01
June

हेमंत कुमार मिश्रा पत्रकार या ब्लैकमेलर!

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धन उगाही के लिए झूठी शिकायतें और पीआईएल के माध्यम से अधिकारियों को करता है खौफजदा

मैनफोर्स

लखनऊ। समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के कुकृत्यों का समय-समय पर मैनफोर्स समाचार पत्र द्वारा मय साक्ष्यों के साथ पर्दाफाश किया जाता रहा है। समाचार पत्र इस प्रकाशन में पाठकों का ध्यान एक ऐसे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर केन्द्रित करा रहा है। जिसका केन्द्र बिन्दु आम आवाम की आवाज उठाने वाला और समाज को आईना दिखाने वाला समाज का वाच डॉग अर्थात पत्रकार है। जिसके आतंक से न केवल आम आवाम परेशान है बल्कि सरकारी महकमें के अफसरान भी परेशान हैं। इन लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर इस प्रकार के भ्रष्टाचार के भस्मासुर से कैसे निपटा जाये ? यह भस्मासुर कोई और नहीं बल्कि समाज को आईना दिखाने वाले (यदा कदा मुद्रित होने वाले) हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र क्राइम रिव्यू के संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा है। जिनका नाम ब्लैकमेलर पत्रकारों की सूची में शुमार है। उपरोक्त समाचार पत्र के संपादक पर गुडम्बा थानाक्षेत्र के लोगों और कुछ सरकारी महकमों के अधिकारियों का आरोप है कि पत्रकार हेमन्त कुमार मिश्रा अपनी धन पिपाशा को तृप्त करने के लिए सरकारी कर्मचारियों की झूठी शिकायत करते है। हेमन्त कुमार मिश्रा का अखबार और पत्रकारिता को छोड़कर उन सारे कुकुर्मो से नाता है, जो जन विरोधी है। हेमन्त कुमार मिश्रा पत्रकार, संपादक कम, सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को ब्लैकमेल करने वाले ब्लैकमेलर ज्यादा हैं। सरकारी विभागों के अधिकारियों को ताड़ते रहते कि किस अधिकारी की किस अधिकारी से अनबन है। दोनों की अनबन का फायदा उठाते हुए एक दूसरे से एक दूसरे के विरूद्ध विभाग के आलाधिकारियों के समक्ष शिकायत कराते है। उन्हीं शिकायतों को आधार बनाकर इनके द्वारा एक दूसरे को ब्लैकमेल किया जाता है। किसी पक्ष से ये नकद धनराशि लेते है तो किसी पक्ष से विभागीय कार्य अपनी चहेती फर्मो को दिलाने के नाम पर लेते है। इस कार्य में ये लाखों रूपया का वारा न्यारा करते है। यदि किसी पक्ष के अधिकारी से इनको कोई लाभ नहीं मिलता तो उस अधिकारी के विरूद्ध इनके द्वारा विभागीय अधिकारियों से लेकर प्रमुख सचिव, मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री राज्यपाल तक से शिकायत कर दी जाती है। इतना ही नहीं प्रवर्तन निदेशालय, सतर्कता अधिष्ठान, सीबीआई जैसी जांच एजेन्सियों से भी शिकायत करके उन्हें गुमराह किया जाता है। अधिकारियों के खिलाफ इनके द्वारा करायी गई शिकायतों के दो चार बिन्दुओं को उक्त अधिकारी की फोटो पर मुद्रित कर उसके वाट्स एप या फेसबुक, ईमेल या मोबाइल नम्बर पर भेजा जाता है और उसे डराया धमकाया जाता है। कुछ अधिकारी ऐसे होते है जो डर जाते है, और इनके बहकावे में आकर या तो इनके द्वारा मांगी गई की धनराशि देकर अपना पिण्ड छुड़ाते है या फिर इनके भय से अनर्गल कृत्य करने के लिए विवश होते है। कुछ ऐसे भी अधिकारी होते है, जो इनकी मानसिकता और कार्यशैली को समझ जाते है और इनके चक्कर में नहीं पड़ते है। ऐसे अधिकारियों के विरूद्ध इनके द्वारा न्यायालय में पीआईएल (जनहित याचिका) डालकर परेशान किया जाता है। हेमन्त कुमार मिश्रा न केवल कर्मचारियों, अधिकारियों, जांच एजेन्सियों को गुमराह करते है बल्कि न्यायालय को भी झूठी जानकारी देकर जनहित याचिका के माध्यम से गुमराह करते है। इनकी ब्लैकमेलिंग की कहानी सिर्फ सरकारी अधिकारियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आम आवाम भी इनके इस कुकृत्य से त्राहि त्राहि कर रहा है। यदि कहीं कोई व्यक्ति अपने भवन या प्रतिष्ठान का निर्माण करा रहा हैं तो वहां बिना मतलब की अंगुली करने के लिए हेमन्त कुमार मिश्रा अपने सहयोगियों के साथ उपस्थित रहते है। जब तक संबंधित भवन का स्वामी या प्रतिष्ठान का स्वामी इनकी धन पिपाशा को तृप्त नहीं करता, तब तक उसके भवन या प्रतिष्ठान का निर्माण कार्य सम्पन्न नहीं होता है। राजधानी के लोगों को पुलिस और गुण्डों का उतना खौफ नहीं है, जितना कि हेमन्त कुमार मिश्रा का है। आम आवाम की बात छोडिय़े, इनके मोहल्ले के लोग ही इन पर आरोप लगाते है कि हेमन्त कुमार मिश्रा चाहे जमीन पर कब्जेदारी के मामले में हो या फिर आपसी मारपीट के मामले में हो, उनकी उपस्थित हर जगह पायी जाती है। जिसके कुछ उदाहरण पाठकों के समक्ष अग्रलिखित है। 

