05
May

प्रदेश की कानून-व्यवस्था जंगलराज से भी बदतर : कांग्रेस विधि विभाग

Written by 
Published in home down left

कांग्रेस का जन्म संघर्ष की कोंख से हुआ है, संघर्ष उसकी विरासत: विजय कुमार पाण्डेय

लखनऊ। उत्तर-प्रदेश कांग्रेस विधि-विभाग ने प्रदेश और जिला पदाधिकारियों की आपात मीटिंग चेयमैन गंगा सिंह की अध्यक्षता में बुलाई जिसमें प्रदेश की कानून-व्यस्था, विधि-विभाग की भूमिका, संगठन को विस्तृत और मजबूत बनाने की रणनीति पर व्यापक चर्चा की गई जिसमें आगरा, बरेली, गोरखपुर, उन्नाव, सीतापुर, सुल्तानपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, रायबरेली, लखनऊ, बाराबंकी एवं शाहजहांपुर से विधि-विभाग के प्रदेश संयोजक शमशाद आलम, उपाध्यक्ष किरन बाजपेयी, एस.के.अवस्थी, रमेश चन्द्र श्रीवास्तव, औसाफ अहमद खान, जहीर अहमद खान, श्याम सुन्दर दूबे, कुलदीप मिश्रा, अमरेन्द्र कुमार, सर्वेश रावत, प्रदेश-सचिव आर चन्द्रा, शैलेश त्रिपाठी, अमित सचान, अरुणेद्र कुमार, राजेंद्र कुमार सोनकर, महेंद्र कुमार, अभिषेक यादव,सालिक चंद, आर.के. जयकिशन, शुभम गुप्ता, नवीन कुमार, अरुण कुमार, अरविन्द कुमार गौतम एवं कार्यालय सचिव अनस खान इत्यादि सैकड़ों पदाधिकारियों ने भाग लिया और अपने विचार और शुझाव रखे चर्चा का के प्रारंभ में प्रदेश संयोजक शमशाद आलम ने कांग्रेस के संघर्ष के इतिहास को याद करने, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस.के. अवस्थी धैर्यपूर्वक संघर्ष करने, डी एस तिवारी ने मानसिक और बौद्धिक संघर्ष की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आज प्रदेश का अंतिम-आदमी भय के वातावरण में जीने पर मजबूर है। कानून और व्यवस्था की जगह जंगलराज कायम है सामाजिक, धार्मिक एवं जातीय उन्माद की घटनाएँ आम हो गई हैं। शैलेश त्रिपाठी ने जंगलराज में पीड़ितों के साथ खड़े होने की बात कही। चेयरमैन गंगा सिंह ने  बेलगाम पुलिस, पुलिस हिरासत में हो रही हत्याएं, शोषण में लिप्त प्रशासन, सरकार के मूकदर्शक विधायको, मंत्रियों और सूबे के मुखिया की गैर-मौजूदगी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी का विधि-विभाग अब अंतिम-आदमी के लिए सडक से अदालत तक के संघर्ष के लिए तैयार है। इसके लिए कीमत मायने नहीं रखती है डी एस तिवारीं ने बड़े संघर्ष के लिए खड़े होने को आवश्यक बताया। मीडिया प्रभारी विजय कुमार पाण्डेय ने पूंछे जाने पर कहा कि प्रदेश के हालात जंगलराज से भी बदतर है पुलिस हिरासत में लोगों की हो रही बेरहमी से मौत, बहन-बेटियों की आबरू का सरेआम लूट लिया जाना, आगजनी, अंतिम-आदमी का उत्पीडन और उनकी जमीनों और संपत्तियों पर जबरदस्ती हो रहे कब्जे सामान्य घटना सरकार के लिए बन गई है लेकिन हमारा विधि-विभाग मूकदर्शक की भूमिका कैसे निभा सकता है जब उसका इतिहास ही संघर्ष की कोख में लिखा गया है। विजय पाण्डेय ने आगे बताया कि आज हमने गंगा  सिंह जी के मार्गदर्शन में संघर्ष-समिति का गठन किया है जो लखनऊ ही नहीं पूरे प्रदेश में लोगों के साथ हो रहे अत्याचार और अनाचार में उनके साथ मजबूती से खड़ी होगी और प्रत्येक स्तर पर जनहित में संघर्ष करेगी और प्रदेश सरकार की सामाजिक, धार्मिक और जातीय उन्माद की राजनीति को बेनकाब करेगी।

 

  

 

 

 

Read 337 times Last modified on Saturday, 05 May 2018 17:01
Rate this item
(3 votes)

Leave a comment

Make sure you enter the (*) required information where indicated. HTML code is not allowed.