस्टों की दुकानें हैं। वहीं आसपास के गोदामों में इस कर अपवंचित माल को स्टोर कर लिया जाता हैं। सभी को जानकारी होने के बावजूद सेल्स टैक्स या एक्साइज विभाग कभी भी पान दरीबा के गोदामों या दुकानों पर छापा नहीं मारता। आखिर क्यों ? ये राज की बात है। लीज वाले पार्सल यान में भरे माल को चेक करने के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है। जबकि पैसेंजर ट्रेन में ये माल लादे जाने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से सघन चेकिंग होनी चाहिये। रेलवे सुरक्षा के लिये आरपीएफ  की सीआईबी, जैसी शाखाओं पर निर्भर है। पर रेलवे में पीएमएस सहित लीज्ड यान में करापवंचित माल का हाल देखकर लगता है कि सीआईबी का भी भगवान मालिक है। बताते चलें कि सामान्य एसएलआर या पार्सल यान की क्षमता 3 से 4 टन होती है, इतना माल भेजना ही स्वीकृत है। मगर लीज होल्डर यानि ठेकेदार इन बोगियों में 5 से 7 टन तक माल भर डालते हैं। इससे रेलवे के वैगन बहुत जल्दी जर्जर होकर खराब हो जाते है।

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