मकान बनाने को लेकर मांगी रंगदारी

आपको बता दें कि अतहर सईद पुत्र सईद उमर निवासी प्लाट संख्या 7 बहादुरपुर आदिलनगर थाना गुडम्बा लखनऊ ने द ग्रेटर सहकारी आवास समिति के सचिव अनवार अहमद से दिनांक 7 नवम्बर 2014 को 1200 वर्ग फीट का एक प्लाट (खसरा संख्या 71 बहादुरपुर) खरीदा था। इस प्लाट की बाउन्ड्री वाल बनवाने के लिए जब दिनांक 17 मार्च 2017 को अतहर सईद ने निर्माण कार्य प्रारम्भ किया तो उसी दिन सुबह करीब 9 बजे क्राइम रिव्यू हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा पुत्र कृष्ण कुमार मिश्रा निवासी (बहादुरपुर)655 ए/4/331 गायत्रीपुरम आदिलनगर लखनऊ अपने दो अन्य साथियों के साथ अतहर सईद को गाली देते हुए उसके प्लाट पर आया। हेमन्त कुमार मिश्रा ने अतहर सईद से कहाकि तुम्हे मालूम नहीं है कि इस क्षेत्र में कोई भी आदमी मुझे जब तक पैसा नहीं देता है तब तक अपना मकान बनवाना शुरू नहीं करता है। यदि तुम्हे अपना मकान बनवाना है तो पहले मुझे तीन लाख रूपये दो, उसके बाद प्लाट पर काम लगाओ। बगैर पैसे दिये अगर प्लाट पर काम लगवाया तो तुम्हे फर्जी मुकदमें में फंसा दूंगा। ज्यादा अगर हाथ पैर मारने की कोशीश की तो हाथ पैर तोड़कर बराबर कर दूंगा और जान से मार डालूंगा। हेमन्त कुमार मिश्रा के भय के कारण अतहर सईद बीच में ही अपने प्लाट का निर्माण कार्य छोड़कर भाग गया और गुडम्बा थाने में जाकर हेमन्त कुमार मिश्रा द्वारा मांगी जाने वाली रंगदारी और जान से मारने की धमकी की शिकायत की। जिसके उपरान्त गुडम्बा पुलिस ने दिनांक 18 मार्च 2017 को क्राईम रिव्यू के संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता अधिनियम 1860 की धारा 384, 504, 506 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया।

