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November

अवैध होटल, लाज बैंक्वेट हाल लगा रहे राजस्व को चूना

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कब जागेगा पर्यटन विभाग, कब सील होगा फोनिक्स लॉन एंड बैंक्वेट

मैनफोर्स

लखनऊ। राजधानी में खुलेआम सराय एक्ट की धज्जिया उड़ाई जा रही है, और प्रशासन खामोश होकर तमाशा देख रहा है। राजधानी में करीब यहां चार सौ अधिक होटल, गेस्ट हाउस और लॉज हैं। जिसमें  से कुछ ही सराय एक्ट के तहत पंजीकृत हैं। जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग को भी गैर पंजीकृत होटल और गेस्ट हाउस का पता है। मगर सभी अपनी ऊपर की कमाई के लोभ के खातिर अपनी आंखों पर पट्टी बांधे हुए है। यात्रियों के ठहरने के लिए बनाए गए इन व्यवसायिक भवनों, धर्मशालाओं, गेस्ट हाउसों, होटलों लॉज, मैरिज हालों,  प्रीत भोज स्थलों आदि का सराय एक्ट 1867 के तहत पंजीकरण करना आवश्यक होता है। पंजीकरण के लिए इन प्रतिष्ठानों के संचालकों को निर्धारित मानक पूरे करने अनिवार्य होते है। जैसे स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, प्रदूषण विभाग, अग्निशमन विभाग, विद्युत विभाग आदि सहित कई सरकारी संस्थओं से अनापत्ति प्रमाण सहित अन्य आवश्यक अनुमति प्राप्त करनी होती है। इन सभी विभागों में सबसे महत्तवपूर्र्ण जिम्मेदारी पर्यटन विभाग की होती है। मगर अधिसंख्यकों के पास सराय एक्ट के तहत पंजीकरण प्रमाण पत्र ही नहीं है। ऐसे में ये व्यवसायिक भवन किसकी अनुमति से चल रहे है ? यह सबसे अहम सवाल है। इन व्यवसायिक भवनों से अपरोक्ष लाभ किन-किन विभागोंं के आलाधिकारियों द्वारा अनैतिक तरीके से अर्जित किया जा रहा है ? यह भी एक जांच का गंभीर विषय है। राजधानी में कई दर्जन होटल, लॉज, मैरिज हाल, प्रीत भोज स्थल और गेस्ट हाउस अवैध संचालित हो रहे है। राजधानी के आलमबाग क्षेत्र में भी इसी प्रकार एक प्रीति भोज स्थल जिसका नाम फोनिक्स बैनक्वीट हाल है। यह भी अवैध रूप से संचालित हो रहा है। इस बैनक्वीट हाल का संचालन पर्यटन विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण, स्वास्थ्य, आग्निशमन विभाग व क्षेत्रीय पुलिस के संरक्षण मे अनैतिक रूप से हो रहा है। मगर सभी जानबूझकर खामोश है। कारण यह है कि इसके संचालन से होने वाले लाभ में सभी की अनैतिक कमाई का एक माध्यम बंध हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फोनिक्स बैनक्वीट हाल की वार्षिक बुकिंग लगभग पचास लाख से पचहत्तर लाख रूपये का है। मगर इसके बावजूद भी सरकार को राजस्व का ढेला भर भी लाभ नहीं हो पा रहा है। उपरोक्त सभी विभागों के अधिकारियों और फोनिक्स बैनक्वीट हाल के संचालक की सांठगाठ की देन है कि सरकार को फोनिक्स बैनक्वीट हाल का संचालक खुलेआम वर्ष 2013 से लाखों रूपये का का चूना लगा रहा है और जिम्मेदार खामोश होकर तमाशा देख रहे है। नियमानुसार