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April

पूर्व रिटर्निंग आफिसर पर आगामी चुनाव में भाग लेने पर लग सकती है रोक

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लखनऊ। एएफ़टी बार की प्रबंध-कारिणी समिति का चुनाव सम्पन्न कराने वाले पूर्व निर्वाचन अधिकारी डा.ज्ञान सिंह ने चुनाव से संबंधित समस्त सामग्रियों एवं पत्रावलियों को व्यक्तिगत सम्पत्ति के रूप में अपना दावा प्रस्तुत करते हुए आज तक नव-नियुक्त बार के मुख्य-निर्वाचन अधिकारी योगेश केशरवानी को नहीं सौपा जबकि 13 अप्रैल को साधारण-सभा हुए एक हफ्ते से अधिक हो चुके हैं नव-नियुक्त बार के मुख्य-निर्वाचन अधिकारी द्वारा मांगें जाने पर उन्होंने देने से इंकार कर दिया जिसके बाद बार के महामंत्री ने स्वच्छ, पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए उनको पत्र लिखकर चौबीस घंटे के अन्दर बार की समस्त पत्रावलियों एवं सामग्रियों को योगेश केशरवानी को सौपने का आग्रह करते हुए कहा कि  यदि ऐसा न किया गया तो चुनाव में बाधा उत्पन्न करने और बार की सार्वजनिक सम्पत्ति पर व्यक्तिगत अधिकार जमाने के मामले में कठोर कार्यवाही की जाएगी जिसकी सूचना विभागाध्यक्ष सेना कोर्ट, जिला अधिकारी लखनऊ, अध्यक्ष बार काउन्सिल उत्तर-प्रदेश एवं रजिस्ट्रार सोसाइटी विकास दीप  को रजिस्टर्ड डाक से भेज दी गई। 18 अप्रैल को जारी पत्र को लेने से इंकार करते हुए कहा कि रिटर्निंग आफिसर का बार की सम्पत्ति पर व्यक्तिगत अधिकार होता है उसे मांगने का अधिकार बार के महामंत्री को नहीं है और यदि मांगने की बलात कोशिश की गई तो बार में शांतिपूर्ण मतदान नहीं होने दूंगा और कार्यवाही करने वाले को भी जान-माल की क्षति उठानी पड़ेगी। बार के जनरल सेक्रेटरी विजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि पूर्व-निर्वाचन अधिकारी डा.ज्ञान सिंह द्वारा चुनाव से संबंधित समस्त सामग्रियों एवं पत्रावलियों को नव-नियुक्त निर्वाचन अधिकारी को न सौंपना, चुनाव में शांति भंग करने और जान-माल की धमकी दिए जाने का मामला संगीन अपराध की श्रेणी में आता है जिसके मद्देनजर अब बार द्वारा कदम उठाया जाना आवश्यक हो गया है। विजय पाण्डेय ने बताया कि कल बार की पूरी प्रबंध कार्यकारिणी समिति अध्यक्ष डा.चेत नारायण सिंह के नेत्रित्व में जिसमें उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, संयुक्त-सचिव पीके शुक्ला, कोषाध्यक्ष विशाल भटनागर, सदस्य पारिजात बेलोरा, अनुराग मिश्रा एवं विनय पाण्डेय सदर स्थित कैंट थाने में प्रथम-सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश करेंगें यदि रिपोर्ट न लिखी गई तो रजिस्टर्ड डाक से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेजी जाएगी और इसकी जानकारी सभी संबंधित अधिकारियों को भ दी जाएगी। विजय पाण्डेय ने मीडिया को डा ज्ञान सिंह के निष्कासन के जवाब में बताया कि चूँकि डा. ज्ञान सिंह पूर्व-निर्वाचन अधिकारी रह चुके है उनके निष्कासन से बार की गरिमा को ठेस पहुँच सकती है इसलिए उनको सन्निकट चुनाव और आगामी चुनाव में उनके किसी भी रूप में भाग लेने पर रोंक लगाई जा सकती है क्योंकि उनकी भाषा, विचार एवं कार्य बार की लोकतान्त्रिक मर्यादा एवं मूल्यों के विपरीत हैं जिसे किसी भी रूप में स्वस्थ लोकतांत्रिक-प्रक्रिया में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

 

 

 

 

 

 

 

Read 188 times Last modified on Friday, 20 April 2018 09:49
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