पीडि़त की जमीन पर जबरन लगाया नगर निगम का बोर्ड

पाठकों को बता दे कि अतहर सईद उस्मानी ने खसरा संख्या 71 स्क्वा0 0.4100 हे0 का बैनामा ले रखा है तथा भू-राजस्व के अभिलेखों में उनका नाम भी दर्ज है। उक्त खसरा संख्या की जमीन से कुछ दूरी पर एक अन्य जमीन पर नगर निगम का बोर्ड लगा था। हेमन्त कुमार मिश्रा ने नसीर नामक एक मजदूर को २00 रूपये देकर उक्त नगर निगम के बोर्ड को उखडवाकर अतहर सईद के उपरोक्त खसरा संख्या की जमीन पर लगवा दिया। हेमन्त मिश्रा द्वारा नसीर के माध्यम से बोर्ड को उखड़वाकर अतहर सईद की जमीन में लगाते हुए मुहल्ले के लोगों ने भी देखा था। जब इस घटना की जानकारी अतहर सईद को हुई तो वह अपने उपरोक्त भूखंड संख्या का जायजा लेने गया। जहां उसने देखा कि उसकी जमीन पर नगर निगम का बोर्ड लगा है। जब अतहर सईद अपनी जमीन से बोर्ड हटाने लगा तो हेमन्त कुमार मिश्रा अपने साथियों के साथ आया और कहने लगा कि तुम लोगों ने नगर निगम की जमीन को कब्जा किया है। हेमन्त कुमार मिश्रा ने अतहर सईद से कहाकि यदि मकान बनवाना है तो पैसा देना ही पड़ेगा, अन्यथा मुकदमा झेलो। आसपास के लोगों ने अतहर सईद से बताया कि उक्त बोर्ड हेमन्त कुमार मिश्रा ने ही मोहल्ले के नसीर से लगवाया है। इसके लिए नसीर को हेमन्त कुमार मिश्रा ने 200 रूपये दिया है। जब मामले की शिकायत अतहर सईद ने थानाध्यक्ष गुडम्बा से की तो थानाध्यक्ष ने मामले की पड़ताल की। पड़ताल में थानाध्यक्ष ने भी पाया कि उक्त नगर निगम के बोर्ड को हेमन्त कुमार मिश्रा ने ही नसीर के माध्यम से लगवाया है। नसीर ने भी लिखित रूप में अपने कृत्य को थानाध्यक्ष के समक्ष दिये गये बयान में स्वीकार किया। यही बयान नसीर ने नगर निगम में नगर आयुक्त और नगर निगम के तहसीलदार देश दीपक सिंह के सामने भी दिया। नगर निगम के आलाधिकारियों ने इस मामले में अतहर सईद को क्लीन चीट दे दी और नगर निगम को गुमराह करने के मामले में हेमन्त कुमार मिश्रा को फटकार लगायी। मगर उसके बावजूद भी हेमन्त कुमार मिश्रा अपनी दूषित कार्यशैली से बाज नहीं आया। वह नगर निगम को गुमराह करने के बाद पुन: न्यायालय को गुमराह करने करना की योजना बनाने लगाा। हेमन्त कुमार मिश्रा ने न केवल उक्त जमीन के दावेदारी को लेकर कोर्ट में जनहित याचिका दायर किया बल्कि अपने अपमान का बदला लेने के लिए भी नगर निगम के तहसीलदार देश दीपक सिंह और नगर आयुक्त उदयराज सिंह को भी कटघरे में खड़ा कर दिया।