बगैर पंजीकरण के होटल, गेस्ट हाउस, लॉज, मैरिज हाल, प्रीत भोज स्थल आदि का संचालन किया जाना अपराधिक कृत्य माना जाता है। मगर आज तक जिम्मेदार विभागों द्वारा फोनिक्स बैनक्वीट हाल के संचालक के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि नियमानुसार होटलों, गेस्ट हाउसों, लॉजो, मैरिज हाला आदि व्यवसायिक भवनों के संचालन में सरकार को किराये का पांच प्रतिशत टैक्स देना अनिवार्य होता है। मगर बगैर पंजीकरण कराये ही विभागीय अधिकारियों से सांठगाठ होटल संचालकों द्वारा खुलेआम राजस्व की चोरी की जा रही है। फोनिक्स बैनक्वीट हाल का संचालक न केवल बिना पंजीकरण और टैक्स चुकाये बगैर हाल का संचालन कर रहा है बल्कि कृषि योग्य भूमि पर अनैतिक तरीके से इस व्यवसायिक भवन को खड़ाकर व्यवसायिक इस्तेमाल कर रहा है। सूत्रों की माने तो फोनिक्स बैनक्वीट हाल के संचालक विजय अरोड़ा के पुत्र अमित अरोड़ा हैं। विजय अरोड़ा ने अपने शातिराना दिमाग का इस्तेमाल करते हुए एनजीओ का संचालन प्रारंभ किया था। किसी को कानो कान खबर भी न हुई थी कि एनजीओ की आड़ में अनैतिक कार्य भी इनके द्वारा संपादित किये जाते रहे है। जैसे चिट फं ड कंपनी चलाना, जमीनों पर अवैध कब्जे करना आदि इस प्रकार के अनैतिक कार्य संपादित किये गये। हालकि समाचार पत्र ऐसे आरोपों की पुष्टि नहीं करता है। फि लहाल यह सब जांच का विषय है। अगर किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा लगभग वर्ष 2000 के आस-पास से जांच करायी जाये तो लखनऊ से दिल्ली तक इनके कारनामों का चिट्ठा परत दर परत खुलता जायेगा। फिलहाल विजय अरोड़ा जिस फोनिक्स बैनक्वीट हाल का संचालन कर रहे है। दरअसल फोनिक्स हाल बैनक्वीट हाल की जमीन जिसका खसरा संख्या 455 स है। जिसका क्षेत्रफल 0.1700 है। उक्त जमीन ग्राम बरगवां परगना बिजनौर तहसील सरोजनीनगर जनपद लखनऊ फसली वर्ष 1421-1426 खाता संख्या 00210 पर दर्ज है। जिसके स्वामी क्रमश: चन्द्र प्रकाश लाल, चेतन प्रकाश लाल, कुन्दल लाल पुत्र सुन्दरलाल निवासी फतेहगंज शहर लखनऊ है। मगर विजय अरोड़ा अपने तिकड़मी दिमाग से साजिश रचकर उक्त स्वामियों की जमीन पर फोनिक्स बैनक्वीट हाल खड़ा करा दिये है। जिसकी जमीन है, वह व्यक्ति अपना कब्जा पाने के लिए तमाम हाथ पैर मार रहा है। मगर वह इनके चंगुल से निकल नहीं पा रहा है। फोनिक्स बैनक्वीट हाल का का निर्माण जिस उपरोक्त भूमि पर हुआ है, उसका कुल एरिया लगभग 34000 स्क्वायर फिट है। जिसमें से लगभग 17000 स्क्वायर फि ट जमीन चन्द्र प्रकाश लाल, चेतन प्रकाश लाल, कुन्दल लाल पुत्र सुन्दरलाल निवासी फतेहगंज शहर लखनऊ की है। जो कृषि योग्य भूमि के रूप में आज भी अभिलेखों में दर्ज है। ऐसी भूमि पर खुलेआम व्यवासियक इस्तेमाल किया जा रहा है। फिर प्रशासन खामोश है। अर्थात दाल में कुछ काला अवश्य है।

 

 

 

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