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May

सपा—बसपा के जिस समीकरण से मिली बीजेपी को मात, क्या कैराना में अब दिलाएगा जीत!

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लखनऊ। सपा और बसपा का सियासी समीकरण बीजेपी पर भारी पड़ता दिख रहा है। गोरखपुर और फूलपुर में ही नहीं कैराना में भी उसके खाते में इसी समीकरण ने नाकामी जुड़ी थी। बीजेपी अब इसी समीकरण को दुरुस्त कर इसके जरिए कैराना उपचुनाव में जीत दर्ज करने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि पिछले चुनाव में इस समीकरण से कैराना सीट बीजेपी हारी थी और अब इसके दुरुस्त होने से उसकी जीत पक्की है. हाल ही में गोरखपुर और फूलपुर के संसदीय उपचुनाव में सूबाई सियासत में उभरे 'बुआ-भतीेजे' के सियासी समीकरण ने बीजेपी को एक बड़ा झटका दिया था. अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बीएसपी के इस समीकरण से पहले भी बीजेपी के खाते में ऐसे ही एक और सियासी गणित ने मात लिख चुका है। यह समीकरण है पश्चिम उत्तर प्रदेश के कैराना का. बीजेपी के दिग्गज नेता हुकुम सिंह के पारिवारिक सियासी घमासान की वजह से उनकी पार्टी को नुकसान हो चुका है। दरअसल, बीजेपी सांसद रह चुके दिवंगत हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में उतारा था. लेकिन, मृगांका को सियासी राह पर अपने पहले कदम पर ही परिवार के अंदर से ही चुनौती का सामना करना पड़ा। उनके भतीजे अनिल चौहान ने उनके खिलाफ मैदान में उतरकर अपनी बुआ की राह मुश्किल कर दी. नतीजा यह रहा कि बीजेपी को कैराना विधानसभा क्षेत्र में हार का मुंह देखना पड़ा. कैराना में एक बार फिर सियासी घमासान होना तय हो चुका है। हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई लोकसभा सीट पर बीजेपी उनकी बेटी मृगांका सिंह को मैदान में उतारने की तैयारी में है। मगर उसे बुआ-भतीजे के दो-दो समीकरण से पार पाने की चिंता भी सता रही है. एक ओर अखिलेश और मायावती के एक साथ आने से कड़ा चुनावी मुकाबला होने का डर सता रहा है. वहीं कैराना विधानसभा चुनाव में उसकी हार का कारण बने हुकुम सिंह के परिवार के बुआ-भतीजे के बीच का छत्तीस का आंकड़ा भी डरा रहा था. बीजेपी ने अब मृगांका सिंह और अनिल चौहान के बीच की दुश्मनी को पाट कुछ हद तक अपनी मुूश्किलें कम कर ली हैं. उपचुनाव को लेकर हुकुम सिंह के भरोसेमंद लोगों ने उनकी बेटी मृगांका के चुनाव की कमान संभाल ली है तो अनिल चौहान को भी सुलह के लिए तैयार कर लिया है. माना जा रहा है कि अनिल चौहान की जल्द ही बीजेपी में वापसी करा उन्हें पार्टी प्रचार में उतारा जाएगा. मृगांका और उनके भतीजे अनिल चौहान के बीच सियासी दुश्मनी खत्म होने के बाद बीजेपी इस सीट को अपने खाते में बरकरार रखने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नजर आ रही है. बता दें कि कैराना संसदीय सीट और बिजनौर की नूरपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव को लेकर 28 मई को मतदान होना है। इसके नतीजे 31 मई को आएंगे।

 

 

 

Read 178 times Last modified on Thursday, 03 May 2018 09:43
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