काम दिलाने के नाम पर की धन उगाही, पैसे मांगने पर की मारपीट

हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र क्राइम रिव्यू के संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा की चार सौ बीसी यही खत्म नहीं होती है। हेमन्त कुमार मिश्रा पत्रकारिता की आड़ में न केवल लोगों से रंगदारी वसूलते है बल्कि लोगों को सरकारी नौकरी और ठेके पर काम दिलाने के नाम पर भी ठगते है। हेमन्त कुमार मिश्रा की इसी ठगी का शिकार दिनांक 15 दिसम्बर 2015 को लुकमान अहमद सिद्दीकी पुत्र स्व0 इमादुल हसन निवासी 532ए/ 572 बनारसी टोला अलीगंज लखनऊ हो गया। हेमन्त कुमार मिश्रा ने लुकमान को नगर निगम में काम दिलाने के नाम पर उससे 1,50,000 रूपया ऐंठ लिया था। मगर हेमन्त कुमार मिश्रा ने लुकमान को न तो काम दिलाया और ना ही आज तक उसका रूपया वापस किया। जब काम नहीं हुआ तो लुकमान ने हेमन्त कुमार मिश्रा से अपना पैसा मांगना शुरू कर दिया। मगर बार-बार हेमन्त कुमार मिश्रा ने उसको पैसा लौटाने का आश्वासन दिया। मगर पैसा नहीं लौटाया। दिनांक 12 अप्रैल 2017 को मिलन टॉवर के निकट गायत्री मंदिर के पास लुकमान की अचानक हेमन्त कुमार मिश्रा से मुलाकात हो गई। लुकमान ने तुरन्त अपने दिये गये पैसे की मांग की। जिससे बौखलाकर हेमन्त कुमार मिश्रा ने अपने साथियों के साथ लुकमान को मारना-पीटना शुरू कर दिया। हेमन्त कुमार मिश्रा ने लुकमान को धमकाते हुए कहाकि मैं पत्रकार हूं। तुम्हारा पैसा अब मैं वापस नहीं करूंगा। तुम्हें जो करना है कर लेना। अगर दोबारा पैसे की मांग करने आये तो जान से मार दूंगा। हेमन्त कुमार मिश्रा की धमकी से भयभीत होकर लुकमान दिनांक 14 अप्रैल 2017 को थानाध्यक्ष गुडम्बा से न्याय की गुहार लगायी और हेमन्त कुमार मिश्रा के खिलाफ तहरीर दी।

पुलिस के आधिकारियों को भी करता है ब्लैकमेल

पाठकों को बता दें कि हेमन्त कुमार मिश्रा ने जिस अतहर सईद उस्मानी की जमीन पर नगर निगम का बोर्ड लगवाया था। जिसके मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी और नगर निगम ने उसे क्लीन चीट दी थी। दरअसल उसी अतहर सईद का एक भाई है। जिसका नाम अख्तर सईद उस्मानी है। अख्तर सईद उस्मानी यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। हेमन्त मिश्रा जब अतहर सईद से जमीन के विवाद में मात खाया तो इसने न केवल नगर निगम के तहसीलदार देश दीपक सिंह वर्मा और नगर आयुक्त को झूठे आरोप में फंसाने की कोशीश की बल्कि अतहर सईद उस्मानी के भाई इंस्पेक्टर अख्तर सईद उस्मानी को भी झूठे मामले में फंसाने का षडय़ंत्र किया। इतना ही नहीं हेमन्त कुमार मिश्रा ने अतहर सईद का मुकदमा पंजीकृत करने वाले इंस्पेक्टर राजकुमार सिंह को भी नहीं छोड़ा। राजकुमार सिंह पर झूठा आरोप लगाकर बदनाम किया। हेमन्त कुमार मिश्रा के लपेटे में न सिर्फ पुलिस इंस्पेक्टर अख्तर सईद उस्मानी, राजकुमार सिंह और नगर निगम के तहसीलदार देश दीपक सिंह और नगर आयुक्त उदयराज सिंह रहे बल्कि उत्तर प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी जावीद अहमद भी थे। हेमन्त कुमार मिश्रा ने अपनी दलाली चमकाने के लिए सभी की ईमादारी पर कालिख पोत दिया। जब हर जगह से हेमन्त कुमार मिश्रा की कलुषित मानसिकता का पर्दाफाश होता गया और उसे मात मिलती गई तो इसने न्यायालय को गुमराह करना शुरू कर दिया। 

सरकारी महकमों के अधिकारियों को करता है ब्लैकमेल

हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र क्राइम रिव्यू का संपादक हेमन्त कुमार मिश्रा न केवल आम नागरिकों को ब्लैकमेल करता है बल्कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को भी ब्लैकमेल करता है। इसकी ब्लैकमेलिंग का सर्वाधिक शिकार राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के पूर्व निदेशक अनूप यादव और अपर निदेशक राम विलास यादव हुए है। इसने ईमानदारी की मिशाल कहे जाने वाले मंडी परिषद के पूर्व निदेशक आईएएस राजशेखर को भी ब्लैकमेल करने से परहेज नहीं किया। हालाकि मंडी परिषद के पूर्व निदेशक अनूप यादव और राजशेखर ने इसकी मंशा को पहले से ही भाप लिया था। इसलिए वे हेमन्त कुमार मिश्रा के ब्लैकमेलिंग के चंगुल से निगल गये। मगर उसकी गिरफ्त में मंडी परिषद के पूर्व अपर निदेशक राम विलास यादव और उप निदेशक निर्माण हाकीम सिंह आ गये। हेमन्त कुमार मिश्रा ने मंडी परिषद के एक ऐसे अधिकारी से सांठगांठ किया। जिसके अनैतिक कृत्यों को करने से तत्कालिन अपर निदेशक रहे राम विलास यादव ने मना कर दिया था। जिससे क्षुब्ध होकर उक्त अधिकारी ने अपनी दुश्मनी निकालने के लिए तत्कालिन अपर निदेशक राम विलास यादव की झूठी शिकायत न केवल विभाग के अधिकारियों से की, बल्कि प्रमुख सचिव और मुख्यमंत्री से भी की। उक्त अधिकारी ने अपर निदेशक रहे राम विलास यादव की छवि धूमिल करने के लिए हेमन्त कुमार मिश्रा से संपर्क किया। हेमन्त कुमार मिश्रा ने उक्त शिकायत के कुछ बिन्दुओं को अपर निदेशक राम विलास यादव की तस्वीर पर मुद्रित कर उसकी फोटो उनके वाट्स एप नम्बर भर भेजा। अपर निदेशक राम विलास यादव ने उक्त तस्वीर को देखा, मगर उस पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके बाद हेमन्त कुमार मिश्रा ने उनके मोबाइल नम्बर पर फोन कर खुद का परिचय देते हुए उनके मोबाइल नम्बर पर भेजे गये फोटो और उस पर मुद्रित बिन्दुओं के बारें चर्चा की। अपर निदेशक राम विलास यादव ने सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहाकि कुछ अधिकारियों ने उनसे अनर्गल कृत्य कराने का प्रयास किया था। जिसे उन्होंने करने से मना कर दिया था। जिससे क्षुब्ध होकर उक्त अधिकारियों द्वारा उनकी छवि को जानबूझकर धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है और उनके खिलाफ अनर्गल शिकायत की जा रही है। मगर हेमन्त कुमार मिश्रा ने उनकी सारी बातों को सिरे से नकार दिया और उन पर उक्त अधिकारी द्वारा लगाये गये आरोपों को सही करार देते हुए समाचार प्रकाशित करने की चेतावनी दी। मगर अपर निदेशक राम विलास यादव ने इन सभी बातों को नजरअंदाज कर दिया। जिसके बाद हेमन्त कुमार मिश्रा ने उपरोक्त फोटो जिस पर शिकायतें मुद्रित की थी। उसे फेसबुक और वाट्स एप जैसे सोशल मीडिया की वेबसाइटों पर वायरल करना शुरू कर दिया। हेमन्त कुमार मिश्रा की हरकत से मंडी परिषद की छवि धूमिल होने लगी। आलाधिकारियों और कनिष्क सहयोगी अधिकारियों ने सुझाव दिया कि हेमन्त कुमार मिश्रा की इस ओछी हरकत से विभाग की छवि धूमिल हो रही है। इस प्रकार की समस्या का निराकरण करना ही बेहतर होगा। विभाग के कुछ सहयोगी अधिकारियों ने हेमन्त कुमार मिश्रा को बुलाया और अपर निदेशक राम विलास यादव से मुलाकात कर इस मामले को रफा दफा करने का अनुरोध किया। जिसके परिणामस्वरूप हेमन्त कुमार मिश्रा ने अपर निदेशक राम विलास यादव से ६५ लाख रूपये की मांग की। अपर निदेशक राम विलास यादव ने कहाकि इतनी बड़ी रकम मैं कहा से लाकर आपको दूंगा। यदि दो चार हजार रूपये की बात है तो मंडी परिषद की छवि को बचाने के लिए कुछ व्यवस्था करने के लिए सोचा जा सकता है। इस पर हेमन्त कुमार मिश्रा ने कहाकि यदि पैसे की व्यवस्था नहीं कर सकते है तो विभाग के कुछ ठेेेके पर कराये जाने वाले कार्य ही दे दीजिए। जिससे अखबार का और मेरा खर्च चल सके। इस पर अपर निदेशक राम विलास यादव ने कहाकि ठीक है आप ठेकेदारी की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी करिये, फिर आपको काम देने पर विचार किया जायेगा। हेमन्त कुमार मिश्रा इस आश्वासन के बाद शांत हो गये। इसी बीच अपर निदेशक राम विलास यादव की प्रतिनियुक्ति समाप्त हो गई और वे अपने मूल कैडर उत्तराखंड वापस हो गये। राम विलास यादव के हटते ही हेमन्त कुमार मिश्रा की मंशा पर पानी फिर गया। फिर इन्होंने करीब ३ माह पूर्व राम विलास यादव के वाट्स एप नम्बर पर उपरोक्त मुद्रित फोटों को शेयर किया। राम विलास यादव ने पुन: इस मामले को अनदेखा कर दिया। हेमन्त कुमार मिश्रा नाराज होकर राम विलास यादव को फोन किया और कहाकि श्रीमान आपका तो स्थानांतरण हो गया और मेरा काम भी नहीं हुआ। यदि हो सके तो उत्तराखंड में ही कुछ व्यवस्था करा दीजिए। राम विलास यादव ने कहाकि यहां उनके पास ऐसा कोई कार्य है ही नहीं कि जिसे ठेके पर कराया जाये। इससे क्षुब्ध होकर हेमन्त कुमार मिश्रा ने कहाकि महोदय तब तो मुझे आपकी की पोल खोलने के लिए विवश होना पड़ेगा। यदि आप चाहते है कि मामले का पर्दाफाश न हो तो आप 65 लाख की व्यवस्था कर दीजिए या फिर ठेके का कोई कार्य आवंटित कर दीजिए। जिससे मेरा और मेरे अखबार का खर्चा चल सके। इस पर राम विलास यादव ने कहाकि महोदय मंडी परिषद की धूमिल हो रही छवि को बचाने की खातिर मैं खामोश था। अब मैं मंडी परिषद में नहीं हूं। अब आप जो चाहों वह करने के लिए स्वंतत्र हो। इसके बाद हेमन्त मिश्रा ने राम विलास यादव को ब्लैकमेल करने का खेल शुरू किया और झूठी शिकायतों के आधार पर टार्चर करना प्रारम्भ कर दिया। फिर भी वह अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो सका।

ब्लैकमेलर पत्रकार के समाचार पत्र क्राइम रिव्यू की हकीकत

हेमन्त कुमार मिश्रा जिस क्राइम रिव्यू अखबार का संचालन कर रहा है। दरअसल उस अखबार का इसने वर्ष 2016-17 का वार्षिक विवरण प्रेस रजिस्टार कार्यालय में दाखिल नहीं किया है। इतना ही नहीं इसके अखबार की नियमितता सूचना विभाग में कई वर्षो से नहीं है। इसने जिस आफसेट इंडिया प्रिन्टिंग प्रेस, मोहिनी ऑफसेट और कैपिटल प्रिन्टिंग प्रेस से अपने समाचार पत्र को प्रिन्टिंग कराने का एग्रीमेन्ट कराया है। दरअसल उक्त प्रिन्टिंग प्रेसों की छमता ही नहीं है कि वे भारी मात्रा में समाचार पत्रों की प्रतियों को प्रकाशित करें। उक्त प्रिन्टिंग प्रेसों की क्षमता प्रति घंटे 1 हजार से लेकर अधिकतम 2 हजार तक कागज एक साइड में मुद्रित करने की है। उपरोक्त प्रिन्टिंग प्रेसों में जिन कागजों का इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल उन कागजों के बंडल को रिम कहा जाता है। एक रिम में 500 कागज होते है। एक कागज में समाचार पत्र के चार पृष्ठï मुद्रित होते है। मगर एक कागज को मुद्रित करने के लिए दो प्लेटे बनायी जाती है। बारी-बारी से समाचार पत्र के एक पन्ने को दो बार में मुद्रित करते है। यदि किसी समाचार पत्र के आठ पृष्ठ है तो उसको मुद्रित करने के लिए दो कागज के पन्ने और चार प्लेटे लगेगी। अर्थात आठ पृष्ठï के समाचार पत्र की 1 हजार प्रतियां मुद्रित करने के लिए मशीन को कम से कम चार घंटे लगातार संचालित करना पड़ेगा। हेमन्त कुमार मिश्रा के अखबार हिन्दी मासिक और हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र क्राईम रिव्यू का सर्कुलेशन वर्ष 2013-14 में 13000 प्रतियां, वर्ष 2014-15 में 11000 प्रतियां, वर्ष 2015-16 में 16000 प्रतियां प्रति सप्ताह मुद्रित किया जाना दर्शाया गया था। जबकि उपरोक्त प्रिन्टिंग प्रेसों पर प्रति दिन 40 से 50 अखबारों को मुद्रित किया जाता है। उक्त प्रिन्टिंग प्रेस पर मुद्रित होने वाले समाचार पत्रों के पृष्ठों की संख्या न्यूनतम चार पृष्ठ से लेकर अधिकतम 20 पृष्ठों तक है। इन प्रिन्टिंग प्रेसों पर मुद्रित होने वाले अखबारों में लगभग 15 से 20 दैनिक अखबार है। जिनका सर्कुलेशन न्यूनतम 2 हजार से लेकर अधिकतम 1 लाख प्रतिदिन के हिसाब से है। अब सवाल यह उठता है कि जब उक्त प्रिन्टिंग प्रेसों की क्षमता प्रति घंटे 1 हजार से लेकर 2 हजार प्रति कागज मुद्रित करने की है तो इतने भारी संख्या में दैनिक अखबार उक्त प्रिन्टिंग प्रेसों पर कैसे मुद्रित होते है। जब इतनी भारी मात्रा के सर्कुलेशन वाले दैनिक अखबार ही इन प्रेसों पर मुद्रित नहीं हो सकते तो कैसे अन्य साप्ताहिक और मासिक समाचार पत्र मुद्रित होते है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि इन प्रेसों पर हेमेन्त कुमार मिश्रा कैसे क्राइम रिव्यू अखबार की 11 हजार से लेकर अधिकतम 16 हजार तक की प्रतियां प्रति प्रकाशन दिवस मुद्रित कराते रहे है। हेमन्त कुमार मिश्रा ने न केवल प्रेस अनुबंध और मुद्रण की गलत जानकारी प्रेस रजिस्टार भारत सरकार, जिलाधिकारी लखनऊ, जिला मजिस्टे्रट लखनऊ सहित अन्य अधिकारियों दी है बल्कि इन्होंने वर्ष 2016-17 में अपने समाचार पत्र क्राइम रिव्यू का वार्षिक विवरण भी दाखिल नहीं किया। इतना ही नहीं वर्ष 31 अगस्त 2012 में इन्होंने उपरोक्त अखबार का पंजीकरण कराया था। नियमानुसार वर्ष 2012  में जब इन्हें पहली बार उक्त समाचार पत्र का शिर्षक आवंटित हुआ था, तबसे लेकर मार्च 2013 तक का वार्षिक विवरण दाखिल करना अनिवार्य था। मगर इन्होंने वर्ष 2012-13 का वार्षिक विवरण भी दाखिल नहीं किया। जो प्रेस अधिनियम में प्रकाशकों के कर्तव्यों का खुला उल्लंघन है। पाठकों को बता दे कि इन्होंने अपने अखबार क्राइम रिव्यू के शिर्षक आवंटन में भी गड़बड़ी की है। इनके अखबार के नाम को प्रेस रजिस्टार कार्यालय ने पूर्व में डी ब्लाक भी किया है। जिसकी विधिवत जानकारी समाचार पत्र अपने अगले अंक में प्रकाशित करेंगा। 

अनैतिक तरीके से इस ब्लैकमेलर पत्रकार ने अर्जित की संपत्ति

हेमन्त कुमार मिश्रा की कहानी सिर्फ पत्रकारिता की आड़ में लोगों को ब्लैकमेलिंग करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि कुर्सी रोड पर ब्लैकमेलिंग से अर्जित की गई संपत्तियों से भी है। हेमन्त कुमार मिश्रा के ब्लैकमेलिंग से अर्जित संपत्ति का साक्षात् उदाहरण इनका गायत्रीपुरम आदिलनगर का आवास है। जिसे इन्होंने तालाब की जमीन को पाटकर बनाया है। अब इनकी नियत खुद के मकान के सामने स्थित तालाब की जमीन को हड़पने की है। इन सभी जानकारियों को मैनफोर्स समाचार पत्र अगले अंक में प्रकाशित करेंगा।

कुछ वकीलों और नेताओं के दम पर करता ब्लैकमेलिंग

हेमन्त कुमार मिश्रा की ब्लैकमेलिंग का यह खेल कुछ वकीलों और नेताओं के दम पर चलता है। हेमन्त कुमार मिश्रा अक्सर उन्हीं लोगों को ब्लैकमेल करते है। जिससे उन्हें कुछ लाभ हो। मगर सरकारी अधिकारियों को वह इसलिए ब्लैकमेल करता है ताकि अपने राजनैतिक आकाओं के स्वार्थ को सिद्ध कर सके और उसे बदले में कुछ लाभ मिल सके। इस खेल में कौन-कौन से नेता और वकील शामिल है। इसका पर्दाफाश मैनफोर्स समाचार पत्र अपने अगले अंक में करेगा।

हेमन्त कुमार मिश्रा की ब्लैकमेलिंग के शिकार आम लोग

1:-अतहर सईद उस्मानी 2:-लुकमान अहमद

3:-अनवार अहमद         4:-पप्पू सिंह

5:आरपी सिंह          6:-डी.पी. पाण्डेय

7:-रोहन टिम्बर         8:-अनवर हुसैन उस्मानी

9:-डॉ. कुसुम विलास यादव10:-अरूण कुमार यादव

ब्लैकमेलिंग सूची में शामिल आईएएस अधिकारी

1:- मंडी परिषद के पूर्व निदेशक आईएएस डॉ. अनूप यादव

2:-पूर्व नगर आयुक्त लखनऊ उदयराज सिंह

3:-पूर्व तहसीलदार देश दीपक सिंह वर्मा

4:-लेखपाल सुनील दत्त वर्मा

5:-मंडी परिषद के पूर्व निदेशक राजशेखर

6:-मंडी परिषद के  पूर्व अपर निदेशक डॉ. राम विलास यादव

7:- मंडी परिषद के पूर्व अपर निदेशक प्रशासन रणविजय यादव

8:-पूर्व निदेशक राज्य संपत्ति निदेशालय बृजराज सिंह यादव

9:-मंडी परिषद के पूर्व संयुक्त निदेशक हाकिम सिंह यादव

5:-मंडी इंस्पेक्टर गाजीपुर रामनाथ यादव

ब्लैकमेलिंग सूची में शामिल इंजीनियर

1:-मंडी परिषद के पूर्व उप निदेशक निर्माण शाहजहांपुर पी.के. सक्सेना

2:-मंडी परिषद के पूर्व उप निदेशक निर्माण फर्रूखाबाद राम विलास

3:-मंडी परिषद के पूर्व उपनिदेशक निर्माण झांसी जितेन्द्र यादव

4:-मंडी परिषद के पूर्व उपनिदेशक निर्माण कानपुर देहात रामपाल यादव

5:-मंडी परिषद के वरिष्ठ लिपिक रहे सुखलाल आजाद

4:-रायबरेली के पूर्व मंडी सचिव देवता नाथ त्रिपाठी

ब्लैकमेलिंग के शिकार पुलिस अधिकारी

1:-इंस्पेक्टर अख्तर सईद उस्मानी

2:-गुडम्बा थाना के पूर्व थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव

3:-गुडम्बा थाना के पूर्व इंस्पेक्टर राजकुमार सिंह

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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